दिल्ली से बंगाल तक फैला जासूसी का जाल
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा था। जांच में यह खुलासा हुआ है कि भारत में जारी किए गए सिम कार्ड का अवैध इस्तेमाल सीमा पार पाकिस्तान के शहरों में किया जा रहा था। इन सिम कार्ड्स से जुड़े वॉट्सऐप अकाउंट्स की लोकेशन रावलपिंडी, लाहौर और कराची में ट्रैक की गई है।
सिम कार्ड की तस्करी का रास्ता
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था। भारतीय सिम कार्ड्स को बड़ी चालाकी से भारत से बाहर भेजा जा रहा था। संदेह है कि इन सिम कार्ड्स को बांग्लादेश और नेपाल के रास्तों से होकर पाकिस्तान तक पहुंचाया गया। एक बार पाकिस्तान पहुंचने के बाद, वहां बैठे जासूस इन नंबरों का इस्तेमाल वॉट्सऐप चलाने और भारत की खुफिया जानकारी जुटाने के लिए कर रहे थे।
कई राज्यों में गिरफ्तारियां
इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करते हुए सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिसका नाम प्रदीप्त बसु बताया जा रहा है, उसे गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य सीमावर्ती इलाकों से भी कई संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। ये गिरफ्तारियां इस बात का प्रमाण हैं कि जासूसी का यह नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में फैला हुआ है।
एजेंसियों की पैनी नजर
सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि आखिर ये सिम कार्ड किन दस्तावेजों पर लिए गए थे और इन्हें किसने सक्रिय करवाया था। भारत से बाहर इन सिम कार्ड्स का पहुंचना एक गंभीर सुरक्षा चूक है, जिस पर खुफिया विभाग बारीकी से नजर बनाए हुए है। नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान और उन्हें पकड़ने के लिए तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं।
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