नेपाल में बाढ़ का कहर: 359 लोगों की मौत, 910 लापता और चीन की नई चेतावनी से बड़ा खतरा

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 359 लोगों की जान चली गई है और 910 लोग अभी भी लापता हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीन ने और बाढ़ की चेतावनी जारी की है, जबकि भारत राहत सामग्री के साथ नेपाल की मदद में जुटा है।

नेपाल में तबाही का मंजर

नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। देश के आठ जिलों में मची इस तबाही में अब तक 359 लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि 910 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार ने इस आपदा से निपटने के लिए अपनी पूरी सरकारी मशीनरी और सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया है। राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि प्रभावित क्षेत्रों से 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, हालांकि अभी भी 290 भारतीय ऐसे हैं जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

प्रशासन की सक्रियता और बचाव कार्य

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को आपदा प्रभावित नुवाकोट इलाके का दौरा किया। उन्होंने वहां मौजूद स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और राहत कार्य में लगे सुरक्षा व स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने फेसबुक के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए कहा कि स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकारी तंत्र पूरी क्षमता से काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय पहली प्राथमिकता नागरिकों की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश करना और घायलों को बेहतर उपचार प्रदान करना है।

13295 सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभाले हुए हैं

प्रधानमंत्री ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में नेपाल की पुलिस, सेना और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 13295 जवान दिन-रात जुटे हुए हैं। इस विशाल रेस्क्यू टीम में 7250 नेपाल पुलिस के जवान, 4200 नेपाली सेना के सैनिक और 1845 सशस्त्र पुलिस बल के अधिकारी व जवान शामिल हैं। बचाव कार्यों के संचालन के लिए नेपाल सेना की जॉइंट ऑपरेशन कमिटी, NDRRMA की क्विक एक्शन टीम और प्रधानमंत्री कार्यालय की रैपिड एक्शन टीम आपसी तालमेल बनाकर काम कर रही है।

हवाई मार्ग से रेस्क्यू और राहत

जमीनी बचाव के साथ ही हवाई मार्ग का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री शाह के आंकड़ों के अनुसार, केवल गुरुवार को 69 उड़ानों के जरिए 573 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। कई हेलीकॉप्टर हर समय स्टैंडबाय पर तैनात रखे गए हैं। निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों को भी सरकारी कमांड के तहत राहत कार्यों में लगाया गया है। बचाव कार्य में प्राथमिकता उन लोगों को दी जा रही है जो गंभीर रूप से बीमार हैं, गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांगजन हैं।

3500 प्रभावितों के लिए अस्थायी आवास

बाढ़ प्रभावित रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे क्षेत्रों से निकाले गए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है। करीब 3500 लोगों के रहने के लिए स्कूलों और सार्वजनिक भवनों को अस्थायी आश्रय गृहों में बदल दिया गया है। सरकार ने त्वरित आर्थिक सहायता के रूप में रसुवा और नुवाकोट को एक-एक करोड़ नेपाली रुपये और धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये की मदद जारी की है। इसके अतिरिक्त राहत सामग्री से भरे 10 ट्रक प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गए हैं, जिनमें बिस्किट, नूडल्स, कंबल, गद्दे और स्लीपिंग बैग्स शामिल हैं। नेपाल रेड क्रॉस, स्काउट्स और लायंस क्लब जैसे संगठनों के माध्यम से भी राहत सामग्री वितरित की जा रही है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया

स्वास्थ्य आपातकाल को देखते हुए हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC) को पूर्णतः सक्रिय कर दिया गया है। बीर अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, टीचिंग अस्पताल, सिविल और पाटन अस्पताल को घायलों के उपचार के लिए तैयार रखा गया है। बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में 100-100 इमरजेंसी बेड, जबकि पाटन अस्पताल में 60 अतिरिक्त इमरजेंसी बेड की व्यवस्था की गई है। सरकार ने घायल नागरिकों के लिए निःशुल्क इलाज की घोषणा की है।

संचार नेटवर्क बहाली के प्रयास

दूरसंचार सेवाओं पर बाढ़ का गहरा असर पड़ा है। लगभग 70 मोबाइल टावर और टेलीकॉम साइट्स पूरी तरह ठप हो गए हैं। इनमें 38 नेपाल टेलीकॉम और 32 Ncell के टावर शामिल हैं। नेटवर्क बहाल करने के लिए तकनीकी टीमें जनरेटर और बैटरियों के साथ प्रभावित इलाकों में पहुँच रही हैं। नेपाल टेलीकॉम और Ncell द्वारा प्रभावित लोगों को मुफ्त डेटा, कॉल और एसएमएस की सुविधा भी दी जा रही है।

चीन द्वारा दी गई बाढ़ की नई चेतावनी

नेपाल के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। चीन ने भोटेकोशी नदी प्रणाली में एक और भीषण बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से में प्राकृतिक अवरोध के कारण एक विशाल झील बन गई है। रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर बनी यह झील लगातार बढ़ रही है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि यह झील अचानक टूटती है, तो निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। NDRRMA ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सख्त हिदायत दी है।

बाढ़ पीड़ितों का जिलावार आंकड़ा

NDRRMA द्वारा गुरुवार शाम 6:20 बजे तक जारी सूची के अनुसार मौतों का विवरण इस प्रकार है:

  • चितवन: 132
  • नवलपरासी ईस्ट: 82
  • धादिंग: 33
  • गोरखा: 30
  • नुवाकोट: 28
  • तनाहुन: 22
  • रसुवा: 17
  • नवलपरासी वेस्ट: 15

लापता लोगों की सूची में सुरक्षा बलों के जवान, सरकारी कर्मचारी और 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

भारत का सहयोग

भारत ने इस संकट की घड़ी में नेपाल को मानवीय सहायता प्रदान की है। भारत से 47.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई है, जिसमें दवाएं और खाद्य पदार्थ शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है और हरसंभव मदद जारी रखेगा।

अंतरराष्ट्रीय मदद और ईंधन आपूर्ति

नेपाल सरकार अमेरिका, यूरोपीय संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी तालमेल बना रही है। इसके अलावा, ईंधन की कमी न हो, इसके लिए नुवाकोट में पेट्रोल और डीजल का अतिरिक्त स्टॉक भेजा गया है ताकि राहत सामग्री पहुंचाने वाले वाहनों और बचाव कार्यों में बाधा न आए।

https://www.indiatv.in/world/asia/nepal-flood-disaster-359-dead-910-missing-as-china-issues-fresh-flood-warning-2026-08-27-1239836