भरतपुर में गुड़ के घेवर का छाया जादू, सावन के मौके पर स्वाद और सेहत का अनूठा मेल

सावन के पावन महीने में भरतपुर के बाजारों में गुड़ से बने घेवर की धूम मची है। पारंपरिक चीनी वाले घेवर को टक्कर देते हुए, गुड़ की चाशनी वाला यह विशेष घेवर लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

सावन में खास है गुड़ वाले घेवर का स्वाद

सावन का महीना शुरू होते ही भरतपुर के बाजारों में मिठाइयों की रौनक बढ़ गई है, और इस बार घेवर की कई नई किस्में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। हालांकि, इनमें सबसे ज्यादा चर्चा गुड़ से तैयार किए जाने वाले घेवर की है। पारंपरिक तौर पर घेवर चीनी की चाशनी में डुबोकर बनाया जाता है, लेकिन अब स्वास्थ्य और स्वाद के प्रति जागरूक ग्राहकों के लिए गुड़ वाला घेवर एक बेहतरीन विकल्प के रूप में उभरा है। सावन के इस खास मौके पर भरतपुर के लोग गुड़ की मिठास वाले इस घेवर को खूब पसंद कर रहे हैं।

कैसे तैयार होता है यह अनोखा घेवर

भरतपुर के कारीगरों का कहना है कि गुड़ वाले घेवर को बनाने की प्रक्रिया काफी हद तक पारंपरिक घेवर के समान ही है। इसे बनाने की शुरुआत मैदे और शुद्ध घी के मिश्रण से होती है। कारीगर सबसे पहले पारंपरिक विधि से घेवर का बेस तैयार करते हैं। इसके बाद मुख्य अंतर आता है चाशनी के चुनाव में। सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली चीनी की चाशनी के बजाय इसमें गुड़ की गाढ़ी और शुद्ध चाशनी का प्रयोग किया जाता है। जब घेवर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाता है, तब उस पर गुड़ की चाशनी की एक मोटी और समान परत डाली जाती है। यह प्रक्रिया घेवर को न केवल एक नया और आकर्षक रंग देती है, बल्कि गुड़ की सोंधी खुशबू और इसका गहरा स्वाद इसे सामान्य घेवर से बिल्कुल अलग और खास बनाता है।

क्यों पसंद कर रहे हैं ग्राहक

बाजार में खरीदारी करने पहुंच रहे ग्राहकों का कहना है कि गुड़ का स्वाद पारंपरिक मिठास से अलग और काफी समृद्ध होता है। गुड़ की अपनी एक अलग महक होती है जो घेवर के साथ मिलकर इसे बेहद स्वादिष्ट बना देती है। कारीगरों ने बताया कि गुड़ की चाशनी को बहुत ही संतुलित तरीके से तैयार किया जाता है ताकि घेवर की कुरकुराहट बरकरार रहे और उसमें गुड़ का स्वाद पूरी तरह से समा जाए। आकर्षक सजावट के साथ तैयार यह घेवर न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि देखने में भी बेहद लुभावना लगता है, जिस कारण लोग इसे उपहार के तौर पर भी खरीद रहे हैं।

सावन में घेवर की परंपरा और महत्व

हिंदू धर्म और भारतीय परंपरा में सावन के महीने के दौरान घेवर का अत्यधिक महत्व माना जाता है। इस पवित्र महीने में घेवर को एक पारंपरिक मिठाई के रूप में देखा जाता है। लोग अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों के घर घेवर उपहार के तौर पर भेजते हैं। त्योहारों और पारिवारिक मिलन के दौरान घेवर की मांग अपने चरम पर होती है। ग्राहकों की बढ़ती मांग को देखते हुए भरतपुर के दुकानदार लगातार घेवर की नई-नई वैरायटी तैयार करने में जुटे हैं, ताकि वे ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं को पूरा कर सकें।

स्वास्थ्य और स्वाद का संतुलन

चीनी की तुलना में गुड़ को अधिक प्राकृतिक और कम रिफाइंड विकल्प माना जाता है, जिसमें कई प्रकार के खनिज भी मौजूद होते हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोग चीनी से परहेज करते हुए गुड़ वाले घेवर को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह है तो एक मिठाई ही, इसलिए इसे भी सीमित मात्रा में ही खाना स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। कुल मिलाकर, सावन के इस मौसम में भरतपुर का यह गुड़ वाला घेवर परंपरा और आधुनिक स्वाद का एक अनूठा संगम साबित हो रहा है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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