भारत और उज्बेकिस्तान के मजबूत होते संबंधों को एक नया आयाम देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेक राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस मुलाकात के बाद एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के आपसी सहयोग, व्यापार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और उज्बेकिस्तान की सोच, आकांक्षाएं और लक्ष्य काफी हद तक एक समान हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यह उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता, करीबी समन्वय और मजबूत होते संबंधों का एक जीवंत प्रमाण है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों का साझा विजन भविष्योन्मुखी है। उन्होंने कहा कि यांगी उज्बेकिस्तान (नया उज्बेकिस्तान) और भारत का विकसित भारत 2047 का संकल्प, दोनों के ही केंद्र में युवा शक्ति, नवाचार, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक शामिल हैं। इस साझा दृष्टिकोण पर आगे बढ़ते हुए दोनों देश अपने नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने और उनके कल्याण के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।
2030 तक व्यापार को 5 बिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य
दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कई बड़े फैसले किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि इस साल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को कॉम्प्रहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप यानी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने का बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हमने इस नई साझेदारी के तहत तेज गति और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार किया है।
आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। अब इस दिशा में और तेजी से कदम बढ़ाते हुए दोनों देशों ने साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है।
खाद्य सुरक्षा और आधुनिक कृषि में पूरक सहयोग
आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार पहुंच, कनेक्टिविटी, बैंकिंग प्रणाली और पेमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवस्थागत रूप से काम किया जाएगा। बुनियादी ढांचे के विकास में दोनों देशों के हित जुड़े हैं और इसके लिए आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, AI, क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, स्पेस और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग हमारे संबंधों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। यूरेनियम की आपूर्ति को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई है।
कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों की ताकत एक-दूसरे की पूरक है। उन्होंने दोनों देशों के सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा:
उज्बेकिस्तान का हॉर्टिकल्चर यानी बागवानी का समृद्ध अनुभव और भारत की आधुनिक कृषि पद्धतियां जब आपस में मिलेंगी, तो हम दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा में बड़ा योगदान दे सकेंगे। इसी तरह, उज्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियां और भारत की आयुर्वेद विशेषज्ञता का मेल एक प्राकृतिक और आदर्श संयोजन है। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को लेकर आज हुए समझौते से हमारे इन साझा प्रयासों को और अधिक बल मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सहयोग केवल दोनों देशों की राजधानियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राज्यों और शहरों के स्तर तक ले जाया जाएगा। भारत और उज्बेकिस्तान के विभिन्न राज्यों और शहरों के बीच सीधे संबंध स्थापित किए जाएंगे, जिससे शहरी प्रबंधन, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्रों में सीधा जुड़ाव और मजबूत होगा।
आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरा आपसी विश्वास दिखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत और उज्बेकिस्तान की रक्षा प्रणालियों और उद्योगों के बीच सीधे जुड़ाव, सह-उत्पादन और सह-विकास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। सुरक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अत्यंत कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए बेहद गंभीर चुनौतियां हैं। इन खतरों के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है और इस दिशा में हमारा साझा संकल्प आगे भी अटूट रहेगा।
सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और हिंदी को प्रोत्साहन
दोनों देशों के मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी साझा विरासत हमारे रिश्तों की सबसे गहरी जड़ है। उज्बेकिस्तान में मौजूद बौद्ध धरोहर स्थलों के संरक्षण के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। युवाओं, छात्रों और पेशेवरों के बीच आपसी संपर्क और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों के नागरिकों के बीच पर्यटन को गति देने के लिए एक विशेष सहयोग कार्यक्रम पर भी सहमति बनी है।
शिक्षा और भाषा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा विशेष स्कॉलरशिप की घोषणा की जा रही है।
चेस और पारंपरिक खेलों में बढ़ेगा रोमांच
दोनों देशों के संबंधों में खेल भी एक बेहद महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले साल गोवा में आयोजित चेस प्रतियोगिता का जिक्र करते हुए कहा कि उज्बेकिस्तान के 20 वर्षीय ग्रैंड मास्टर सिंधारो ने वहां आयोजित वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक खिताबी जीत दर्ज की थी। अब आने वाले नवंबर महीने में उनका मुकाबला भारत के बेहद प्रतिभाशाली 20 वर्षीय चेस चैंपियन गुकेश के साथ होने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब शतरंज की बिसात पर दोनों देशों के ये दो युवा सितारे आमने-सामने होंगे, तो पूरी दुनिया की निगाहें इस रोमांचक मुकाबले पर टिकी होंगी।
उन्होंने अगले महीने समरकंद में आयोजित होने जा रहे चेस ओलंपियाड के लिए भी अपनी शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में कुराश और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल दोनों देशों के खेल संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। इस वार्ता से पहले प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से नवाजा गया, जो दोनों देशों के अटूट विश्वास का प्रतीक है।
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