₹1 का पौधा और लाखों का मुनाफा! सागर की भाग्य बाई पटेल का कमाल, सिर्फ 10 डिसमिल जमीन से खड़ा किया सफल बिजनेस मॉडल

मध्य प्रदेश के सागर जिले की महिला किसान भाग्य बाई पटेल ने केवल 10 डिसमिल जमीन पर नेट हाउस बनाकर नर्सरी का एक सफल बिजनेस मॉडल तैयार किया है, जिससे वे सालाना एक से डेढ़ लाख रुपये का मुनाफा कमा रही हैं।

आमतौर पर लोगों का मानना होता है कि खेती-किसानी से बेहतर मुनाफा कमाने के लिए बड़ी जमीन का होना बेहद जरूरी है। लेकिन मध्य प्रदेश के सागर जिले की एक महिला किसान ने इस पारंपरिक सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। सागर जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर जैसीनगर रोड पर स्थित कनेरा गांव की रहने वाली भाग्य बाई पटेल ने केवल 10 डिसमिल यानी करीब 65×65 फीट की छोटी सी जगह पर खेती का ऐसा अनोखा और देसी बिजनेस मॉडल तैयार किया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।

भाग्य बाई इस बेहद छोटी सी भूमि पर आधुनिक तकनीक के सहारे नेट हाउस में नर्सरी चला रही हैं। इस छोटे से कारोबार से वे हर साल 1 लाख से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं। सीमित संसाधनों और छोटी सी जगह का उपयोग करके आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने वाली भाग्य बाई आज क्षेत्र के सैकड़ों और हजारों किसानों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुकी हैं।

मुश्किलों से लड़कर बदला खेती का तौर-तरीका

भाग्य बाई पटेल के परिवार के पास कुल मिलाकर केवल चार एकड़ जमीन है। एक बड़े संयुक्त परिवार के लिए इतनी कम जमीन पर पारंपरिक खेती के सहारे गुजारा करना बेहद मुश्किल भरा काम था। इस आर्थिक तंगी से बाहर निकलने के लिए भाग्य बाई ने आज से करीब 8 से 10 साल पहले अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया। उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय नर्सरी पद्धति से पौधों को तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

शुरुआत में उन्होंने बहुत ही छोटे और घरेलू स्तर पर इस काम को शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से नर्सरी लगाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भाग्य बाई ने बैंक से लोन लिया और अपने घर के ठीक सामने खाली पड़ी बगीचे की जमीन पर एक आधुनिक नेट हाउस का निर्माण करवाया। यहीं से उनके व्यवसाय को एक नई गति मिली।

किसानों की मांग और आर्डर पर तैयार होती है नर्सरी

धीरे-धीरे आस-पास के गांवों के किसानों को भाग्य बाई की नर्सरी के बारे में पता चलने लगा। पिछले तीन-चार सालों से वे केवल किसानों से मिलने वाले अग्रिम ऑर्डर पर ही विभिन्न फसलों की नर्सरी तैयार करने का काम कर रही हैं। इस नर्सरी में हर तरह की मौसमी और बेमौसमी सब्जियों के पौधे तैयार किए जाते हैं। उनके पास तैयार होने वाले प्रमुख पौधों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • टमाटर और बैंगन के उन्नत किस्म के पौधे
  • तीखी मिर्च और रंग-बिरंगी शिमला मिर्च
  • विभिन्न प्रकार की गोभी और अरहर की पौध
  • बेल वाली फसलें जैसे लौकी, गिलकी, करेला और ककड़ी

मुनाफे का गणित: मात्र ₹1 का पौधा और लाखों की कमाई

भाग्य बाई पटेल के इस देसी बिजनेस मॉडल का गणित बेहद सरल लेकिन अत्यधिक प्रभावी है। वे एक बार में करीब 1,00,000 (एक लाख) पौधे अपने नेट हाउस में तैयार करती हैं। इन पौधों को वे किसानों को मात्र ₹1 प्रति पौधे की बेहद किफायती दर पर बेचती हैं। वे साल भर में करीब 6 बार नई नर्सरी लगाती हैं। इस प्रकार, खाद, बीज, प्लास्टिक ट्रे, मजदूरी और अन्य सभी तरह की लागत को पूरी तरह से निकालने के बाद भी भाग्य बाई को साल भर में 1 लाख से लेकर 1.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा बहुत ही आसानी से मिल जाता है।

पौधे तैयार करने की वैज्ञानिक विधि और जरूरी सामान

भाग्य बाई बताती हैं कि एक बार नर्सरी लगाने में और पौधों को बेचने लायक तैयार करने में लगभग 25 से 35 दिन का समय लगता है। वहीं, बीज बोने से लेकर पूरे चक्र को पूरा होने में करीब डेढ़ महीने का समय लग जाता है। इस काम को सुचारू रूप से करने के लिए कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है:

  • पौधों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रकार की प्लास्टिक ट्रे
  • मिट्टी की जगह इस्तेमाल होने वाला हल्की गुणवत्ता का कोकोपीट (नारियल का बुरादा)
  • पौधों के समुचित विकास के लिए जैविक और शुद्ध गोबर की खाद
  • नियमित सिंचाई, तापमान नियंत्रण, अनुभव और लगातार देखरेख

गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं रोजगार का जरिया

भाग्य बाई पटेल ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उन्होंने अपने इस छोटे से व्यवसाय के जरिए गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। उनके इस काम में कनेरा गांव की कई अन्य महिलाएं भी मजदूरी का काम करती हैं, जिससे उन्हें अपने घर के पास ही नियमित रोजगार मिल जाता है। इस बेहतरीन पहल की वजह से आज पूरे गांव और क्षेत्र में भाग्य बाई को बेहद सम्मान की नजरों से देखा जाता है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर इंसान के पास मजबूत हौसला और सही दृष्टिकोण हो, तो वह न्यूनतम संसाधनों के साथ भी एक बेहद सफल और मुनाफेदार उद्यम खड़ा कर सकता है।

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