टीएमसी के बागी सांसदों पर गिरी गाज
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) का हिस्सा बनने वाले 20 सांसदों के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। लोकसभा स्पीकर के कार्यालय ने इन सभी बागी सांसदों को आधिकारिक नोटिस भेजा है, जिसमें उनसे सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। यह पूरी कार्रवाई दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत अयोग्यता याचिका के आधार पर शुरू की गई है।
दिलीप घोष का कड़ा तंज
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने एनसीपीआई और उसमें शामिल हुए बागी सांसदों के चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं। घोष के अनुसार, राजनीति इस तरह से नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी क्षेत्रीय पार्टी है जिसके बारे में पहले शायद ही किसी को जानकारी रही होगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, 'किसी ने पार्टी की शर्ट पहन ली और पार्टी बन गई।' दिलीप घोष ने आगे आरोप लगाया कि कुछ नेता अपनी साख और चेहरा बचाने के लिए ऐसी पार्टियों में शरण ले रहे हैं। उनके शब्दों में, कुछ लोग अपने निजी और संकीर्ण फायदों के लिए पार्टियां खड़ी करते हैं, जबकि अन्य लोग उन पर निर्भर हो जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की राजनीति से देश या राज्य का भला नहीं होने वाला है।
नोटिस और अयोग्यता की प्रक्रिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोकसभा स्पीकर की ओर से जारी किए गए ये नोटिस 25 अगस्त की तारीख के हैं। यह मामला तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर की गई याचिकाओं से संबंधित है। पार्टी का कहना है कि जिन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की थी, वे अब दल बदलकर एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं। टीएमसी ने इसे भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए उन सभी को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर के समक्ष लंबित अयोग्यता की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले की सुनवाई 25 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की पीठ के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने 20 सांसदों को नोटिस जारी करते हुए उनसे अपना पक्ष रखने को कहा। लोकसभा स्पीकर की ओर से उपस्थित हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को सूचित किया कि स्पीकर ने इन बागी सांसदों को पहले ही नोटिस जारी कर दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल नोटिस जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि पूरी कानूनी कार्यवाही को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा कब किया जाएगा। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि इन 20 सांसदों का अगले सात दिनों में क्या रुख रहता है और क्या स्पीकर का कार्यालय इस मामले में कोई ठोस निर्णय ले पाएगा।
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