भावुक कर देने वाली विदाई
संभल के पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई का हाल ही में तबादला होने के बाद आयोजित विदाई समारोह में माहौल काफी भावुक हो गया। इस कार्यक्रम के दौरान केके बिश्नोई खुद को रोक नहीं पाए और मंच पर ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्हें बेहद भावुक देखकर मंच पर उनके साथ बैठे जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने उन्हें पानी पिलाकर संभाला। विदाई के अंतिम पलों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनकी गाड़ी को फूल-मालाओं से सजाया और धक्का देकर उन्हें विदा किया। अब केके बिश्नोई को स्थानांतरित कर बिजनौर का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
कौन हैं केके बिश्नोई?
कृष्ण कुमार बिश्नोई, जो पेशेवर रूप से केके बिश्नोई के नाम से जाने जाते हैं, मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के धोरीमना इलाके से आते हैं। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले बिश्नोई अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई दिल्ली के प्रसिद्ध सेंट स्टीफंस कॉलेज से पूरी की। अपनी आगे की पढ़ाई के लिए वह फ्रांस गए, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
संयुक्त राष्ट्र को छोड़ चुनी सिविल सेवा
उच्च शिक्षा के बाद केके बिश्नोई ने विदेश में नौकरी भी की, जिसमें संयुक्त राष्ट्र (UN) का कार्यकाल भी शामिल रहा। हालांकि, देश सेवा का जज्बा उन्हें भारत वापस ले आया। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया और वर्ष 2017 में अपने दूसरे ही प्रयास में 174वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर अपनी सफलता का परचम लहराया। वे 2018 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। उनकी पत्नी अंशिका वर्मा भी 2021 बैच की IPS अधिकारी हैं।
गोरखपुर से संभल तक का सफर
IPS बनने के बाद केके बिश्नोई को उत्तर प्रदेश में ही सेवाएं देने का अवसर मिला। संभल से पहले वह गोरखपुर में एसपी सिटी के तौर पर तैनात थे। गोरखपुर में अपने कार्यकाल के दौरान वह अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख और अवैध संपत्तियों पर की गई कड़ी कार्रवाई के कारण खूब चर्चा में रहे।
संभल की चुनौतियां और प्रशासनिक कार्यकाल
संभल में तैनाती के दौरान उन्होंने करीब दो साल का वक्त बिताया। इस दौरान नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद सर्वे के समय हुई हिंसा जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना उन्होंने बखूबी किया। कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के उनके तरीके और त्वरित निर्णयों ने उन्हें जिले में एक सख्त प्रशासक के रूप में स्थापित किया। विदाई के वक्त उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संभल में बिताया गया यह समय उनके लिए अत्यंत यादगार रहेगा। उन्होंने जिले के पुलिस और प्रशासन के तमाम अधिकारियों व कर्मचारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि हर कठिन परिस्थिति में उन्हें टीम का भरपूर सहयोग मिला। अब वे बिजनौर में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं।
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