क्या AI छीन लेगा अकाउंटेंट की नौकरी? इन डिजिटल स्किल्स को सीखकर सुरक्षित करें अपना करियर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में अकाउंटिंग और फाइनेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब पारंपरिक डेटा एंट्री के बजाय नई डिजिटल स्किल्स और सूझबूझ से ही प्रोफेशनल्स अपने करियर को सुरक्षित और बेहतर बना सकते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लोकप्रियता और इसके इस्तेमाल ने आज दुनिया भर के उद्योगों की तस्वीर बदल दी है। इस बदलाव की सबसे तेज आंच फाइनेंस और अकाउंटिंग सेक्टर पर महसूस की जा रही है। एक जमाना था जब मुनीम या अकाउंटेंट बही-खातों और फाइलों के अंबार में घिरे रहते थे, लेकिन अब वह दौर पुराना हो चुका है। आज ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर और AI टूल्स बेहद जटिल से जटिल आंकड़ों को पलक झपकते ही सुलझा देते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या AI इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की नौकरियां छीन लेगा?

केसी ग्लोबएड और जीसीसी स्कूल के संस्थापक और CEO डॉ. कमल छाबरा (जो खुद एक CA और US CPA हैं) के मुताबिक, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि तकनीक के आने से अकाउंटिंग के बुनियादी नियम नहीं बदले हैं, बल्कि काम करने का पूरा तरीका बदल गया है। अब कंपनियों को केवल डेटा दर्ज करने वाले लोगों की नहीं, बल्कि उन हुनरमंद प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो आंकड़ों को समझ सकें और कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए सही रणनीति बना सकें।

बदल गया है काम का पारंपरिक तरीका

पहले अकाउंटेंट्स का ज्यादातर समय रद्दी फाइलों को पलटने, रोजमर्रा के खातों की एंट्री करने और मिलान करने में ही चला जाता था। लेकिन AI ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान और तेज बना दिया है। आजकल ऐसे सॉफ्टवेयर आ गए हैं जो एक क्लिक पर हजारों लेन-देन का विश्लेषण कर सकते हैं।

जब दोहराव वाले और उबाऊ काम खुद-ब-खुद हो जाते हैं, तो अकाउंटेंट्स का काफी समय बचता है। इस बचे हुए समय का उपयोग वे वित्तीय जोखिमों की पहचान करने, वित्तीय सेहत का जायजा लेने और कंपनी के विकास के लिए नए रास्ते तलाशने में कर सकते हैं। अब सारा फोकस केवल डेटा जुटाने पर नहीं है, बल्कि उस डेटा के जरिए सही फैसले लेने पर केंद्रित हो गया है।

मजबूत बुनियादी समझ है आज भी बेहद जरूरी

भले ही तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, लेकिन अकाउंटिंग के मूल सिद्धांतों की समझ को कभी भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। कंप्यूटर केवल गणना कर सकता है, लेकिन उसके पीछे की कानूनी बारीकियों और नियमों को समझने के लिए इंसानी दिमाग की ही जरूरत होती है।

अगर कोई AI आधारित सिस्टम किसी डेटा में कोई गड़बड़ी दिखाता है, तो उसके पीछे के असली कारण को पकड़ने और सही करने का काम एक प्रोफेशनल ही कर सकता है। ऑडिट, टैक्स और कंप्लायंस से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय AI द्वारा दिए गए सुझावों की समीक्षा करना बेहद आवश्यक होता है। इसलिए, अपनी कोर नॉलेज को मजबूत रखना आज के समय में भी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

कम्युनिकेशन स्किल: आंकड़ों को फैसलों में बदलने की कला

आज के समय में केवल गणितीय आंकड़ों को समझना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें दूसरों के सामने स्पष्ट तरीके से रखना भी आना चाहिए। भारत के फाइनेंस प्रोफेशनल्स वैश्विक स्तर पर काम कर रहे हैं। उनका संपर्क अमेरिका और यूरोप जैसी जगहों पर बैठे क्लाइंट्स और सहकर्मियों से होता है।

ऐसी स्थिति में, यदि आप जटिल वित्तीय डेटा को सरल और प्रभावशाली भाषा में नहीं समझा सकते, तो आपकी योग्यता अधूरी रह जाएगी। बेहतर कम्युनिकेशन स्किल न केवल आपके आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि आपको एक साधारण अकाउंटेंट की भूमिका से ऊपर उठाकर कंपनी का एक विश्वसनीय सलाहकार भी बनाती है।

AI साक्षरता और तकनीक के साथ तालमेल

भविष्य में वही प्रोफेशनल्स बाजार में अपनी जगह बनाए रख पाएंगे, जो तकनीक से डरने के बजाय उसे अपना दोस्त बना लेंगे। इसके लिए आवश्यक है कि आपको AI टूल्स का सही उपयोग करना आता हो। आपको यह पता होना चाहिए कि इन टूल्स से सही सवाल कैसे पूछे जाएं, उनके निष्कर्षों की जांच कैसे की जाए और डेटा सुरक्षा (डेटा प्राइवेसी) के नियमों का पालन कैसे किया जाए।

विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थाएं जैसे AICPA और CIMA भी अब अपने कोर्सेज में तकनीकी दक्षता और क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा दे रही हैं। इन कौशल को सीखकर युवा खुद को आने वाले कल के लिए तैयार कर सकते हैं।

भारतीय युवाओं के लिए अवसरों का खुला आसमान

भारत में स्थापित हो रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) आज के युवाओं के लिए बेहतरीन संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। US CPA, US CMA और ACCA जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कोर्सेज युवाओं को वैश्विक जरूरतों के अनुसार ढालते हैं।

अगर आज के छात्र और युवा प्रोफेशनल्स किताबों के ज्ञान से आगे बढ़कर निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दें, तो वे अपने करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं:

  • व्यावहारिक प्रशिक्षण (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग): सिर्फ थ्योरी पढ़ने के बजाय असल काम का अनुभव लें।
  • तकनीकी समझ: नवीनतम सॉफ्टवेयर और AI आधारित टूल्स को चलाना सीखें।
  • बेहतर बातचीत की शैली (कम्युनिकेशन): अपनी बात को स्पष्टता और प्रभाव के साथ पेश करना सीखें।

इन सभी कौशलों के दम पर एक सामान्य अकाउंटेंट भी एक मजबूत बिजनेस लीडर के रूप में उभर सकता है।

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