अजमेर जाएं तो जरूर देखें नारेली जैन मंदिर, अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा है यह खूबसूरत पर्यटन स्थल

अजमेर से मात्र 8 किमी दूर स्थित 'ज्ञानोदय तीर्थ नारेली' अपनी अद्भुत गुलाबी पत्थर की वास्तुकला और अरावली की हरी-भरी वादियों के लिए प्रसिद्ध है। मानसून के समय यहाँ का प्राकृतिक नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है।

राजस्थान का अजमेर शहर अपने ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक महत्व के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अगर आप जल्द ही अजमेर जाने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक ऐसी जगह की सैर करना बेहद जरूरी है जो आपकी यात्रा को यादगार बना देगी। अजमेर के मुख्य शहर से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित "ज्ञानोदय तीर्थ नारेली", जिसे आमतौर पर नारेली जैन मंदिर के नाम से जाना जाता है, एक ऐसा पावन स्थल है जहाँ प्राकृतिक सुंदरता और गहरी आध्यात्मिक शांति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों की तलहटी में बसा यह भव्य मंदिर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक पसंदीदा स्थल बन चुका है।

अरावली की हरी-भरी गोद में बसा आध्यात्मिक केंद्र

नारेली जैन मंदिर विशेष रूप से वर्षा ऋतु और मानसून के बाद के समय में अपनी अलौकिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित होने के कारण इस जगह का वातावरण बेहद शांत और शुद्ध रहता है। भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए यह एक उत्तम स्थान है। मानसून के मौसम में जब चारों तरफ हरियाली छा जाती है, तब इस पूरे परिसर का नजारा देखते ही बनता है। प्रकृति की गोद में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है।

भव्य वास्तुकला और गुलाबी पत्थरों की कलाकृति

नारेली जैन मंदिर दिगंबर जैन समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र तीर्थ स्थल है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बेजोड़ वास्तुकला है। मंदिर के निर्माण में पारंपरिक भारतीय मंदिर निर्माण शैली और आधुनिक स्थापत्य कला का एक बहुत ही सुंदर और संतुलित समन्वय देखने को मिलता है। इस भव्य मंदिर को बनाने के लिए विशेष रूप से गुलाबी पत्थरों का उपयोग किया गया है। इन गुलाबी पत्थरों पर की गई बेहद बारीक और कलात्मक नक्काशी हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियां और डिजाइन भारतीय शिल्प कौशल की उत्कृष्ट मिसाल पेश करते हैं।

पहाड़ी पर स्थित 24 कूट मंदिर

मुख्य मंदिर परिसर के अलावा, इस तीर्थ स्थल का एक और बड़ा आकर्षण इसके पीछे की तरफ फैली पहाड़ियों पर बने मंदिर हैं। पहाड़ी के ऊपर जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों को समर्पित छोटे-छोटे कूट मंदिर (जिनालय) बनाए गए हैं। पहाड़ी की चढ़ाई करते हुए जब पर्यटक और श्रद्धालु इन कूटों तक पहुँचते हैं, तो उनकी सारी थकान दूर हो जाती है। इन कूट मंदिरों के पास खड़े होकर जब आप नीचे मुख्य मंदिर परिसर और आसपास के फैले प्राकृतिक परिदृश्य को देखते हैं, तो वह नज़ारा बेहद विहंगम और अद्भुत प्रतीत होता है।

मानसून के दिनों में अद्भुत नजारा और खूबसूरत बगीचे

मंदिर प्रशासन की ओर से पूरे परिसर को बेहद सलीके से सजाया और संवारा गया है। मंदिर के चारों तरफ बेहद खूबसूरती से डिजाइन किए गए हरे-भरे बगीचे और लॉन बनाए गए हैं जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। मानसून के दिनों में बारिश की बूंदें गिरते ही आसपास की सूखी और शुष्क पहाड़ियां पूरी तरह से हरी-भरी घास और वनस्पतियों की चादर ओढ़ लेती हैं। इस हरियाली के बीच स्थित मंदिर का गुलाबी रंग दूर से ही बहुत आकर्षक लगता है। पहाड़ी की ऊंचाई से प्रकृति के इस मनमोहक परिदृश्य को देखना किसी भी पर्यटक के लिए जीवन भर का एक यादगार अनुभव बन जाता है।

नारेली जैन तीर्थ की यात्रा की तैयारी: कैसे पहुंचें?

यदि आप ज्ञानोदय तीर्थ नारेली जाने का मन बना रहे हैं, तो यहाँ पहुँचना बेहद आसान और सुविधाजनक है। अजमेर मुख्य शहर से इसकी दूरी मात्र 8 किलोमीटर है। यहाँ पहुँचने के लिए निम्नलिखित परिवहन विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है:

  • सड़क मार्ग: अजमेर शहर और उसके आसपास के सभी प्रमुख क्षेत्रों से नारेली जैन मंदिर के लिए ऑटो और टैक्सी सेवाएं बेहद आसानी से उपलब्ध रहती हैं। सड़क मार्ग पूरी तरह से सुगम और व्यवस्थित है।
  • रेल मार्ग: यदि आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं, तो आपका नजदीकी मुख्य रेलवे स्टेशन अजमेर रेलवे स्टेशन होगा। यहाँ से आप स्थानीय वाहनों की मदद से सीधे मंदिर पहुँच सकते हैं।
  • हवाई मार्ग: हवाई यात्रा के जरिए आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा किशनगढ़ हवाई अड्डा है। किशनगढ़ से भी मंदिर के लिए आसानी से टैक्सी मिल जाती हैं।

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