बिहार की राजनीति में युवा चेहरों की बढ़ती धमक
बिहार विधानसभा में वर्तमान में युवा विधायकों की भागीदारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है। सदन की कुल संख्या 243 में से एक बड़ा वर्ग भले ही अनुभवी नेताओं का हो, लेकिन नई उम्र के विधायकों की उपस्थिति ने सदन की तस्वीर बदल दी है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान विधानसभा में 40 वर्ष या उससे कम आयु के कुल 32 विधायक मौजूद हैं, जो राज्य के भविष्य की राजनीति में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं।
Gen Z का सीमित प्रतिनिधित्व
आधुनिक राजनीति में नई पीढ़ी यानी Gen Z के प्रवेश को लेकर उत्सुकता बनी रहती है। Gen Z की सर्वमान्य परिभाषा के अनुसार, 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग इस पीढ़ी का हिस्सा माने जाते हैं। बिहार विधानसभा की सूची को देखें तो इस श्रेणी में सिर्फ 2 विधायक शामिल हैं। इनमें अलीनगर से विधायक मैथिली ठाकुर और त्रिवेणीगंज से विधायक सोनम रानी का नाम प्रमुख है।
इन दोनों युवा विधायकों का जन्म 1997 के बाद हुआ है, जो इन्हें स्पष्ट रूप से Gen Z पीढ़ी का प्रतिनिधि बनाता है। सूची के आंकड़ों के मुताबिक, मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को हुआ था और उनकी वर्तमान उम्र लगभग 26 वर्ष है। वहीं, सोनम रानी का जन्म 5 मई 1998 को हुआ था और वे लगभग 28 वर्ष की हैं। राजनीति में इनकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि सबसे युवा पीढ़ी ने सदन की दहलीज पर दस्तक दे दी है, हालांकि अभी यह शुरुआती चरण में है।
40 वर्ष से कम आयु वाले विधायकों का वर्गीकरण
बिहार विधानसभा में 40 या उससे कम उम्र के कुल 32 विधायकों की सूची काफी विस्तृत है, जिसमें 1986 या उसके बाद जन्मे कई युवा चेहरे शामिल हैं। 1990 के दशक में जन्मे नेताओं की एक लंबी कतार सदन में दिखाई देती है। राकेश रंजन (शाहपुर), आदित्य कुमार (सकरा) और सुजीत कुमार (राजनगर) का जन्म 1995 में हुआ था। वहीं, ओसामा शहाब (रघुनाथपुर) का जन्म 12 जून 1994 को हुआ। इसी तरह कोमल सिंह (गायघाट) का जन्म 8 अगस्त 1993 को हुआ, जबकि विष्णु देव पासवान (दरौली) और अमित कुमार (बेलसंड) 1992 में जन्मे हैं।
30 की उम्र के इर्द-गिर्द सक्रिय युवा नेता
युवा विधायकों की इस फेहरिस्त में कई ऐसे नाम भी हैं जो अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खासी सक्रियता रखते हैं और 30 वर्ष की आयु के आसपास हैं। इस सूची में चेतन आनंद (नवीनगर), श्रेयसी सिंह (जमुई), मांजरीक मृणाल (वारिसनगर), विशाल प्रशांत (तरारी), आसिफ अहमद (बिस्फी) और छोटी कुमारी (छपरा) शामिल हैं।
इनके अतिरिक्त, युवा विधायकों की श्रेणी में अभिषेक रंजन (चनपटिया), तेजस्वी प्रसाद यादव (राघोपुर), मीना कुमारी (बाबूबरही), रितुराज कुमार (घोसी), सुधांशु शेखर (हरलाखी) और साम्रीद वर्मा (सिकटा) का नाम भी दर्ज है, जो 40 वर्ष से कम उम्र के विधायकों के समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं।
1986-87 के दौर के विधायक
इस सूची में 1986 और 1987 में जन्मे विधायकों की संख्या भी उल्लेखनीय है। इनमें पूरन लाल टुडू (कटोरिया), रोमित कुमार (अतरी), अनिल कुमार (बथनाहा), मनोज विश्वास (फारबिसगंज), संदीप सौरभ (पालीगंज), विनीता मेहता (गोविन्दपुर), दीपा कुमारी (इमामगंज) और बाबुलाल शौर्य (परबत्ता) जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा राहुल कुमार सिंह (डुमराँव) और अविनाश मंगलम (रानीगंज) की उम्र भी करीब 39 वर्ष है। इस सूची में सबसे अधिक उम्र वाले युवा विधायकों में मिथुन कुमार (नाथनगर) का नाम आता है, जिनका जन्म 2 मार्च 1986 को हुआ था और वे अभी 40 वर्ष के हैं।
कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा में युवा चेहरों का यह जमावड़ा राज्य की नई राजनीतिक दिशा को परिभाषित करता है। जहाँ एक तरफ 32 विधायक 40 साल से कम उम्र के हैं, वहीं केवल 2 विधायकों का Gen Z होना यह स्पष्ट करता है कि राजनीति में सबसे युवा पीढ़ी का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
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