नेपाल की तबाही के बाद हिमाचल में हाई अलर्ट, मॉनसून की मार से 247 लोगों की मौत, 1183 करोड़ का नुकसान

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश ने भी सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह चौकस कर दिया है। राज्य में मॉनसून के दौरान अब तक 247 लोग जान गंवा चुके हैं और विभिन्न विभागों को 1183 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

हिमाचल प्रदेश में आपदा का कहर

नेपाल में प्राकृतिक आपदा के कारण मची भारी तबाही के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी प्रशासनिक स्तर पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पहाड़ी राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहें। प्रशासन ने संवेदनशील और भूस्खलन संभावित इलाकों में विशेष निगरानी रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2023 से हिमाचल लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है, जिसका सीधा संबंध तेजी से बदलते जलवायु परिवर्तन से है।

मौत का आंकड़ा और आर्थिक चोट

राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 30 जून से लेकर अब तक मॉनसून सीजन में कुल 247 लोगों की मौत हुई है। इनमें 103 मौतें सीधे तौर पर प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई हैं, जबकि 144 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई है। वर्तमान में एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। इस अवधि के दौरान 396 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 449 पशु-पक्षियों की भी जान इस दौरान चली गई है। आर्थिक नुकसान की बात करें तो प्रदेश को अब तक 1183 करोड़ रुपये से ज्यादा की क्षति हुई है।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

मॉनसून की बारिश ने प्रदेश के रिहायशी इलाकों और सरकारी परिसंपत्तियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रदेश में 32 पक्के और 64 कच्चे मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। आंशिक नुकसान की बात करें तो 135 पक्के और 294 कच्चे मकानों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 17 दुकानें और 377 पशुशालाएं पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं। सरकारी विभागों पर भी इसकी मार साफ देखी जा सकती है। लोक निर्माण विभाग को 897 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जबकि जल शक्ति विभाग को 258 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगी है।

सड़कें बंद और बिजली सेवा बाधित

पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। प्रदेशभर में कुल 68 सड़कें यातायात के लिए बंद कर दी गई हैं। साथ ही 16 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और जलापूर्ति की एक परियोजना पर भी बुरा असर पड़ा है। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश की चेतावनी दी है। चंबा, कांगड़ा और किन्नौर जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण भूस्खलन, मलबे का गिरना और नदियों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने की प्रबल संभावना बनी हुई है। निवासियों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

विधानसभा में गूंजी आपदा की बात

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वीरवार को विधानसभा में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार आपदा प्रबंधन के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है। उन्होंने कहा कि यद्यपि राज्य में कुछ अन्य क्षेत्रों की तुलना में बारिश कम हुई है, लेकिन जिन जगहों पर बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं, वहां प्रशासन को पहले ही सतर्क रहने के निर्देश दिए जाते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य संभावित आपदा के आने से पूर्व ही तंत्र को तैयार करना है ताकि जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चिंता

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जोर देकर कहा कि पहाड़ों में होने वाली आपदाओं का गहन वैज्ञानिक अध्ययन बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पिछली आपदाओं के समय उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से आईआईटी और अन्य विशेषज्ञों की टीम से हिमालयी क्षेत्र का अध्ययन करवाने का अनुरोध किया था। एक टीम आई भी थी, लेकिन उसके निष्कर्षों की अभी तक पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बादल फटने जैसी विनाशकारी घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारक है। हालांकि, पहाड़ों में भूस्खलन को उन्होंने एक प्राकृतिक प्रक्रिया बताया, लेकिन कटाव के कारण स्थिति के सामान्य होने में समय लगने की बात भी स्वीकारी है।

ग्लेशियर झीलों पर सरकार की पैनी नजर

ग्लेशियरों से बनने वाली झीलों के खतरे को देखते हुए भी सरकार सतर्क है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में लाहौल-स्पीति में एक ग्लेशियर झील के बारे में जानकारी सामने आई है, जो काफी समय से वहां मौजूद है। इस मामले पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की गई है। कुछ स्थानों पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर उनके बढ़ने की स्थिति भी देखी गई है। इसलिए वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही वास्तविक खतरों का सही आकलन किया जा सकेगा। अंत में मुख्यमंत्री ने नेपाल की त्रासदी का उदाहरण देते हुए लोगों को फिर से चेतावनी दी कि बदलते मौसम और जलवायु संकट को देखते हुए सभी को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। प्रशासन हर स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और राहत कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार है।

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