पलामू की महिला किसान का कमाल: बैंगन की जड़ पर टमाटर उगाकर कर रही हैं बंपर कमाई

झारखंड के पलामू जिले की एक महिला किसान ने आधुनिक ग्राफ्टिंग तकनीक अपनाकर टमाटर की खेती में नया प्रयोग किया है, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक होने की संभावना है।

खेती में आधुनिक तकनीक का बढ़ता प्रभाव

आज के दौर में खेती का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। किसान अब केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक तकनीकों के जरिए अपनी आय बढ़ाने की ओर अग्रसर हैं। इसी कड़ी में पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत चेड़ाबार गांव की निवासी कुंती देवी ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग करते हुए टमाटर की खेती का एक नया मॉडल तैयार किया है, जो क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है ग्राफ्टिंग तकनीक और इसके फायदे

कुंती देवी ने बताया कि इस नवाचार की जानकारी उन्हें कृषि प्रशिक्षण के दौरान मिली। इस तकनीक में मुख्य रूप से बैंगन के पौधे की जड़ और टमाटर के पौधे के ऊपरी हिस्से को आपस में जोड़ा जाता है। बैंगन की जड़ें काफी मजबूत और रोग प्रतिरोधी होती हैं, जिसके कारण टमाटर का पौधा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और बेहतर उपज देता है। इस विधि के इस्तेमाल से पौधों की सहनशक्ति में जबरदस्त इजाफा होता है और किसान को फसल के खराब होने का डर कम रहता है।

150 पौधों से शुरू की नई शुरुआत

अपने प्रयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए कुंती देवी ने कहा कि उन्होंने फिलहाल अपने खेत में 150 ग्राफ्टिंग टमाटर के पौधे रोपित किए हैं। इन पौधों को खेत में लगाए हुए करीब एक महीने का समय बीत चुका है और उनकी वृद्धि काफी उत्साहजनक है। पौधों की सेहत को देखते हुए उन्हें उम्मीद है कि बहुत जल्द ही इनमें फल लगने शुरू हो जाएंगे। उनका मानना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में इस तकनीक में श्रम कम लगता है और आर्थिक रूप से अधिक लाभ मिलने की पूरी संभावना है।

प्राकृतिक खेती और मल्चिंग का महत्व

कुंती देवी की खेती में केवल तकनीकी ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। वह पौधों की पोषण क्षमता बढ़ाने के लिए पूरी तरह से जैविक खाद का उपयोग कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने खेत में मल्चिंग की प्रक्रिया भी अपनाई है। मल्चिंग के चलते खेत में अनावश्यक घास या खरपतवार नहीं उगते, मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है और पौधों की देखभाल में लगने वाली अतिरिक्त मेहनत भी बच जाती है। मल्चिंग मिट्टी के संरक्षण में भी मददगार साबित हो रही है।

अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणा

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद से ही कुंती देवी का दृष्टिकोण खेती के प्रति अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी हो गया है। वह मानती हैं कि यदि किसान समय के साथ आधुनिक तरीकों को अपनाएं और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलें, तो खेती को घाटे का सौदा होने से बचाया जा सकता है। उनकी इस मेहनत और नई सोच ने न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है, बल्कि गांव की अन्य महिला किसानों को भी प्रेरित किया है कि वे किस तरह छोटे स्तर पर तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकती हैं।

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