अगले बजट की रूपरेखा तैयार
केंद्र सरकार ने देश के अगले आर्थिक वर्ष यानी बजट 2027-28 की तैयारी को लेकर कमर कस ली है। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के माहौल और खाद्य व ईंधन की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने बजट प्रक्रिया को समय से पहले ही गति देने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, आगामी बजट के लिए प्रारंभिक बैठकें 12 अक्टूबर 2026 से आयोजित की जाएंगी। यह प्रक्रिया नवंबर 2026 के मध्य तक चलेगी, जिसके बाद बजट को एक अंतिम स्वरूप दिया जाएगा।
बजट प्रक्रिया और समयसीमा
आर्थिक मामलों के विभाग ने बजट परिपत्र 2027-28 जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि बजट निर्माण की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी की जाएगी। व्यय सचिव की अध्यक्षता में होने वाली ये बैठकें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ विचार-विमर्श करेंगी। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी वित्तीय सलाहकार यह सुनिश्चित करें कि 6 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय बजट सूचना प्रणाली यानी UBIS में सभी आवश्यक डेटा और जानकारी पूरी तरह से दर्ज कर दी जाए।
आंकड़ों का सत्यापन और प्रक्रिया
बजट को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सरकार ने डेटा सत्यापन पर विशेष जोर दिया है। परिपत्र के मुताबिक, मंत्रालयों को निर्धारित प्रारूप में ही आंकड़ों की प्रतियां जमा करानी होंगी ताकि उनका सही सत्यापन हो सके। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का चौथा बजट होगा। वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के करियर का यह लगातार 10वां बजट होने वाला है। बैठकों के समाप्त होते ही, वर्ष 2027-28 के बजट अनुमानों और 2026-27 के संशोधित अनुमानों को अस्थायी रूप से अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
व्यय सीमा का निर्धारण
बजट-पूर्व चर्चाओं के दौरान मंत्रालयों और विभिन्न विभागों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद उन्हें प्रारंभिक व्यय सीमा के बारे में जानकारी दी जाएगी। सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि राजस्व अनुमानों और खर्च की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाया जाए। मंत्रालय द्वारा तय की गई इसी अंतिम व्यय सीमा के आधार पर ही आने वाले वित्त वर्ष का पूरा बजट ढांचा तैयार होगा। सभी संबंधित हितधारकों से विस्तृत चर्चा करने के बाद ही बजट के अंतिम मसौदे को मंजूरी दी जाएगी।
बजट का संभावित मुख्य फोकस
अगले बजट के प्राथमिक उद्देश्यों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए सरकार का पूरा जोर निम्नलिखित बिंदुओं पर रहने की संभावना है:
- आर्थिक विकास दर: जीडीपी ग्रोथ को और अधिक रफ्तार देने के लिए सुधारों को जारी रखा जाएगा।
- रोजगार सृजन: देश में नई नौकरियां पैदा करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक होगा।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए बजट में अधिक आवंटन किया जा सकता है।
- घरेलू मांग: बाजार में मांग को बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाले उपायों पर फोकस रहेगा।
- स्वास्थ्य क्षेत्र: स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए भी अधिक निवेश की उम्मीद जताई जा रही है।
चूंकि टैक्स संबंधी अधिकांश बड़े सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं, इसलिए अब सरकार का मुख्य उद्देश्य नई इन्फ्रा परियोजनाओं को पूरा करना और आम जनता व व्यापार जगत के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाया जा सके। वित्त वर्ष 2027-28 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2027 को पेश किए जाने की उम्मीद है।
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