तेलंगाना: रक्षाबंधन पर सीएम रेवंत रेड्डी और कोंडा सुरेखा की मुलाकात, क्या दूर हुई सियासी तनातनी?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और मंत्री कोंडा सुरेखा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच रक्षाबंधन की मुलाकात सुर्खियों में है। हालांकि दोनों ने शिष्टाचार निभाया, लेकिन उनके बीच की दूरी ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

रक्षाबंधन पर सियासी मिलन और अनकहे सवाल

तेलंगाना कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी कलह और सियासी उठापटक के माहौल में रक्षाबंधन का पर्व एक अलग ही तस्वीर लेकर सामने आया। राज्य के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के आधिकारिक आवास पर मंत्री कोंडा सुरेखा और मंत्री सीतक्का का आगमन चर्चा का केंद्र रहा। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी, लेकिन इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच दिखी असहजता और दूरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हाल के दिनों में परकाला विधानसभा क्षेत्र को लेकर हुए विवाद के बाद यह पहली ऐसी सार्वजनिक मुलाकात थी, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी थीं।

मुलाकात की औपचारिकता और बदली हुई भंगिमा

सोमवार को कोंडा सुरेखा और सीतक्का ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर राखी का त्योहार मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की पत्नी गीता और उनकी बेटी नैमिषा रेड्डी को भी तिलक लगाया गया। सीतक्का ने जब मुख्यमंत्री को राखी बांधी तो माहौल काफी सामान्य दिखा, लेकिन जब बारी कोंडा सुरेखा की आई, तो वहां का दृश्य कुछ अलग ही बयां कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री और कोंडा सुरेखा के बीच वह सहजता नजर नहीं आई, जो सामान्य तौर पर भाई-बहन के इस पवित्र बंधन में दिखाई देती है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि राखी बांधते वक्त रेवंत रेड्डी की नजरें कोंडा सुरेखा की ओर नहीं थीं, जो इस बात का संकेत माना जा रहा है कि राजनीतिक मतभेद अभी भी बरकरार हैं।

सुरेखा का पक्ष: क्या कहा मंत्री ने?

इस मुलाकात के तुरंत बाद कोंडा सुरेखा ने अपने आवास पर मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि वे इस त्योहार के मौके पर किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री को यह उनकी तीसरी राखी है। उन्होंने आगे कहा, 'मैं सबकी बहन के समान हूं। त्योहार का समय है और मैं इसमें राजनीति को नहीं लाना चाहती।' उन्होंने मुख्यमंत्री के बेहतर स्वास्थ्य और राज्य की उन्नति के लिए प्रार्थना करते हुए महिलाओं के आशीर्वाद की बात भी कही। इस अवसर पर कांग्रेस की अन्य महिला नेताओं और ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री को राखी भेंट की, जिससे इस कार्यक्रम को एक पारंपरिक स्वरूप देने की कोशिश की गई।

विवाद की जड़: सुष्मिता पटेल का बयान

इस मुलाकात की पृष्ठभूमि में सुष्मिता पटेल द्वारा दिए गए बयान प्रमुख हैं। परकाला विधानसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान कोंडा सुरेखा की बेटी सुष्मिता पटेल ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और स्थानीय विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी पर कड़े प्रहार किए थे। उन्होंने अपने पिता कोंडा मुरली को पार्टी में उचित सम्मान न मिलने और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न दिए जाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने यह चुनौती भी दी थी कि रेवुरी प्रकाश रेड्डी अपना पद छोड़कर चुनाव मैदान में उतरें, जिससे उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच का असंतोष सार्वजनिक हो गया था।

अनुशासन समिति की कार्रवाई और भविष्य की राह

सुष्मिता पटेल के बयानों के बाद तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति ने कोंडा सुरेखा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। हालांकि सुरेखा ने सफाई दी थी कि उनकी बेटी के बयानों से उनका कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन मल्लू रवि के नेतृत्व वाली अनुशासन समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद से ही मंत्रिमंडल में फेरबदल और सुरेखा की कुर्सी पर संकट के बादल छाने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। मामला अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में है, जिससे यह मुलाकात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

परकाला सीट: खींचतान का असली केंद्र

रेवंत रेड्डी और कोंडा सुरेखा के बीच खटास का एक बड़ा कारण परकाला विधानसभा सीट का समीकरण है। सुरेखा लंबे समय से विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी के काम करने के तरीके और अपने समर्थकों की उपेक्षा को लेकर खफा रही हैं। मुख्यमंत्री द्वारा हाल के दौरों में रेवुरी प्रकाश रेड्डी को आगामी चुनाव के लिए समर्थन देने की बात कहे जाने के बाद से यह विवाद और गहरा गया। मुख्यमंत्री के इन बयानों को सुरेखा खेमे ने अपने प्रभाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा। इसके जवाब में ही सुष्मिता पटेल ने गीसुगोंडा में बैठक बुलाकर शक्ति प्रदर्शन किया था।

क्या राखी की डोर सुलझाएगी सियासी गांठ?

रक्षाबंधन के मौके पर हुई इस मुलाकात को भले ही शिष्टाचार भेंट के तौर पर पेश किया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे समाधान की दिशा में एक छोटी सी पहल के रूप में देखा जा रहा है। क्या यह मुख्यमंत्री और मंत्री के बीच की बर्फ पिघलाने की कोशिश है या महज एक औपचारिकता, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, पार्टी के भीतर चल रही यह रस्साकशी तेलंगाना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, और मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस घटना ने फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि परकाला की सियासी आग अभी ठंडी नहीं हुई है।

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