राजनीति से संन्यास की अटकलों पर विराम
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सक्रिय राजनीति से किनारा करने की चर्चाओं को उनके कार्यालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया पर यह कयास लगाए जा रहे थे कि नितिन गडकरी आगामी दिनों में राजनीति से संन्यास ले सकते हैं। इन खबरों ने उस समय जोर पकड़ लिया जब उनके एक भाषण का अंश सार्वजनिक हुआ। हालांकि, अब उनके आधिकारिक कार्यालय ने इन सभी चर्चाओं को केवल अफवाह करार दिया है।
क्या था विवाद का असली कारण?
दरअसल, केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और मंत्रियों के विभागों में बदलाव की खबरों के बीच नितिन गडकरी का एक बयान सामने आया था। इस बयान में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी लंबी पारी और नई पीढ़ी को आगे लाने की बात कही थी। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य के फैसलों और सियासी संन्यास से जोड़कर देखा जाने लगा। विभिन्न टेलीविजन चैनलों और न्यूज पोर्टल्स ने इसे उनके राजनीतिक करियर के अंत के संकेत के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया था।
दफ्तर ने स्पष्ट किया सच
अपने कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया है कि नितिन गडकरी के बयान को पूरी तरह से गलत संदर्भ में पेश किया गया। स्पष्टीकरण के अनुसार, नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने की बात का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। यह बयान विशेष रूप से लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर दिया गया था। दफ्तर ने साफ किया कि नितिन गडकरी का उद्देश्य उन कार्यों में युवाओं को अवसर देना था, न कि अपना राजनीतिक पद छोड़ना।
ट्रस्ट और आदिवासी विकास का संबंध
नितिन गडकरी के दफ्तर ने जानकारी दी कि लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट की स्थापना स्वयं गडकरी ने की थी। यह ट्रस्ट मुख्य रूप से आदिवासी इलाकों के विकास के लिए समर्पित है और इन दुर्गम क्षेत्रों में 'एकल विद्यालय' चलाने जैसी बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहा है। गडकरी कई वर्षों से इस संस्था के साथ जुड़े हुए हैं और वे इसके कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए युवा नेतृत्व को तैयार करने की बात कर रहे थे। उनके कार्यालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर नाराजगी जताई है जिन्होंने इस मानवीय और सामाजिक संदेश को राजनीति का रंग देने की कोशिश की।
नागपुर के कार्यक्रम में क्या कहा था?
यह पूरा विवाद नागपुर जिले के काटोल में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ था। वहां एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कक्षा को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा था, मैं किसी के लिए प्रेरणा नहीं हूं। आजकल मैं उस तरह काम नहीं कर पाता जैसे पहले करता था। अब मैं सबसे यही कहता हूं कि हमें नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। नए लोग आगे आएंगे और पुरानी पीढ़ी उन्हें गाइड करेगी। इसी तरह काम आगे बढ़ेगा और बढ़ेगा। मैं चाहता हूं कि यह काम इस स्तर तक पहुंचे कि महाराष्ट्र का कोई भी आदिवासी गांव बिना बिजली के न रहे।
मराठी बयान का क्या था अर्थ?
रिपोर्ट्स में गडकरी के जिस मराठी बयान का जिक्र बार-बार किया जा रहा था, उसमें उन्होंने कहा था, मैं पिछले 30 सालों से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहा हूं। मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई पुरस्कार भी पाए हैं। लेकिन अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता। नई पीढ़ी को काम करने का मौका मिलना चाहिए। कार्यालय ने जोर देकर कहा है कि यह बातें उनके राजनीतिक करियर के अंत की घोषणा नहीं, बल्कि एक अनुभवी व्यक्ति की इच्छा थी कि वे अपने द्वारा शुरू किए गए सामाजिक कार्यों के लिए अब नई और ऊर्जावान पीढ़ी को आगे देख रहे हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद अब उन तमाम चर्चाओं पर पूर्ण विराम लग गया है, जो उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर बता रही थीं।
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