बिना AC के भी घर रहेगा शिमला जैसा कूल, तपती गर्मी से बचाने आ गया हाथी की स्किन वाला खास सीमेंट

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने हाथियों की त्वचा की प्राकृतिक ठंडक की क्षमता से प्रेरित होकर एक विशेष सीमेंट टाइल विकसित की है। यह नई तकनीक बिना बिजली या एयर कंडीशनर के ही घरों को ठंडा रखने में सक्षम है।

हाथी की त्वचा से मिली है खास प्रेरणा

भीषण गर्मी के दिनों में जब पारा आसमान छूता है, तो एयर कंडीशनर और कूलर ही एकमात्र सहारा नजर आते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है जो बिना किसी बिजली के उपकरण के घर को ठंडा रखने का वादा करती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक विशेष टाइल तैयार की है, जो हाथियों की त्वचा की कार्यप्रणाली से प्रेरित है। इस अनूठी रिसर्च का नेतृत्व आर्किटेक्चर प्रोफेसर डोरिट अवीव ने किया है, जिसमें मटेरियल साइंटिस्ट शू यांग और कुन-हाओ यू भी प्रमुखता से शामिल रहे हैं।

क्या है कूलिंग का जादुई राज

प्रकृति में हाथियों को पसीना नहीं आता, फिर भी वे अफ्रीका जैसे गर्म इलाकों में खुद को ठंडा रखने में कामयाब रहते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि हाथियों की त्वचा पर सूक्ष्म दरारें होती हैं जो पानी को सोखकर उसे देर तक रोके रखती हैं। जब हाथी अपनी त्वचा पर पानी डालते हैं, तो यह पानी तुरंत नीचे नहीं गिरता, बल्कि उन छोटी-छोटी दरारों में जाकर फंस जाता है। इसके बाद, पानी धीरे-धीरे वाष्प बनकर उड़ता है, जिससे हाथी का शरीर लगातार ठंडा बना रहता है। शोधकर्ताओं ने इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया को इमारतों की दीवारों पर उतारने का साहसिक प्रयास किया है।

सीमेंट से बनी कूलिंग टाइल

शोधकर्ताओं ने सीमेंट और डायटोमेशियस अर्थ नामक छिद्रयुक्त पदार्थ का उपयोग करके एक विशेष टाइल का निर्माण किया है। इस टाइल की बनावट में बेहद बारीक छिद्रों और खास तौर पर बनाई गई दरारों का एक जाल बिछाया गया है। जब इस टाइल पर पानी डाला जाता है, तो ये छिद्र पानी को तुरंत सोख लेते हैं और दरारें उस पानी को पूरी सतह पर धीरे-धीरे फैला देती हैं। इससे पानी सतह पर लंबे समय तक बना रहता है और धीमी गति से वाष्पित होकर सतह व उसके नीचे के हिस्से को जबरदस्त ठंडक प्रदान करता है।

तापमान में दर्ज की गई भारी गिरावट

परीक्षणों के दौरान इस तकनीक ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। टेस्ट में पाया गया कि इस खास टाइल के नीचे का तापमान लगभग 89.6 डिग्री फॉरेनहाइट रहा। तुलनात्मक रूप से, टूटी हुई आम स्टुको सतह का तापमान 107.6 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच गया था, जबकि बिना दरार वाली सामान्य स्टुको सतह का तापमान तो 125.6 डिग्री फॉरेनहाइट तक चला गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक स्टुको की तुलना में सतह का तापमान करीब 10 से 20 डिग्री फॉरेनहाइट तक कम करने में सक्षम है।

बिजली की बचत और लंबी प्रभावशीलता

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के मैकेनिकल कंप्रेसर, पंखे या बिजली के कल-पुर्जों की आवश्यकता नहीं होती। एयर कंडीशनर जहां बिजली की खपत करके कमरे को ठंडा रखते हैं, वहीं ये टाइलें पूरी तरह से प्राकृतिक वाष्पीकरण प्रक्रिया पर आधारित हैं। परीक्षणों में यह भी देखा गया कि टाइल का कूलिंग प्रभाव एक बार पानी डालने के बाद लगभग 20 घंटे तक बरकरार रहा।

बड़ी इमारतों पर होगा इस्तेमाल

वैज्ञानिकों ने इस सीमेंट मिश्रण को स्प्रे करने का तरीका भी विकसित कर लिया है, जिसे आम निर्माण मशीनों की मदद से बड़े पैनलों पर आसानी से लगाया जा सकता है। आने वाले समय में इसे बड़ी व्यावसायिक इमारतों और आवासीय परिसरों की बाहरी दीवारों पर लगाने की योजना है। शोधकर्ता अब एक ऐसी प्रणाली पर भी काम कर रहे हैं, जो मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार टाइलों में अपने आप पानी की उतनी ही मात्रा छोड़ेगी जितनी कि कमरे को ठंडा रखने के लिए जरूरी हो। यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा खपत कम करने और घरों को पर्यावरण के अनुकूल ठंडा रखने में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।

https://hindi.news18.com/world/america-special-cement-inspired-by-elephant-skin-provide-relief-from-scorching-heat-keeping-homes-cool-10773854.html