हाफिज सईद की सुरक्षा में इजाफा
मुंबई में हुए 26/11 के खौफनाक आतंकी हमले के सूत्रधार और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने सईद की सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत में उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू हो चुकी है। अब वह भारत में अपनी अनुपस्थिति में ही मुकदमे का सामना करेगा। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, हाफिज सईद पर जानलेवा हमलों का खतरा काफी बढ़ गया है, जिसके चलते पाकिस्तानी खुफिया तंत्र ने उसे बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं।
लगातार मिल रही धमकियों और हमलों का खौफ
पिछले कुछ वर्षों का घटनाक्रम देखें तो हाफिज सईद को निशाना बनाने की कई कोशिशें की गई हैं। उसके बेहद करीब रहने वाले कई सहयोगी पहले ही मारे जा चुके हैं, जिससे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि अब हाफिज सईद स्वयं एक बड़ा निशाना बन चुका है। इसी खतरे की आशंका के मद्देनजर ISI ने उसके इर्द-गिर्द सुरक्षाकर्मियों की तैनाती में भारी बढ़ोतरी की है। कोई भी व्यक्ति, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है और सईद से मिलने का प्रयास करता है, उसे अब अत्यंत कड़ी सुरक्षा जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
ऑपरेशन सिंदूर का असर और आवाजाही पर पाबंदी
खुफिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से हाफिज सईद की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस ऑपरेशन के बाद से ही उस पर हुए हत्या के कई प्रयासों ने उसे पूरी तरह से घर में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। एक आधिकारिक सूत्र का कहना है कि ISI ने अब उसे बाहर निकलने की अनुमति देना पूरी तरह बंद कर दिया है। इस सख्ती का सीधा असर लश्कर-ए-तैयबा के संगठनात्मक कामकाज पर भी पड़ रहा है। अतीत में हाफिज सईद स्वयं आतंकी ट्रेनिंग कैंपों और कट्टरपंथ फैलाने वाली सभाओं में जाकर अपने कैडर को संबोधित किया करता था, लेकिन अब उसे सार्वजनिक रूप से दिखने की इजाजत नहीं दी जा रही है।
वास्तविक ठिकाने को लेकर बड़ा झूठ
हाफिज सईद की लोकेशन को लेकर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख और जमीनी हकीकत में भारी विरोधाभास है। पाकिस्तान सरकार दावा करती है कि सईद 2019 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का आकलन कुछ और ही कहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह वास्तव में लाहौर के मोहल्ला जौहर इलाके में बने एक अत्यधिक किलेबंद सेफ हाउस में छिपा कर रखा गया है। जब भी खतरे का स्तर बढ़ता है, उसे तुरंत वहां से हटाकर लाहौर के ही मियां मीर कैंटोनमेंट स्थित किसी और अधिक सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट कर दिया जाता है। यह पाकिस्तान के उस आधिकारिक दावे की कलई खोलता है जिसमें उसे जेल में होने की बात कही जाती है।
लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की जद्दोजहद
सईद की सुरक्षा में यह बदलाव उस समय हुआ है जब लश्कर-ए-तैयबा अपने टूटते हुए नेटवर्क को फिर से खड़ा करने की कोशिश में लगा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर के प्रमुख ट्रेनिंग केंद्रों में से एक, मुरीदके वाले सेंटर को निशाना बनाया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और बैठकों का दौर दोबारा शुरू करने की खबरें सामने आ रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हाफिज सईद 2024 के अंत तक व्यक्तिगत रूप से इन गतिविधियों में शामिल रहता था और निर्देश देता था, लेकिन अब सुरक्षा का घेरा इतना तगड़ा है कि वह बहुत ही सीमित तरीके से अपने कैडर से संपर्क साध पा रहा है। पाकिस्तान की यह छटपटाहट स्पष्ट करती है कि वह अपने सबसे बड़े मोहरे को हर हाल में बचाकर रखना चाहता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भी आतंकी नेटवर्क को कायम रखा जा सके।
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