गन्ने की खेती पर मंडरा रहा है स्मट रोग का खतरा, पत्तियों और कलियों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

गन्ने की फसल के लिए अगस्त का महीना बेहद नाजुक होता है, जिसमें स्मट जैसी खतरनाक फफूंदजनित बीमारी पैदावार को पूरी तरह नष्ट कर सकती है। इस रोग की पहचान और समय पर बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानें।

गन्ने की फसल के लिए अगस्त का महीना क्यों है अहम

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जैसे प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। हजारों किसानों की आजीविका सीधे तौर पर गन्ने की पैदावार से जुड़ी हुई है, जो कि एक महत्वपूर्ण नकदी फसल मानी जाती है। हालांकि, मौजूदा समय में बदलता मौसम और खेतों में बढ़ती नमी के कारण गन्ने की फसल पर कई प्रकार के रोगों और कीटों का खतरा बढ़ गया है। अगस्त का महीना गन्ने की विकास प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसी दौरान वातावरण में बनी उमस फफूंदजनित रोगों को पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी प्रदान करती है।

स्मट रोग की पहचान कैसे करें

स्मट गन्ने की एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी फफूंदजनित बीमारी है। यदि किसान समय रहते अपने खेतों में संक्रमित पौधों की पहचान नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर अंतिम पैदावार पर पड़ता है। इस रोग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि पौधे के बीच वाले हिस्से से एक लंबी, पतली और काली चाबुक जैसी संरचना बाहर निकल आती है। शुरुआत में पौधा देखने में सामान्य लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, पौधे की सामान्य वृद्धि रुक जाती है। संक्रमित पौधों की पत्तियां असामान्य रूप से पतली और संकरी दिखाई देने लगती हैं, जो रोग की गंभीरता का संकेत हैं।

बीमारी का प्रसार और सावधानी

जब पौधे पर दिखाई देने वाली यह काली चाबुक जैसी संरचना फटती है, तो इसमें से बड़ी तादाद में काले बीजाणु बाहर निकलते हैं। ये बीजाणु हवा और पानी के जरिए पूरे खेत में फैल जाते हैं और स्वस्थ पौधों को भी संक्रमित कर देते हैं। यही मुख्य कारण है कि खेत में एक भी संक्रमित पौधा दिखाई देने पर उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि रोगग्रस्त पौधों को तत्काल प्रभाव से जड़ समेत उखाड़कर खेत से बाहर कर दिया जाए ताकि बीमारी का प्रसार रुक सके।

स्मट रोग का प्रभावी उपचार

यदि आपके खेतों में स्मट रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो घबराने के बजाय सही समय पर दवा का प्रयोग करना आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, स्मट रोग पर नियंत्रण पाने के लिए Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC का छिड़काव बेहद कारगर साबित हो सकता है। इसके उपयोग की निर्धारित मात्रा 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी है। इस अनुपात के अनुसार, किसान 10 लीटर पानी में 10 मिलीलीटर दवा मिलाकर संक्रमित क्षेत्र में अच्छी तरह छिड़काव कर सकते हैं। रोग के शुरुआती लक्षण मिलते ही किया गया यह छिड़काव फसल को गंभीर नुकसान से बचाने में मददगार होता है।

छिड़काव का सही अंतराल

केवल एक बार का छिड़काव ही काफी नहीं हो सकता है। यदि रोग का प्रकोप ज्यादा दिखाई दे रहा है, तो पहला छिड़काव करने के बाद स्थिति की समीक्षा करें। यदि आवश्यकता महसूस होती है, तो 10 से 15 दिन के अंतराल पर दूसरा छिड़काव किया जाना चाहिए। लगातार निगरानी और सही समय पर फफूंदनाशी के प्रयोग से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है और पैदावार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी और सुझाव

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन का कहना है कि स्मट एक गंभीर फफूंद जनित बीमारी है, जो किसान की पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस रोग को नियंत्रित न किया जाए, तो यह गन्ने की कुल पैदावार में 30% से 100% तक की भारी गिरावट ला सकता है। डॉ. बिसेन ने सलाह दी है कि खेत में जो भी पौधे रोग से ग्रस्त दिखें, उन्हें तुरंत उखाड़कर या तो जमीन में गहरा दबा दें या फिर पूरी तरह जला दें। बीजाणुओं को नष्ट करना ही इस बीमारी को फैलने से रोकने का सबसे अचूक उपाय है। किसानों को चाहिए कि वे अगस्त के दौरान रोजाना अपने खेतों की निगरानी करें और किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लें।

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