बीजेपी को अरविंद केजरीवाल की खुली चुनौती: पंजाब और गुजरात के 1000-1000 स्कूलों की हो निष्पक्ष जांच

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर फैलाई जा रही नकारात्मकता पर बीजेपी को घेरा है और दोनों राज्यों के स्कूलों का तुलनात्मक निरीक्षण करने की चुनौती दी है।

शिक्षा व्यवस्था पर छिड़ा सियासी संग्राम

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर कथित रूप से झूठे वीडियो प्रचारित करने के मामले में भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोला है। केजरीवाल ने भाजपा को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि वे गुजरात और पंजाब के एक एक हजार सरकारी स्कूलों की सूची तैयार करें और फिर मीडिया के साथ मिलकर इनका जमीनी निरीक्षण किया जाए। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि किस राज्य की शिक्षा व्यवस्था अधिक बेहतर और प्रभावशाली है।

साढ़े चार साल बनाम 30 साल का काम

अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को एक सार्वजनिक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि भाजपा पिछले 30 वर्षों से गुजरात की सत्ता में काबिज है, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को अभी केवल साढ़े चार साल ही हुए हैं। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि मात्र इतने कम समय में उनकी सरकार ने राज्य के 19,700 सरकारी स्कूलों में से 19,200 स्कूलों की कायाकल्प कर दी है। शेष 500 स्कूलों पर भी तेजी से काम चल रहा है और वे भी अगले डेढ़ से दो साल में पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। केजरीवाल ने सवाल खड़ा किया कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि उसने अपने तीन दशकों के शासनकाल में गुजरात के शिक्षा क्षेत्र में क्या उपलब्धियां हासिल की हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला

केजरीवाल ने आगे कहा कि आज पंजाब की सरकारी स्कूली शिक्षा पूरे देश में नंबर एक स्थान पर पहुंच चुकी है। यह दावा किसी पार्टी की तरफ से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के ही थिंक टैंक नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिस समय वर्ष 2022 में उनकी सरकार सत्ता में आई थी, तब शिक्षा रैंकिंग में पंजाब 28वें स्थान पर था। अब साढ़े चार साल की कड़ी मेहनत के बाद पंजाब इस सूची में सबसे ऊपर आ गया है और उसने केरल जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है।

पुराने वीडियो और अफवाहों पर पलटवार

भाजपा पर निशाना साधते हुए केजरीवाल ने कहा कि विपक्षी दल पुरानी चालें चल रहे हैं और 2018 के वीडियो का सहारा लेकर यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि पंजाब में स्कूलों की स्थिति खराब है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय वह स्कूल इसलिए खराब थे क्योंकि उस अवधि में वहां कांग्रेस की सरकार थी और वर्ष 2017 तक भाजपा वहां शासन कर चुकी थी। उस समय स्कूलों की हालत जर्जर हो चुकी थी, जिसे वर्तमान सरकार ने पूरी तरह से बदलकर शानदार बना दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल करके फर्जी तस्वीरें फैला रहे हैं ताकि पंजाब के स्कूलों को बदनाम किया जा सके।

पारदर्शिता और सकारात्मक नीयत

सरकार की कार्यशैली के बारे में बात करते हुए केजरीवाल ने अकाली दल के समर्थक रतन ढिल्लों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब रतन ढिल्लों ने हाल ही में किसी स्कूल को लेकर ट्वीट किया, तो पंजाब के शिक्षा मंत्री ने तुरंत उनका संज्ञान लिया और उस स्कूल के लिए ग्रांट जारी करवा दी। इसके बाद खुद रतन ढिल्लों ने सरकार की तारीफ की। केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि उनकी नीयत साफ है और वे पंजाब के लोगों, शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों के साथ मिलकर शिक्षा सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने जनता से भी अपील की कि यदि कोई गलती है तो उसे उजागर करें, ताकि वे सुधार कर सकें, लेकिन झूठे विज्ञापनों के माध्यम से राज्य को अपमानित करना गलत है।

खुली चुनौती का सार

अंत में केजरीवाल ने अपनी चुनौती को दोहराते हुए कहा कि अगर भाजपा में हिम्मत है, तो वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करे। उन्होंने कहा कि 1000 स्कूलों का चयन वे करें और 1000 का चयन हम करें। इसके बाद पूरे देश की जनता और मीडिया यह देखेगा कि गुजरात के 30 साल के शासन के बाद उनके स्कूल बेहतर हैं या फिर पंजाब में आम आदमी पार्टी के साढ़े चार साल के प्रयास के परिणाम ज्यादा बेहतर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब से भाजपा ने अन्य राज्यों के स्कूलों का निरीक्षण शुरू किया है, उनके स्वयं के राज्यों के स्कूलों की पोल खुलनी शुरू हो गई है।

https://hindi.news18.com/news/nation/aap-arvind-kejriwal-challenge-bjp-to-get-1000-schools-of-gujarat-and-punjab-inspected-let-see-which-ones-are-better-10781377.html