तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री थलापति विजय ने तोड़ी पुरानी परंपरा, मंत्रियों के बीच पहली कतार में जाकर बैठे

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने विधानसभा के दोपहर के सत्र के दौरान अपनी तय सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठकर एक नई परंपरा की शुरुआत की, जिसने सभी को चौंका दिया।

तमिलनाडु की राजनीति और राज्य विधानसभा के इतिहास में गुरुवार को एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने विधानसभा के दोपहर के सत्र के दौरान वर्षों से चली आ रही एक पुरानी परंपरा को तोड़ दिया। सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री अपनी तय की गई विशिष्ट कुर्सी से उठे और मंत्रियों के लिए आरक्षित अगली कतार में जाकर बैठ गए। उनके इस अप्रत्याशित कदम ने सदन के भीतर मौजूद सभी सदस्यों और मंत्रियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

बैठक व्यवस्था का पारंपरिक नियम क्या है?

आमतौर पर विधानसभा के भीतर बैठने की एक बेहद सख्त और स्थापित व्यवस्था होती है। इस पुरानी परंपरा के मुताबिक, राज्य के मुख्यमंत्री हमेशा स्पीकर की कुर्सी के पास रखी एक विशेष और अलग कुर्सी पर बैठते हैं। वहीं दूसरी ओर, मंत्रिमंडल के अन्य सभी मंत्री मुख्यमंत्री के साथ आगे की कतार में अलग बैठते हैं। मंत्रियों के बैठने का यह क्रम सामान्य तौर पर उनकी वरिष्ठता के आधार पर निर्धारित किया जाता है। हालांकि, मंत्रियों और विधायकों के बीच आपसी बातचीत के लिए अपनी सीटों को कुछ समय के लिए बदलना एक आम बात है, लेकिन किसी मुख्यमंत्री का इस तरह अपनी विशेष सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठ जाना पहले कभी नहीं देखा गया है।

विपक्ष और सदन की संरचना

इस 234 सदस्यों वाले सदन में बैठक व्यवस्था बहुत स्पष्ट है। सत्ता पक्ष के बिल्कुल सामने वाली बेंचों पर मुख्य विपक्षी दल और अन्य विधायक बैठते हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता और विभिन्न विधायी दलों के नेताओं को उनकी पार्टी की सदस्य संख्या के बल पर आगे की सीटें आवंटित की जाती हैं, जबकि उनके दलों के बाकी सदस्य उनके ठीक पीछे की कतारों में बैठते हैं। मुख्यमंत्री विजय द्वारा इस बैठक व्यवस्था से अलग हटने को सदन की अब तक की सबसे अनूठी घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

केए सेंगोट्टैयन और आधव अर्जुन के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री विजय

गुरुवार की दोपहर जब सदन की कार्यवाही चल रही थी, तब मुख्यमंत्री विजय अचानक स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के दाईं ओर स्थित अपनी निर्धारित वीआईपी सीट से उठे। इसके बाद वे सीधे मंत्रियों की बेंच की तरफ बढ़े और वहां मंत्री केए सेंगोट्टैयन (जो सदन के नेता का दायित्व भी संभाल रहे हैं) और आधव अर्जुन के बीच खाली पड़ी जगह पर जाकर बैठ गए। विधानसभा सूत्रों का कहना है कि किसी भी मुख्यमंत्री का उस सीट को खाली छोड़ना जो विशेष रूप से उनके उच्च पद के गौरव के लिए निर्धारित है, और मंत्रियों की सामान्य सीट पर जाकर बैठना पूरी तरह से असामान्य है।

इसी सत्र के दौरान जब विपक्ष के नेता ने कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए, तो उनका जवाब देते हुए आधव अर्जुन ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विभागों के सचिव स्तर के अधिकारी सदन के पास ही बने एक विशेष "वॉर रूम" में मौजूद हैं। ये अधिकारी वहां से विधायकों द्वारा दिए जा रहे भाषणों और उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों को लगातार नोट कर रहे हैं ताकि उन पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

परंपरा से अलग हटकर बना चर्चा का केंद्र

दिन ढलने के साथ ही विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री विजय की बैठने की जगह में आया यह असाधारण बदलाव गुरुवार की पूरी कार्यवाही का सबसे बड़ा और चर्चित हिस्सा बन गया। यह नया प्रयोग उस पारंपरिक बैठने की व्यवस्था से पूरी तरह अलग था, जिसका पालन तमिलनाडु के पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अब तक पूरी निष्ठा से करते आ रहे थे। मुख्यमंत्री थलापति विजय के इस व्यवहार ने न केवल नियमों की पुरानी लीक को तोड़ने का काम किया, बल्कि सदन के भीतर एक नया संदेश देने की भी कोशिश की है।

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