फरीदाबाद में सड़क की बदहाली पर फूटा जनता का गुस्सा, पल्ला से बसंतपुर तक जाम से परेशान लोगों का प्रदर्शन

फरीदाबाद के पल्ला से बसंतपुर मार्ग की खस्ताहाल स्थिति और भीषण जाम से त्रस्त स्थानीय निवासियों ने दो दिवसीय सांकेतिक धरना शुरू किया है। चार लाख की आबादी के लिए यह एकमात्र प्रमुख रास्ता है, जहां एंबुलेंस तक फंसने से मरीजों की जान पर बन आती है।

सड़क की बदहाली से तंग आकर सड़कों पर उतरे लोग

फरीदाबाद में पल्ला से बसंतपुर तक जाने वाली सड़क की दुर्दशा के खिलाफ स्थानीय निवासियों का सब्र का बांध अब टूट चुका है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से सड़क पर लगने वाले अंतहीन जाम और जर्जर रास्तों की समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके विरोध में उन्होंने अब सड़क पर उतरकर दो दिन का सांकेतिक धरना शुरू किया है। लगभग 4 लाख की आबादी का मुख्य आधार यही रास्ता है, लेकिन वैकल्पिक मार्ग न होने की वजह से हजारों लोग प्रतिदिन घंटों तक जाम में फंसे रहने को मजबूर हैं।

रोजमर्रा के जीवन में आ रही भारी मुश्किलें

इस सड़क की खराब स्थिति के कारण केवल काम पर जाने वाले लोग ही नहीं, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चे भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए निवासियों ने सरकार से पल्ला से बसंतपुर तक जल्द से जल्द फोर लेन सड़क बनाने की मांग की है। स्थानीय निवासी विनय ने बताया कि पिछले 12 वर्षों से वे इस रास्ते को बदहाल स्थिति में देख रहे हैं और सरकार को जगाने के लिए यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

एंबुलेंस का जाम में फंसना है बड़ी चुनौती

सड़क के जर्जर होने के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विनय कुमार के अनुसार, हालात इतने खराब हैं कि ओला और उबर जैसी कैब सेवाएं भी इस रास्ते के लिए बुकिंग लेने से मना कर देती हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय एंबुलेंस भी घंटों तक जाम में फंसी रहती हैं, जिससे मरीजों का जीवन खतरे में पड़ जाता है। यदि प्रशासन ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो 2 अक्टूबर से आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

15 वर्षों से सिर्फ वादे, समाधान नदारद

प्रदीप चौधरी जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि करीब 15 साल पुरानी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री पद पर आसीन नेताओं की मौजूदगी के बावजूद इस सड़क के कायाकल्प के लिए कुछ नहीं हुआ। चुनावी मौसम में नेता आते हैं और सड़क बनवाने के वादे करके चले जाते हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम देखने को नहीं मिला है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समस्या का समाधान हो जाए, तो उन्हें धरना देने का कोई शौक नहीं है।

बारिश में जलभराव की दोहरी मार

सूर्या विहार पार्ट 2 में पिछले 18 वर्षों से रह रहे पुष्पेंद्र चौधरी ने बताया कि केंद्र से लेकर राज्य तक भाजपा की सत्ता है और स्थानीय स्तर पर भी पार्टी के ही विधायक व पार्षद हैं, फिर भी सड़क की स्थिति नहीं सुधरी। सड़क पर गड्ढों के अलावा जलभराव की समस्या भी गंभीर है। मात्र एक घंटे की बारिश के बाद सड़क पर तीन फीट तक पानी भर जाता है, जिससे गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। अमोघ प्रधान ने इसे सरकारों की उदासीनता करार देते हुए कहा कि कांग्रेस हो या भाजपा, सरकारें बदलीं लेकिन आम जनता की राह की मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं।

एक्सप्रेसवे से तुलना और हकीकत

जीत चौधरी ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि एक ओर दिल्ली मुंबई बड़ौदा एक्सप्रेसवे की बदौलत फरीदाबाद से दिल्ली पहुंचने का दावा कम समय में किया जाता है, लेकिन दूसरी ओर सेहतपुर से बाईपास तक पहुंचने में ही लोगों के घंटों खर्च हो जाते हैं। सुबह के समय बच्चों को स्कूल पहुंचाने में डेढ़ घंटे का समय लग रहा है और ऑफिस से घर वापसी में कभी-कभी दो घंटे का समय लग जाता है। 10 मिनट के सफर के लिए भी लंबा समय देना पड़ता है।

आगरा चौक पर भी गंभीर संकट

आगरा चौक की स्थिति सबसे दयनीय बनी हुई है, जहां एक बार वाहन फंस जाने पर बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार नेताओं ने सड़क निर्माण के नाम पर नारियल फोड़कर कार्यक्रम किए हैं, लेकिन स्थिति रत्ती भर भी नहीं बदली है। आए दिन वाहनों के पलटने और उनके नुकसानग्रस्त होने की घटनाएं सामान्य हो गई हैं। अब क्षेत्र की जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पल्ला से बसंतपुर के बीच फोर लेन सड़क चाहिए, जो इस स्थायी समस्या का एकमात्र समाधान है।

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