यूपीएससी परीक्षा: बदलते पैटर्न से घबराएं नहीं, आईएएस ऋत्विक मेहता ने बताए सफलता के अचूक उपाय

यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए आईएएस अधिकारी ऋत्विक मेहता ने विशेष टिप्स साझा किए हैं, जिनमें चार मुख्य विषयों पर पकड़ और नियमित अभ्यास को अनिवार्य बताया गया है।

बदलते दौर में परीक्षा की रणनीति

आज के दौर में यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं का स्वरूप लगातार बदल रहा है। इस निरंतर बदलाव के कारण तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के मन में अक्सर तनाव और अनिश्चितता का भाव पैदा हो जाता है। पलामू जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर कार्यरत आईएएस अधिकारी ऋत्विक मेहता का मानना है कि परीक्षा के पैटर्न में बदलाव होना एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे में उम्मीदवारों को घबराने के बजाय अपनी कार्ययोजना को नए सिरे से तैयार करने की आवश्यकता है। जो विद्यार्थी बदलती परिस्थितियों के साथ खुद को ढाल लेते हैं, उनके सफल होने की संभावना कहीं अधिक हो जाती है।

आधारभूत समझ को बनाएं प्राथमिकता

आईएएस ऋत्विक मेहता के अनुसार, परीक्षा की तैयारी का सबसे पहला और अनिवार्य चरण अपने बेसिक्स और फंडामेंटल यानी मूल अवधारणाओं को मजबूत करना है। यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में अब प्रश्नों के पूछने का तरीका हर साल बदल रहा है। इस स्थिति में केवल तथ्यों को रटने या याद करने से काम नहीं चलेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे रटने के बजाय विषय के पीछे छिपे कॉन्सेप्ट और उसके कारणों को गहराई से समझें। जब किसी विषय की बुनियादी समझ स्पष्ट होती है, तो परीक्षा में चाहे प्रश्न कितना भी घुमाकर पूछा जाए, उसका सही उत्तर ढूँढना आसान हो जाता है।

इन चार विषयों पर रखें विशेष नजर

आईएएस ऋत्विक मेहता ने यूपीएससी की तैयारी के दौरान चार ऐसे प्रमुख विषयों की पहचान की है, जिन्हें उन्होंने 'बिग फोर' या 'स्टैटिक फोर' का नाम दिया है। इन विषयों पर अच्छी पकड़ होने से प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का एक बड़ा हिस्सा तैयार हो जाता है। ये चार विषय निम्नलिखित हैं:

  • पॉलिटी एंड गवर्नेंस: संविधान और शासन व्यवस्था की गहरी समझ।
  • इकोनॉमी: भारतीय अर्थव्यवस्था और उससे संबंधित बुनियादी सिद्धांत।
  • जियोग्राफी एंड एनवायरमेंट: भूगोल के साथ-साथ पर्यावरणीय मुद्दों का अध्ययन।
  • हिस्ट्री: इसमें आर्ट एंड कल्चर, प्राचीन भारत, मध्यकालीन इतिहास और विश्व इतिहास जैसे महत्वपूर्ण खंड शामिल हैं।

यद्यपि परीक्षा में अन्य विषयों का भी अपना महत्व होता है, लेकिन यदि अभ्यर्थी इन चार क्षेत्रों को मजबूती से तैयार कर लेते हैं, तो वे प्रतियोगिता में बढ़त बना सकते हैं।

थ्योरी और अभ्यास का संतुलन

केवल सिद्धांतों को पढ़ लेना ही सफलता की गारंटी नहीं है। ऋत्विक मेहता स्पष्ट करते हैं कि डिजास्टर मैनेजमेंट, इंटरनेशनल रिलेशन और इंटरनल सिक्योरिटी जैसे विषयों की तैयारी करते समय थ्योरी के साथ-साथ निरंतर प्रैक्टिस करना आवश्यक है। कई बार अभ्यर्थी परीक्षा के नजदीक आने पर प्रैक्टिस शुरू करते हैं, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। यदि प्रैक्टिस के दौरान अंक कम आते हैं, तो यह हताशा का कारण भी बन सकता है। इसलिए, तैयारी की शुरुआत से ही उत्तर लेखन की आदत डालना और प्रश्नों का अभ्यास करना बहुत प्रभावी रहता है।

ऑनलाइन संसाधनों और अनुशासन का महत्व

वर्तमान समय में ऑनलाइन संसाधनों की उपलब्धता ने पढ़ाई को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना दिया है। अभ्यर्थी गूगल पर किसी भी विषय से जुड़ी सटीक जानकारी खोज सकते हैं और यूट्यूब जैसे माध्यमों का उपयोग करके कठिन विषयों को सरलता से समझ सकते हैं। हालांकि, जानकारी का भंडार जुटाने से ज्यादा जरूरी उसका सही इस्तेमाल है। उत्तर लिखते समय बहुत अधिक डेटा भरने के बजाय उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित, तार्किक और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना अधिक प्रभावशाली होता है।

अनुशासित दिनचर्या के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि घर पर रहकर पढ़ाई करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे यात्रा का समय बचता है और अभ्यर्थी पूरी ऊर्जा अपनी एकाग्रता बढ़ाने में लगा सकते हैं। निरंतरता और अनुशासन ही वह कुंजी है जो कठिन से कठिन परीक्षा में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।

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