तमिलनाडु के सियासी गलियारों से दिल्ली तक बढ़ी हलचल
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक बेहद संवेदनशील मोड़ देखने को मिल रहा है, जिसने न केवल राज्य स्तर पर बल्कि देश की राजधानी दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राज्य के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को देश के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। टीवीके कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा चलाए जा रहे इस आक्रामक प्रचार अभियान ने राज्य के सत्ताधारी गठबंधन में एक गंभीर दरार पैदा कर दी है। सत्ताधारी गठबंधन में टीवीके की प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज और असहज नजर आ रही है। कांग्रेस नेताओं में इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि अभी सरकार बने कुछ ही महीने बीते हैं और इतनी जल्दी सी. जोसेफ विजय को राष्ट्रीय नेतृत्व के मुख्य चेहरे के तौर पर प्रमोट किया जाने लगा है।
उत्तर भारत के राज्यों और विभिन्न सार्वजनिक डिजिटल मंचों पर विजय के पोस्टरों तथा सोशल मीडिया वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद कांग्रेस खेमे में डर का माहौल है। कांग्रेस पार्टी को यह आशंका सता रही है कि इस प्रकार के आक्रामक प्रचार अभियान से राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ विपक्ष के मुख्य चेहरे को लेकर जनता और मतदाताओं के बीच एक बेहद गलत और भ्रमित करने वाला संदेश जा सकता है।
विधानसभा से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक छिड़ा नया विवाद
चेन्नई से लेकर राज्य के अन्य हिस्सों में इस नए विवाद की शुरुआत तब हुई जब टीवीके के कई विधायकों और मंत्रियों ने तमिलनाडु विधानसभा के भीतर बार-बार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तारीफों के पुल बांधने शुरू किए। देखते ही देखते यह मामला सदन की चारदीवारी से बाहर निकलकर सार्वजनिक मंचों पर आ गया। राज्य के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे बड़े-बड़े पोस्टर दिखाई देने लगे, जिनमें विजय को देश के अगले प्रधानमंत्री पद के सशक्त दावेदार के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा था। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उत्तर भारत के दर्शकों को लक्षित करते हुए कई ऐसे वीडियो और रील्स साझा किए गए, जहां कांग्रेस स्वयं को भाजपा की मुख्य राजनीतिक विरोधी ताकत मानती है।
यह बहस तब और अधिक आक्रामक हो गई जब हाल ही में एक प्रमुख टीवी चैनल के सर्वे के नतीजे सार्वजनिक हुए। इस सर्वे में देश के संभावित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों को लेकर जनता की राय जानी गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 9 प्रतिशत लोगों के समर्थन के साथ तीसरा स्थान हासिल हुआ। इस सर्वे में वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से तो पीछे थे, लेकिन इतनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने से कांग्रेस के आंतरिक हलकों में चिंताएं काफी बढ़ गईं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता इस बात से काफी नाखुश थे कि तमिलनाडु में टीवीके और कांग्रेस के गठबंधन को सत्ता संभाले अभी केवल कुछ ही महीने बीते हैं और इतनी जल्दी विजय को इस सर्वोच्च पद के लिए दावेदार बनाकर पेश किया जाने लगा है।
गठबंधन की पुरानी रणनीतियों पर खड़ा हुआ संकट
इस पूरे मामले को लेकर तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर की हालिया आलोचना भी सामने आई है। उन्होंने टीवीके के मंत्रियों और नेताओं द्वारा दिखाई जा रही इस प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक ‘फैन वाली मानसिकता’ करार दिया। कांग्रेस पार्टी के लिए यह वर्तमान राजनीतिक स्थिति अत्यधिक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि टीवीके के साथ नया राजनीतिक हाथ मिलाने से पहले कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ अपना पुराना और मजबूत गठबंधन तोड़ा था। डीएमके ने पहले ही बहुत स्पष्ट रूप से राहुल गांधी को देश के प्रधानमंत्री पद के अगले उम्मीदवार के तौर पर अपना पूरा समर्थन घोषित किया हुआ था।
इस संकट के बीच कांग्रेस सांसद जोथिमानि ने हाल ही में मुख्यमंत्री विजय को इस तरह से आगे बढ़ाने के अभियान को महज एक चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया। हालांकि, उन्होंने पूरी मजबूती के साथ इस बात पर जोर दिया कि देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का डटकर मुकाबला करने और चुनावी मैदान में उन्हें मात देने के मामले में राहुल गांधी का कोई सानी नहीं है और उनका कोई मुकाबला नहीं किया जा सकता।
भविष्य के सियासी समीकरणों पर लग रहे सवालिया निशान
मदुरै में शनिवार को हुए एक विवाद के बाद जब राज्य के मंत्री निर्मल कुमार से इस अभियान के बारे में विस्तार से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि पूरे भारतवर्ष में लोग मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से बहुत अधिक उम्मीदें और आकांक्षाएं रखते हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विजय देश की तात्कालिक राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर ही कोई भी बड़ा फैसला लेंगे और फिलहाल इस पूरे विषय पर किसी भी तरह की जल्दबाजी में चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है।
वास्तव में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय रणनीतिकार दक्षिण भारत में एक अलग योजना के तहत आगे बढ़ रहे थे। उनकी मुख्य रणनीति यह थी कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के एकमात्र चेहरे के रूप में राहुल गांधी को आगे रखा जाए, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों में चुनावी संभावनाओं को अधिक मजबूत और बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की भारी लोकप्रियता और उनके बड़े जनाधार का भरपूर लाभ उठाया जाए। परंतु टीवीके समर्थकों द्वारा विजय को सीधे प्रधानमंत्री पद की होड़ में शामिल करने की इस कोशिश ने कांग्रेस की उस पूरी राजनीतिक योजना को अत्यंत जटिल और मुश्किल बना दिया है। इस नए राजनीतिक घमासान ने गठबंधन के भविष्य के संदेश, उसके नेतृत्व की वास्तविक प्राथमिकताओं और विपक्षी एकजुटता की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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