एक शानदार करियर को दी विदाई
प्रशासनिक गलियारों में एक जाना-माना नाम रहीं आईएएस दिव्या मित्तल ने अपनी सरकारी सेवा से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया है। 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की इस अधिकारी ने 13 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। दिव्या मित्तल अपनी प्रशासनिक कुशलता और जनहित में लिए गए फैसलों के लिए जानी जाती थीं। साल 2012 की यूपीएससी परीक्षा में 68वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में कदम रखने वाली दिव्या ने अपने करियर के दौरान देवरिया, संतकबीरनगर और मिर्जापुर जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए इसे अपनी मर्जी से लिया गया फैसला बताया है।
आईआईटी और लंदन की नौकरी को छोड़ भारत वापसी
दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सफर शुरू होने से पहले ही उनका शैक्षणिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने देश के शीर्ष संस्थानों, आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में एक बड़ी विदेशी कंपनी के साथ ट्रेडर के तौर पर कार्य किया। वहां का जीवन आरामदायक और सुख सुविधाओं से भरा था, लेकिन उनके भीतर देश के प्रति कुछ करने की तड़प हमेशा बनी रही। उन्हें हमेशा महसूस होता था कि उन्होंने जीवन में जो भी सफलता हासिल की है, उसका श्रेय उनके देश को जाता है और अब वक्त है उस ऋण को चुकाने का। इसी जज्बे के साथ उन्होंने अपनी शानदार अंतरराष्ट्रीय नौकरी को अलविदा कहा और भारत वापस लौट आईं ताकि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर देश की सेवा कर सकें।
प्रशासनिक सेवा के दौरान जनसेवा की मिसाल
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सोच से ऊपर उठकर काम किया। देवरिया में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नियमों का कड़ाई से पालन किया और प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया। मिर्जापुर में तैनाती के दौरान उनके द्वारा किए गए काम, विशेष रूप से लहुरिया दह गांव में पहली बार पानी पहुँचाने का मिशन, आज भी मिसाल के तौर पर याद किया जाता है। उन्होंने सरकारी फाइलों के अंबार में खो जाने के बजाय उन फाइलों के पीछे छिपे आम इंसान की जरूरतों और उनकी गरिमा को प्राथमिकता दी। उनका मानना रहा है कि असली शक्ति पद में नहीं, बल्कि उन लोगों के विश्वास में है जिनकी वे सेवा करती हैं।
सोशल मीडिया पर साझा की भावुक यात्रा
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर दिव्या मित्तल ने एक बेहद भावुक नोट लिखा है। उन्होंने कहा कि 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को उन्होंने अपनी इच्छा से विराम दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में अपनी उस साधारण पृष्ठभूमि का जिक्र किया, जहां से निकलकर उन्होंने सफलता के इतने बड़े मुकाम हासिल किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंदन में नौकरी करते हुए भी उनके मन में एक टीस थी कि कुछ अधूरा है, जो अंततः उन्हें देश की सेवा की राह पर ले आया। उन्होंने लिखा, 'आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए आईएएस से त्यागपत्र दे दिया है।'
लहुरिया दह की यादें और जनता का आशीर्वाद
अपने इस्तीफे के संदेश में उन्होंने मिर्जापुर के लहुरिया दह गांव का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने उस बुजुर्ग महिला को याद किया, जिसे नल से पानी मिलने पर उनकी आंखों में जो खुशी दिखी थी, वह उनके लिए किसी भी पद से बढ़कर थी। उस वृद्ध मां के कांपते हाथों का आशीर्वाद उन्हें आज भी भावुक कर देता है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि पद और कुर्सी चाहे छूट जाए, लेकिन जनता से मिला वह निस्वार्थ आशीर्वाद और उनकी आंखों का सुकून हमेशा उनके साथ रहेगा। यही वह पूंजी है जो उन्होंने 13 वर्षों की सेवा में कमाई है।
भविष्य और आभार की भावना
अपने सहयोगियों, प्रशासनिक अमले और जनता का आभार व्यक्त करते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्हें अपने सफर में जो प्यार और सम्मान मिला, उसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने हर कठिन पड़ाव पर उनका साथ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक पद छोड़ने का अर्थ यह नहीं है कि देश और समाज के लिए उनका काम खत्म हो गया है। भविष्य के लिए उनके मन में नए सपने हैं और वे देश के लिए निरंतर योगदान देने के प्रति संकल्पित हैं। उनके इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों और आम लोगों की ओर से ढेर सारी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जो उनके अगले कदम को जानने के लिए उत्सुक हैं।
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