ऑपरेशन सिंदूर का रहस्य और पूर्व सीडीएस का खुलासा
भारतीय वायुसेना के पराक्रम की गाथाओं में ऑपरेशन सिंदूर का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकवादी ठिकानों की कमर तोड़कर रख दी थी और पड़ोसी मुल्क को उनकी औकात दिखा दी थी। अब इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार, अगर उस रात कुदरत का साथ न मिला होता, तो पाकिस्तान का स्कर्दू एयरबेस पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो चुका होता और इतिहास कुछ और ही होता।
मौसम बना था पाकिस्तान का रक्षक
जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के स्कर्दू एयरबेस को अपना मुख्य लक्ष्य बनाने की पूरी तैयारी कर ली थी। स्कर्दू एयरबेस, जिसे पीएएफ बेस कादरी के नाम से भी जाना जाता है, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में स्थित पाकिस्तान वायुसेना का एक बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है। योजना के अनुसार भारतीय लड़ाकू विमानों को इस बेस को तबाह करना था, लेकिन आखिरी वक्त पर खराब मौसम ने बीच में बाधा डाल दी। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते वायुसेना को अपने इस मिशन को अंत समय में रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा, अन्यथा आज स्कर्दू बेस का नामो-निशान मिट चुका होता।
भोलारी पर साधा था सटीक निशाना
जब स्कर्दू एयरबेस पर हमला संभव नहीं हो सका, तो भारतीय वायुसेना ने बिना समय गंवाए अपने लक्ष्य को बदल दिया और पाकिस्तान के ही भोलारी स्थित ठिकानों को अपना निशाना बनाया। जनरल चौहान के अनुसार, उन्होंने सरगोधा पर हमले की अनुमति दी थी और साथ ही दो अन्य लक्ष्यों को चुनने का निर्देश दिया था, जिनमें स्कर्दू शामिल था। लेकिन मौसम खराब होने के कारण जब स्कर्दू पर हमला नहीं हो पाया, तो पूरी ताकत भोलारी की ओर मोड़ दी गई। यह हमला इतना सटीक और प्रभावशाली था कि बाद में सैटेलाइट तस्वीरों में भोलारी हैंगर की छत में बड़ा छेद और उसके आसपास फैला मलबा स्पष्ट देखा गया था। यह प्रिसिजन तकनीक का बेहतरीन उदाहरण था, जिसमें हमला सिर्फ उसी इमारत तक सीमित रहा जिसे निशाना बनाया गया था।
किराना हिल्स पर ड्रोन गिरने का सच
जनरल चौहान ने किराना हिल्स से जुड़े विवादों और अटकलों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य जानबूझकर किराना हिल्स को निशाना बनाना नहीं था, जिसे पाकिस्तान का प्रमुख परमाणु केंद्र माना जाता है। पूर्व सीडीएस ने समझाया कि उस रात ऑपरेशन के दौरान सरगोधा के आसपास पाकिस्तानी रडार का पता लगाने के लिए कई लॉइटिंग म्यूनिशन यानी ड्रोन जैसे हथियार भेजे गए थे। ये ड्रोन करीब दो घंटे तक आसमान में रहकर लक्ष्य की तलाश करते हैं, और यदि उन्हें निशाना नहीं मिलता है तो वे ईंधन खत्म होने पर कहीं भी गिर सकते हैं। इसी प्रक्रिया में एक ड्रोन का ईंधन समाप्त हो गया और वह किराना हिल्स के पास जाकर गिर गया, जिसे लेकर पहले कई तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं।
वायुसेना की मारक क्षमता का प्रमाण
नई दिल्ली के विवेकानंद सेंटर में दी गई यह जानकारी भारतीय वायुसेना की अद्भुत कुशलता और उनकी सटीक मारक क्षमता का प्रमाण है। जनरल चौहान द्वारा साझा किए गए इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर महज एक हवाई हमला नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक कार्रवाई थी। हालांकि खराब मौसम ने एक बार पाकिस्तान को बचा लिया, लेकिन भारतीय वायुसेना के सटीक हमलों ने यह संदेश देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ कोई भी नापाक हरकत करने पर उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह खुलासा ऑपरेशन सिंदूर की उन परतों को खोलता है जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आ पाई थीं।
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