आदतन अपराधी को बार-बार पैरोल का लाभ, राम रहीम की रिहाई पर छलका मृतक पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति का दर्द

यौन शोषण और हत्या के मामलों में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 21 दिन की फरलो मिली है। इस पर मृतक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्याय प्रणाली का मजाक बताया है।

गुरमीत राम रहीम की फिर से रिहाई पर उठे सवाल

यौन शोषण और गंभीर अपराधों के मामलों में 20 साल की लंबी सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर सुर्खियों में है। वह हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर बाहर आ गया है। जेल से रिहाई के बाद वह अपने सिरसा स्थित आश्रम में रहने के लिए रवाना हो गया। राम रहीम को बार-बार मिलने वाली इस राहत ने एक बार फिर हरियाणा की सियासत के साथ-साथ कानूनी गलियारों में भी बहस छेड़ दी है। इस मामले ने उन लोगों के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है, जिन्होंने उनके अपराधों के कारण अपनों को खोया है। शहीद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस रिहाई को लेकर सिस्टम पर बेहद तीखे और कड़वे सवाल उठाए हैं।

अंशुल छत्रपति का आक्रोश और सिस्टम पर प्रहार

अंशुल छत्रपति ने अपने पिता को खोने के बाद से ही राम रहीम के खिलाफ एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। राम रहीम को मिली नई फरलो पर प्रतिक्रिया देते हुए अंशुल का दर्द और गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने सरकारी मशीनरी और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुख्य सवाल और चिंताएं निम्नलिखित बिंदुओं में समझी जा सकती हैं:

  • आदतन अपराधी को खुली छूट क्यों: अंशुल का कहना है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसे जघन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है और जिसके खिलाफ अन्य गंभीर हत्या के मामले अभी भी अदालतों में चल रहे हैं, उसे बार-बार पैरोल या फरलो देना न्याय का उपहास उड़ाने जैसा है।
  • राजनीतिक स्वार्थ का हथियार: उनका सीधा आरोप है कि चाहे सत्ता में कोई भी राजनीतिक दल रहा हो, राम रहीम का इस्तेमाल चुनावी नफा-नुकसान और वोट बैंक को साधने के लिए किया जाता है। जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, तब-तब जेल के दरवाजे उसके लिए खोल दिए जाते हैं।
  • न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल: अंशुल ने तर्क दिया कि सरकारें जिस तरह से कानूनी दांव-पेंच अपनाकर इस रिहाई को उचित ठहराती हैं, वह न्यायपालिका के प्रति आम जनता के भरोसे को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि अब सवाल पीड़ित परिवार को नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री और सरकारी प्रशासन से पूछने की जरूरत है।

न्याय व्यवस्था को सुधारने की जरूरत

अंशुल छत्रपति ने जोर देकर कहा है कि यह स्थिति सामान्य नहीं है। उन्होंने न्यायपालिका और देश की अदालतों से अपील की है कि वे इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लें। उनका मानना है कि कानून के शासन को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि अदालतों को ऐसे मामलों में सख्ती दिखानी चाहिए ताकि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण का लाभ न मिल सके।

मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां

आम जनता के मन में उठ रहे कुछ प्रमुख सवालों के जवाब इस प्रकार हैं:

  • राम रहीम को कितने दिन की रिहाई मिली है: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को इस बार 21 दिन की फरलो दी गई है।
  • रिहाई के बाद वह कहां रहेगा: जेल से निकलने के बाद उसे सिरसा स्थित अपने डेरा आश्रम में रहने की अनुमति दी गई है।
  • अंशुल छत्रपति के आरोप क्या हैं: उन्होंने सरकार पर चुनावी लाभ के लिए आदतन अपराधी को बार-बार राहत देने और न्याय प्रणाली का मजाक बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
  • अंशुल की मांग क्या है: उनकी मांग है कि सरकार द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर न्यायपालिका को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए ताकि कानून के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे।

गुरमीत राम रहीम का बार-बार जेल से बाहर आना न केवल कानूनी तौर पर बल्कि नैतिक रूप से भी समाज में एक गलत संदेश दे रहा है, जिस पर पीड़ित परिवार और आम नागरिक लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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