भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भूकंप की गतिविधियों ने एक बार फिर से चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में घबराहट फैल गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भूकंप की तीव्रता काफी कम थी और इससे किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने इस भूगर्भीय हलचल की पुष्टि की है। यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब भारत के पड़ोसी देशों चीन और नेपाल में भी धरती कांपने और प्राकृतिक आपदा की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
अरुणाचल प्रदेश में आया 2.9 तीव्रता का भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 मापी गई। भूकंप का झटका महसूस होते ही लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप विभाग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस घटना की विस्तृत जानकारी साझा की। प्रशासन के अनुसार, इस भूकंप के कारण कुरुंग कुमे या उसके आसपास के क्षेत्रों से किसी भी तरह के नुकसान की कोई तत्काल रिपोर्ट नहीं मिली है।
अपर सियांग में पहले भी कांपी थी धरती
अरुणाचल प्रदेश में भूकंप आने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले बीते 6 अगस्त को भी राज्य के अपर सियांग जिले में भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। उस समय महसूस किए गए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.5 मापी गई थी। उस घटना की जानकारी भी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से जनता और मीडिया के साथ साझा की गई थी। राज्य में लगातार अंतराल पर आ रहे इन हल्के भूकंपों ने भू-वैज्ञानिकों और भूकंप विज्ञानियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जो लगातार इन गतिविधियों का विश्लेषण कर रहे हैं।
आखिर क्यों बार-बार आता है इस क्षेत्र में भूकंप?
उत्तर-पूर्वी भारत का क्षेत्र भूकंपीय दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय जैसे राज्य सक्रिय टेक्टॉनिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंप आने के पीछे मुख्य कारण यहां की भौगोलिक संरचना और जमीन के नीचे होने वाली हलचलें हैं।
- भारत का यह हिस्सा कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों और टेक्टॉनिक प्लेटों की सीमा पर स्थित है।
- विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी भारत में भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार भूगर्भीय टकराव होता रहता है।
- इस टकराव और घर्षण के कारण जमीन के नीचे अत्यधिक तनाव जमा हो जाता है, जो समय-समय पर भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलता है।
- यही वजह है कि इस पूरे पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र में लगातार छोटे और मध्यम स्तर के भूकंप आते रहते हैं।
हालांकि शुक्रवार को कुरुंग कुमे में आया भूकंप हल्की श्रेणी का था और इससे कोई बड़ी क्षति नहीं हुई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन लगातार होने वाली हलचलों पर पैनी नजर रखना बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी बड़ी आपदा से बचा जा सके।
पड़ोसी देश नेपाल और चीन में भी प्राकृतिक संकट
अरुणाचल प्रदेश में धरती हिलने की यह घटना ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है जब पड़ोसी देश नेपाल हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दर्द से जूझ रहा है। नेपाल में आई इस आपदा के कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। वहां राहत और बचाव कार्य बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है।
नेपाल के साथ-साथ शुक्रवार को चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में भी भूकंप के तेज झटके दर्ज किए गए। चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर (CENC) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में दोपहर को करीब 1 बजकर 13 मिनट पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर लगभग 13 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। राहत की बात यह रही कि लोंगचांग शहर और आसपास के इलाकों से भी अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या बड़ी तबाही की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है।
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