36 साल की ठगी, 300 से ज्यादा लक्जरी होटल और शून्य बिल: चार्ल्स शोभराज के नक्शेकदम पर चलने वाले महाठग बिंग्सन जॉन की अनोखी दास्तान

देश भर के आलीशान होटलों को करोड़ों का चूना लगाने वाले 69 वर्षीय बिंग्सन जॉन को रायपुर पुलिस ने भुवनेश्वर से दबोच लिया है, जो कुख्यात अपराधी चार्ल्स शोभराज से प्रेरित होकर ठगी करता था।

अनोखी ठगी का सनसनीखेज खुलासा

क्या कोई व्यक्ति लगातार 36 साल तक देश के सबसे आलीशान और महंगे होटलों में मुफ़्त में रह सकता है? पहली नज़र में यह किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड की सस्पेंस फ़िल्म की पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह हक़ीक़त है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की पुलिस ने एक ऐसे ही शातिर महाठग को गिरफ़्तार किया है, जिसने पिछले साढ़े तीन दशकों से भी ज़्यादा समय से देश के सैकड़ों पांच सितारा होटलों की सुरक्षा और बिलिंग प्रणाली को बौना साबित कर रखा था। इस 69 वर्षीय बुजुर्ग ठग का नाम बिंग्सन जॉन है, जो मूल रूप से तमिलनाडु का रहने वाला है। बिंग्सन जॉन को रायपुर पुलिस की मुस्तैदी के कारण ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से गिरफ़्तार किया गया है।

पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। बिंग्सन जॉन ने साल 1990 से लेकर अब तक देश के अलग-अलग राज्यों में 300 से अधिक लक्जरी होटलों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। उसका तरीका बेहद साधारण लेकिन अचूक था, होटल में एक रईस मेहमान की तरह प्रवेश करना, बेहतरीन सुविधाओं का आनंद उठाना, और जब बिल चुकाने का समय आए, तो चुपके से चंपत हो जाना। ताज़ा मामला रायपुर के प्रसिद्ध हयात होटल से जुड़ा है, जहाँ से वह हज़ारों रुपये का बिल चुकाए बिना और एक महंगा लैपटॉप लेकर फ़रार हो गया था।

चार्ल्स शोभराज से मिली थी ठगी की प्रेरणा

पुलिस की हिरासत में आने के बाद जब बिंग्सन जॉन से पूछताछ की गई, तो उसने कई दिलचस्प और हैरान करने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह दुनिया के सबसे कुख्यात ठगों और अपराधियों में शुमार चार्ल्स शोभराज से बेहद प्रभावित था। दिल्ली की तिहाड़ जेल में रहने के दौरान उसने चार्ल्स शोभराज के कारनामों और उसकी चतुराई के क़िस्से सुने थे। इसके बाद उसने तय किया कि वह भी इसी रास्ते पर चलेगा। उसने आत्मविश्वास और नकली पहचान को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया।

जॉन के जीवन में एक भावनात्मक मोड़ भी आया था, जिसका ज़िक्र उसने पुलिस के सामने किया। उसने बताया कि 1990 के दशक की शुरुआत में उसकी मंगेतर की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस सदमे के बाद उसने कभी शादी न करने का फ़ैसला किया और अपराध की इस दलदल में उतर गया। अपनी गिरफ़्तारी के बाद उसने बेहद मजाकिया और बेफ़िक्र अंदाज़ में पुलिस से कहा कि उसके लिए देश की जेलें किसी 'होम स्टे' की तरह हैं, जबकि बड़े-बड़े पांच सितारा होटल उसके लिए पसंदीदा 'टूरिस्ट डेस्टिनेशन' हैं। वह जेल जाने से ज़रा भी नहीं डरता था क्योंकि उसे पता था कि कुछ समय बाद वह फिर बाहर आकर इसी ऐशो-आराम की ज़िंदगी में लौट जाएगा।

रायपुर के हयात होटल से ऐसे शुरू हुई आखिरी कहानी

इस शातिर ठग की गिरफ़्तारी की कहानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित हयात होटल से शुरू होती है। बिंग्सन जॉन ने 25 जून 2026 को इस आलीशान होटल में चेक-इन किया था। होटल के रिकॉर्ड के मुताबिक, उसने खुद को एक बड़ा इवेंट ऑर्गनाइजर यानी कार्यक्रम आयोजक बताया था। होटल के कर्मचारियों को प्रभावित करने के लिए उसने अपनी बेहतरीन अंग्रेज़ी और रसूखदार लहजे का इस्तेमाल किया। दो दिनों तक होटल की तमाम वीआईपी सुविधाओं का लाभ उठाने के बाद, 27 जून 2026 की सुबह वह अपने दो बैग लेकर बिना किसी को बताए चुपचाप होटल से बाहर निकल गया।

जब होटल प्रबंधन को उसके ग़ायब होने का पता चला, तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बिंग्सन जॉन अपने पीछे 63,755 रुपये का होटल बिल छोड़ गया था। केवल इतना ही नहीं, होटल प्रशासन का आरोप है कि उसने होटल से काम के सिलसिले में माँगा गया लगभग 1.48 लाख रुपये की क़ीमत का एक कीमती लैपटॉप भी अपने बैग में रख लिया और रफ़ूचक्कर हो गया। इसके बाद होटल के सुरक्षा प्रभारी सूरज सिंह ने बिना वक़्त गंवाए तेलीबांधा थाने में इस धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

फर्जी पहचान और शातिराना अंदाज था मुख्य हथियार

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बिंग्सन जॉन की कार्यप्रणाली बेहद सुविचारित और अचूक होती थी। वह हर शहर में जाकर अपनी एक नई और झूठी पहचान गढ़ता था। उसकी अंग्रेज़ी भाषा पर असाधारण पकड़ थी और उसका व्यवहार बेहद शालीन एवं सभ्य था। वह कभी खुद को विदेशी पर्यटकों का गाइड बताता, तो कभी किसी नामी संस्थान का अंग्रेज़ी शिक्षक बनकर पेश आता। कभी-कभी वह योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में भी अपनी पहचान बताता था।

होटल के कर्मचारियों के साथ वह इस तरह घुल-मिल जाता था कि किसी को उस पर शक करने की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं बचती थी। वह अक्सर होटल स्टाफ को बड़ी और बेहतर नौकरियों का लालच देकर उनका विश्वास जीत लेता था। एक बार जब होटल का स्टाफ उस पर पूरी तरह भरोसा करने लगता, तो वह अपने असली रंग दिखाता था। वह कई बार होटलों की महंगी चीज़ें और उपकरण भी अपने साथ चुराकर ले जाता था, जैसा कि उसने रायपुर के हयात होटल में लैपटॉप के साथ किया।

देश के कई राज्यों में दर्ज हैं मुकदमे

बिंग्सन जॉन का आपराधिक इतिहास केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका जाल पूरे देश में फैला हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:

  • उसने पहली बार 1996 में पुलिस की हिरासत का स्वाद चखा था।
  • अपने 36 साल के आपराधिक जीवन में उसने लगभग 15 साल देश की विभिन्न जेलों में सलाखों के पीछे बिताए हैं, जिसमें दिल्ली की तिहाड़ जेल भी शामिल है।
  • उसके ख़िलाफ़ देश के कई प्रमुख राज्यों जैसे दिल्ली, मुंबई, गोवा, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में धोखाधड़ी और चोरी के गंभीर मामले दर्ज हैं।
  • साल 2022 में केरल पुलिस ने भी उसे एक बेहद महंगे फाइव-स्टार होटल का भारी-भरकम बिल चुकाए बिना भागने के आरोप में गिरफ़्तार किया था।

इन सब मामलों से साफ़ है कि रायपुर की घटना बिंग्सन जॉन के लिए कोई नई बात नहीं थी, बल्कि यह उसके दशकों पुराने ढर्रे का ही एक हिस्सा थी।

72 घंटे के भीतर भुवनेश्वर से दबोचा गया

रायपुर की पुलिस टीम ने होटल में जमा कराए गए दस्तावेजों और मोबाइल नंबरों का बारीकी से तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। साइबर सेल की मदद से आरोपी के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक किया गया, जिससे पता चला कि वह रायपुर से भागकर ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में छिपा हुआ है। रायपुर पुलिस की टीम तुरंत भुवनेश्वर के लिए रवाना हुई और स्थानीय पुलिस की मदद से महज़ 72 घंटे के भीतर बिंग्सन जॉन को धर दबोचा।

गिरफ़्तारी के समय पुलिस ने उसके पास से हयात होटल से चोरी किया गया 1.48 लाख रुपये का लैपटॉप भी बरामद कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया और देश भर के 300 से अधिक होटलों में इसी तरह की ठगी करने की बात स्वीकार की। रायपुर पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क साधेगी ताकि उसके पुराने मुकदमों का पूरा ब्यौरा खंगाला जा सके।

होटल सुरक्षा प्रणाली की खुली पोल

बिंग्सन जॉन के इस हैरतअंगेज़ कारनामे ने देश की प्रीमियम होटल इंडस्ट्री की सुरक्षा और अतिथि सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठता है कि आखिर कैसे कोई व्यक्ति बिना किसी ठोस पहचान सत्यापन के इतने बड़े-बड़े होटलों में आसानी से प्रवेश पा लेता था और हज़ारों-लाखों रुपये की सेवाएं लेने के बाद आराम से निकल जाता था।

फ़िलहाल, इस महाठग को रायपुर की एक स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ेगा, बिंग्सन जॉन के काले कारनामों के कई और चौंकाने वाले पन्ने सामने आ सकते हैं। इस बुज़ुर्ग ठग की यह कहानी आज के समय में तकनीक और सतर्कता के महत्व को रेखांकित करती है।

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