महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त हुआ FDA, 31 जुलाई तक 3100 से अधिक संस्थानों पर कार्रवाई

महाराष्ट्र में खाद्य और औषधि प्रशासन ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी और जांच अभियान चलाया है। आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही त्योहारों के लिए विशेष निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।

महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा के लिए एक्शन मोड में FDA

महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए खाद्य और औषधि प्रशासन यानी FDA ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंढे के अनुसार, 31 जुलाई तक पूरे राज्य में खाद्य कारोबार से जुड़े 3,100 से अधिक प्रतिष्ठानों की सघन जांच पूरी कर ली गई है। इस दौरान नियमों की अनदेखी करने पर 165 संस्थानों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए हैं। साथ ही, 750 से अधिक प्रतिष्ठानों को कमियों को दूर करने के लिए नोटिस थमाया गया है। मुंढे ने बताया कि लाइसेंस निलंबित होने के बाद करीब 105 संस्थानों ने उनके सामने अपील दायर की थी, जिनमें से लगभग 70 मामलों में राहत दी गई है, जबकि बाकी पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

नियमों के अनुपालन के लिए सुधार का मौका

FDA के आयुक्त ने साफ किया है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल लाइसेंस रद्द करना नहीं, बल्कि मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा होता है, वहां विभाग तुरंत लाइसेंस निलंबित करता है। अन्य स्थितियों में सुधार का नोटिस देकर संस्थान को अपनी कमियां दूर करने का अवसर दिया जाता है। निलंबन के बाद जब संबंधित प्रतिष्ठान नियमों का पालन करने लगते हैं, तो अधिकारी पुनः निरीक्षण करते हैं। यदि सुधार संतोषजनक मिलता है, तो निलंबन हटाया जा सकता है, अन्यथा कार्रवाई जारी रहती है।

रेस्टोरेंट्स ने ली खुद सुधार की जिम्मेदारी

मुंढे ने जानकारी दी कि विभाग की सख्त कार्रवाई के बाद राज्य के कई भोजनालयों ने स्वयं ही अपनी व्यवस्था सुधारने की पहल की है। अनेक रेस्टोरेंट संचालकों ने अपने रसोई घर का नवीनीकरण करवाया है और सफाई के लिए कुछ समय तक प्रतिष्ठान बंद रखने का साहसी निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें आम नागरिकों से लगातार सकारात्मक फीडबैक मिल रहा है। लोग अब तेल, दूध और खाद्य रंगों की गुणवत्ता में बदलाव महसूस कर रहे हैं। भविष्य में लोगों की राय जानने के लिए FDA एक औपचारिक फीडबैक प्रणाली विकसित करने पर भी मंथन कर रहा है। मुंढे का मानना है कि यदि व्यवसायी स्वयं नियमों का पालन करने लगें, तो नियामक संस्था की आवश्यकता ही खत्म हो जाएगी।

तबादले की अटकलों पर स्पष्ट जवाब

जब तुकाराम मुंढे से उनके तबादले को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है और इसी विश्वास के कारण वे सेवा दे रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तबादला करना सरकार का अधिकार है, उनका नहीं। उनका मिशन 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' है और जब तक वे इस पद पर हैं, उनका पूरा ध्यान जीवन रक्षक खाद्य और दवाओं की सुरक्षा पर केंद्रित रहेगा।

सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान

आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि खाद्य सुरक्षा केवल FDA का काम नहीं है, बल्कि इसमें फूड बिजनेस ऑपरेटर्स और जागरूक नागरिकों की भागीदारी भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि पूरा खाद्य उद्योग असुरक्षित नहीं है, बल्कि हर मामला अलग होता है। उन्होंने यह भी देखा है कि अब किसानों और दूध संग्रहण केंद्रों में भी मानकों को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

डिजिटल निगरानी की ओर कदम

आने वाले समय में FDA खाद्य कारोबार की निगरानी को पूरी तरह डिजिटल बनाने की योजना बना रहा है। विभाग में ऑटोमेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि मानवीय हस्तक्षेप कम हो और सिस्टम अधिक प्रभावी ढंग से काम करे।

त्योहारों के लिए विशेष रणनीति

त्योहारों के सीजन को देखते हुए FDA ने विशेष कैलेंडर तैयार किया है। दिवाली, क्रिसमस और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों के लिए तीन चरणों में निगरानी की जाएगी। मुंढे ने लोगों से अपील की है कि वे त्योहारों में HFSS यानी हाई फैट, हाई साल्ट और हाई शुगर वाली चीजों का सेवन कम करें और पौष्टिक आहार को महत्व दें।

शिकायतों का त्वरित निपटारा

पिछले तीन महीनों में विभाग को फोन, ईमेल और टोल-फ्री नंबर के जरिए 16 हजार से अधिक शिकायतें मिली हैं। इनका विश्लेषण कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे पांच सितारा होटल हो या छोटा ढाबा, नियम सभी के लिए एक हैं। बड़े रेस्टोरेंट से लेकर डार्क किचन तक, सभी की गहन जांच की जा रही है।

सरकारी कैंटीन पर भी कड़ी नजर

मुंढे ने जानकारी दी कि मंत्रालय और विधायक निवास सहित 115 सरकारी व अर्ध-सरकारी कैंटीनों की जांच की गई है। कई मामलों में नोटिस और निलंबन की कार्रवाई की गई है, क्योंकि उनके लिए भी नियम निजी संस्थानों जैसे ही हैं।

स्कूलों और आंगनवाड़ियों की सुरक्षा

आंगनवाड़ी और स्कूलों के मिड-डे मील की गुणवत्ता जांचने के लिए सेंट्रल किचन पर विशेष नजर रखी जा रही है। हाल ही में मुंबई में कई किचन से नमूने लिए गए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर एक लाइसेंस निलंबित किया गया। अब राज्य के सभी स्कूलों में साल में कम से कम दो बार अनिवार्य जांच की जाएगी।

रक्त केंद्रों पर भी सख्त नियम

रक्त को 'दवा' की श्रेणी में रखते हुए FDA रक्त केंद्रों पर भी सख्ती कर रहा है। बिना अनुमति शिविर आयोजित करने और कोल्ड चेन बनाए न रखने पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। दान किए गए रक्त के बदले आर्थिक लाभ लेने या जबरन रक्तदान कराने पर पूरी तरह रोक है। जो केंद्र मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं।

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