फांसीकाट महादेव मंदिर: कभी यहां दी जाती थी फांसी, अब बरसती है भोलेनाथ की कृपा

जयपुर के किशनपोल बाजार में स्थित फांसीकाट महादेव मंदिर एक प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक स्थल है, जिसका इतिहास रियासतकाल की सजाओं से जुड़ा है।

इतिहास और मंदिर का नाम

जयपुर शहर अपनी भव्य हवेलियों और ऐतिहासिक बाजारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां के परकोटे की तंग गलियों में कई ऐसे स्थान हैं जो अपने साथ अनोखी कहानियां समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक है किशनपोल बाजार का फांसीकाट महादेव मंदिर। स्थानीय लोगों का मानना है कि रियासतकाल में यह वह स्थान था जहां अपराधियों को फांसी की सजा दी जाती थी। इसी कारण से समय के साथ इस जगह पर बने मंदिर का नाम फांसीकाट महादेव पड़ गया।

जुड़ी हुई लोककथा

इस मंदिर के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प लोककथा प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक महात्मा को किसी झूठे आरोप में फंसाकर इसी स्थान पर फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस घटना के बाद से ही यह स्थान फांसीकाट के नाम से पहचाना जाने लगा। बाद में यहां भगवान शिव की स्थापना की गई और आज यह मंदिर भक्तों के लिए संकटमोचन के रूप में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।

भक्तों की अटूट आस्था

आज के दौर में यहां का वातावरण पूरी तरह से बदल चुका है। सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों के दौरान यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। लोग अपनी मन्नतें लेकर यहां भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह मंदिर जयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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