दिल्ली-NCR में वाहनों के आधुनिकीकरण की नई मुहिम
केंद्र सरकार ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR के 37 जिलों के लिए एक व्यापक वाहन नीति का अनावरण किया है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर दौड़ रहे पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों, जैसे कि ट्रकों और बसों को हटाकर उनकी जगह नए, कम प्रदूषण फैलाने वाले या इलेक्ट्रिक वाहनों को लाना है। इस महत्वकांक्षी योजना को 'PARIVARTAN' नाम दिया गया है, जिसका पूरा अर्थ 'Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions' है।
योजना का विस्तार और लक्ष्य
इस योजना के दायरे में वे वाहन आते हैं जो BS-IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों के तहत आते हैं। सरकार का लक्ष्य इन पुराने वाहनों को BS-VI उत्सर्जन मानकों या पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) से बदलना है। इस पहल से दिल्ली-NCR क्षेत्र में करीब 2 लाख वाहन मालिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इन लाभार्थियों में लगभग 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं। यह सुविधा केवल उन वाहनों के लिए है जो 30 अप्रैल 2026 तक दिल्ली-NCR में पंजीकृत थे। ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकारी स्वामित्व वाले वाहन इस नीति के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
नया वाहन खरीदने पर मिलने वाले प्रमुख लाभ
योजना के तहत नए वाहन खरीदने वाले मालिकों के लिए सरकार ने प्रोत्साहनों की झड़ी लगा दी है, जो इस प्रकार हैं:
- टैक्स और रजिस्ट्रेशन: नए वाहन पर 10 साल के लिए मोटर व्हीकल टैक्स में 100% की भारी छूट दी जाएगी और साथ ही रजिस्ट्रेशन फीस को भी पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा।
- ब्याज सब्सिडी: वाहन के लिए लिए गए ऋण पर 5 साल तक 5% की ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है।
- OEM डिस्काउंट: वाहन निर्माता कंपनियां यानी OEM नए वाहन की एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8% का डिस्काउंट देने के लिए बाध्य होंगी।
- फ्यूल वाउचर: पात्र BS-VI डीजल या सीएनजी वाहनों के लिए 5 साल तक हर महीने फ्यूल वाउचर दिए जाएंगे। यदि कोई इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे फ्यूल वाउचर के बराबर एकमुश्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
मासिक फ्यूल वाउचर का गणित
वाहनों की श्रेणी के अनुसार फ्यूल वाउचर की राशि अलग-अलग तय की गई है। इन वाउचर का उपयोग लाभार्थी उसी महीने में NCR के किसी भी फ्यूल आउटलेट पर कर सकेंगे। मासिक सीमाएं इस प्रकार हैं:
- LGV/LPV श्रेणी: ₹1,200 प्रति माह।
- MGV/MPV श्रेणी: ₹2,500 प्रति माह।
- HGV/HPV श्रेणी: ₹4,800 प्रति माह।
स्पष्ट रहे कि जिस महीने का फ्यूल वाउचर उपयोग नहीं होगा, उसे अगले महीने के लिए आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।
सेकंड हैंड वाहन लेने वालों के लिए प्रावधान
योजना केवल नए वाहनों तक ही सीमित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुराना वाहन बदलकर सेकंड हैंड वाहन खरीदता है, तो उसे भी लाभ मिलेंगे: 10 साल के लिए 50% मोटर व्हीकल टैक्स में छूट, 5 साल तक 5% ब्याज सब्सिडी, और डीजल/सीएनजी वाहनों के लिए 5 साल तक फ्यूल वाउचर की सुविधा मिलेगी। वहीं, यदि लाभार्थी कोई भी नया या पुराना वाहन नहीं खरीदना चाहता और अपने 'सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट' (CoD) को ट्रेड कर देता है, तो उसे एकमुश्त वित्तीय लाभ देने का प्रावधान भी रखा गया है।
पुराने वाहनों को हटाने के नियम
वाहनों को हटाने की प्रक्रिया उनके उत्सर्जन मानक पर निर्भर करती है। BS-III और उससे पुराने वाहनों को 'रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी' (RVSF) में स्क्रैप कराना अनिवार्य है। वहीं, BS-IV वाहनों के लिए दो विकल्प दिए गए हैं: पहला उन्हें स्क्रैप कराना, या दूसरा उन्हें NCR से बाहर उन क्षेत्रों में बेच देना जो गैर-NCAP श्रेणी में आते हैं। यदि वाहन पर एक साल से अधिक की कोई देनदारी बकाया है, तो संबंधित राज्य सरकार उसे माफ करने में मदद करेगी।
डिजिटल प्रक्रिया और कार्यान्वयन
पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने 'PARIVARTAN' पोर्टल तैयार किया है। इसे VAHAN, Digi ELV और V-Scrap जैसे मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। वाहन मालिकों को अपनी पात्रता जांचने के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। योजना का कार्यान्वयन 2 साल की अवधि के लिए होगा, लेकिन सब्सिडी और छूट के लाभ 5 से 10 साल तक जारी रहेंगे। इस योजना में NCR के कुल 37 जिले शामिल हैं, जिनमें दिल्ली के 13, हरियाणा के 14, उत्तर प्रदेश के 8 और राजस्थान के 2 जिले शामिल हैं। यह स्वैच्छिक फ्लीट रिप्लेसमेंट योजना दिल्ली-NCR की हवा को साफ करने के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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