रक्षाबंधन 2026 का महत्व और शुभ मुहूर्त
सावन माह की पूर्णिमा का दिन भाई और बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुखद भविष्य की कामना करती हैं। वास्तु शास्त्र के जानकारों का मानना है कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है, इसलिए इसका चयन सावधानी से करना चाहिए। गलत प्रकार की राखी का चुनाव जीवन में नकारात्मकता ला सकता है।
रक्षाबंधन 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और समय
पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर हो जाएगा। यह तिथि अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक बनी रहेगी। इस प्रकार, रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यदि हम शुभ समय की बात करें, तो अनुष्ठान के लिए सुबह 6 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक का समय अत्यंत उपयुक्त है। इसके अलावा, राखी बांधने का प्रथम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 58 मिनट तक रहेगा और दोपहर के समय 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक का अभिजीत मुहूर्त भी अत्यंत उत्तम माना गया है।
ऐसी राखियां खरीदने से बचें
बाजार में कई तरह की फैंसी राखियां उपलब्ध होती हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष प्रकार की राखियां भाई को नहीं बांधनी चाहिए:
- प्लास्टिक की राखी: प्लास्टिक को अपवित्र माना जाता है, इसलिए इसकी जगह रेशम के धागे या सूती धागे से बनी राखी का चुनाव करना ही शुभ रहता है।
- देवताओं के चित्र वाली राखी: अक्सर बाजार में भगवान या देवी-देवताओं की तस्वीरों वाली राखियां मिलती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी राखियां कलाई पर बांधना उचित नहीं माना जाता है।
- काले रंग की राखी: रक्षाबंधन जैसे मांगलिक पर्व पर काले रंग की वस्तुएं वर्जित मानी जाती हैं। हमेशा लाल, पीले या केसरिया जैसे शुभ रंगों वाली राखी ही चुनें।
- एविल आई वाली राखी: एविल आई (नजर दोष) वाली राखियों का चलन बढ़ा है, लेकिन इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, अतः इन्हें खरीदने से बचना चाहिए।
- खंडित या टूटी हुई राखी: यदि राखी का कोई मोती टूटा हो, धागा कहीं से कटा हो या कोई हिस्सा निकला हुआ हो, तो ऐसी राखी भूलकर भी न खरीदें। खंडित वस्तुएं अशुभता लाती हैं।
- नकारात्मक प्रतीकों वाली राखी: बाजार में कई ऐसी राखियां उपलब्ध होती हैं जिन पर नकारात्मक चिह्न या आकृति बनी होती है। हमेशा ध्यान रखें कि भाई की कलाई पर केवल शुभ प्रतीक ही बंधे होने चाहिए।
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