नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी
बरसात के मौसम में गरमा-गरम चाय और पकौड़ों का आनंद लेना किसे पसंद नहीं होता। लेकिन राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना कस्बे में पकौड़ों की एक ऐसी दुकान है जो अपने अनोखे नाम के चलते लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां के लोग इन्हें 'मच्छर के पकौड़े' कहकर बुलाते हैं, जिसे सुनकर पहली बार में कोई भी हैरान हो सकता है।
क्या वाकई इसमें मच्छर होते हैं?
पकौड़ों का नाम सुनकर मन में ख्याल आ सकता है कि कहीं ये वाकई मच्छरों से तो नहीं बने, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वास्तव में, इस दुकान के मालिक का नाम ही मच्छर है। उन्हीं के नाम पर इन पकौड़ों का नाम मच्छर के पकौड़े पड़ गया। इन पकौड़ों को बनाने के लिए बेसन, ताजे प्याज, आलू और हरी मिर्च जैसी साधारण सामग्री का ही इस्तेमाल किया जाता है, जो इनका स्वाद बेहद स्वादिष्ट और कुरकुरा बनाता है।
बारिश में बढ़ जाती है मांग
जैसे ही आसमान में बादल छाते हैं और बारिश की शुरुआत होती है, इन पकौड़ों की बिक्री में भारी उछाल देखने को मिलता है। दूर-दराज से लोग यहाँ के चटपटे स्वाद को चखने के लिए खिंचे चले आते हैं। बयाना में इन पकौड़ों की कीमत 300 रुपए प्रति किलो है। आज ये पकौड़े वहां की बरसाती संस्कृति और खान-पान का एक अटूट हिस्सा बन चुके हैं, जिन्हें लोग बड़े चाव से खाते हैं।
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