मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक छोटे से बच्चे ने वह कारनामा कर दिखाया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। जिस उम्र में बच्चे ठीक से स्कूल जाना भी नहीं सीख पाते, उस उम्र में सागर के सनराइज मेगा सिटी के रहने वाले महज 6 साल के अमोघ नेमा ने खेल की दुनिया में अपनी धाक जमा दी है। यूकेजी में पढ़ने वाले अमोघ ने इंदौर में आयोजित राज्य स्तरीय कूडो प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक यानी गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इस जीत के साथ ही इस नन्हे खिलाड़ी ने आगामी तीन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अमोघ के परिवार और स्कूल में जश्न का माहौल है और उनके जानने वाले लगातार बधाई और शुभकामनाएं दे रहे हैं।
आत्मरक्षा से शुरू हुआ सफर और तीन महीने में बने चैंपियन
अमोघ की मां ऋचा नेमा बताती हैं कि वे आज के समय को देखते हुए अपने बेटे को आत्मरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस सिखाना चाहती थीं। जब उन्होंने इसके लिए प्रयास शुरू किए, तो उन्हें मार्शल आर्ट के कूडो खेल के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इसी साल गर्मियों के सीजन में अमोघ को एक समर कैंप में भेजा, जहां उसका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा।
महज 5 साल 8 महीने की उम्र में अमोघ ने सबसे पहले जिला स्तर पर खेलते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। इस शानदार जीत के बाद उसने अंडर-7 (सात वर्ष से कम आयु) वर्ग में राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लिया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अमोघ को कूडो खेलते हुए अभी केवल 3 महीने का ही समय हुआ है। इतने कम समय के अनुभव के बावजूद उसने इंदौर में आयोजित 11वीं स्टेट लेवल चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीत लिया है। इस शानदार सफलता के दम पर उसने नेशनल लेवल प्रतियोगिता के लिए भी सीधे क्वालीफाई कर लिया है।
पिता का अधूरा सपना बेटे ने किया पूरा
अमोघ के पिता डॉ. अंशुल नेमा बताते हैं कि उन्हें खुद कराटे खेलने का बहुत शौक था, लेकिन वे अपने इस शौक को आगे नहीं बढ़ा सके और न ही कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर पाए। लेकिन अब उनके बेटे ने महज 6 साल से भी कम उम्र में सेल्फ डिफेंस के खेल में राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर उनका सपना पूरा कर दिया है।
कूडो के अलावा अमोघ को अन्य कई क्षेत्रों में भी बेहद रुचि है। उसे पियानो बजाने, तैराकी (स्वीमिंग), स्केटिंग और साइकिल चलाने का भी काफी शौक है। माता-पिता उसकी इस रुचि को देखते हुए उसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर दे रहे हैं। कूडो में अमोघ रोजाना लगभग डेढ़ घंटे तक कड़ी प्रैक्टिस करता है और घर पर भी लगातार अभ्यास करता रहता है। उसकी इस मेहनत और ऊर्जा के स्तर (एनर्जी लेवल) को देखकर उसके कोच भी दंग रह जाते हैं और उसकी जमकर तारीफ करते हैं। डॉ. अंशुल का कहना है कि वे तो शुरुआत में सिर्फ आत्मरक्षा के उद्देश्य से अमोघ को यह खेल सिखा रहे थे, लेकिन उसकी लगन ने उसे आज इस मुकाम पर पहुंचा दिया है।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दिखाएंगे ताकत
राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अमोघ ने अब तीन बड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है। वह आगामी नवंबर के महीने में गुजरात के अहमदाबाद में होने वाले इन महत्वपूर्ण टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेगा:
- अहमदाबाद में नवंबर में आयोजित होने वाली 18वीं अक्षय कुमार कूडो इंटरनेशनल चैंपियनशिप
- 7वीं फेडरेशन कप प्रतियोगिता
- 17वीं राष्ट्रीय कूडो प्रतियोगिता
इन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े मंचों पर अमोघ के प्रदर्शन पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी होंगी और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि वह वहां भी पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगा।
प्रतियोगिता का भव्य आयोजन और सागर जिले का दबदबा
कूडो एसोसिएशन ऑफ मध्य प्रदेश के द्वारा 21 अगस्त से 24 अगस्त 2026 तक इंदौर में 11वीं राज्य स्तरीय सब जूनियर, जूनियर एवं सीनियर कूडो प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया था। इस चैंपियनशिप में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए 650 से अधिक कूडो खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इस कड़ी प्रतियोगिता में सागर डिस्ट्रिक्ट कूडो एसोसिएशन के खिलाड़ियों ने सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सागर के खिलाड़ियों ने शानदार खेल का परिचय देते हुए कुल 126 पदक जीते और ओवरऑल चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इसी विजेता टीम का हिस्सा बनकर नन्हे अमोघ ने भी सागर जिले को गौरवान्वित किया है।
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