इमरान खान का रातों-रात हुआ गुप्त अस्पताल ट्रांसफर
पाकिस्तान की सियासत में इन दिनों पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बिगड़ती सेहत और उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर भारी तनाव है। हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने एक बेहद गोपनीय और सुरक्षा से लैस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इसके तहत रावलपिंडी की अदियाला जेल में कैद इमरान खान को आधी रात के अंधेरे में चुपके से बाहर निकाला गया और इस्लामाबाद के एक अस्पताल ले जाया गया। इस पूरी प्रक्रिया को इतनी गोपनीयता से पूरा किया गया कि 21 अगस्त की सुबह होते ही उन्हें वापस जेल के सलाखों के पीछे भेज दिया गया। यह घटनाक्रम पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की सीधी अवहेलना है जिसमें अदालत ने इमरान खान को उनकी आंखों की गंभीर बीमारी और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सितंबर के मध्य तक अस्पताल में ही रखकर इलाज करने की स्पष्ट हिदायत दी थी।
800 सुरक्षा कर्मियों का पहरा और जैमर का इस्तेमाल
इस ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रावलपिंडी से इस्लामाबाद तक के रास्ते को पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए सरकार ने सैन्य तर्ज पर इंतज़ाम किए थे। सुरक्षा के मद्देनजर वहां एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड और पुलिस फोर्स के कुल 800 से अधिक जवानों को तैनात किया गया था। इस मिशन को सफल बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। मार्ग पर किसी भी प्रकार की जानकारी लीक न हो और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रियल-टाइम संचार न हो सके, इसके लिए बड़े पैमाने पर सिग्नल और फोन जैमर को एक्टिवेट किया गया था।
सीक्रेट रास्ते से अस्पताल में प्रवेश
मीडिया की नजरों से बचने और इमरान खान के मूवमेंट को गुप्त रखने के लिए प्रशासन ने कई हथकंडे अपनाए। कुछ चुनिंदा इलाकों में जानबूझकर स्ट्रीट लाइटें और अस्पताल परिसर की लाइटों को या तो बंद कर दिया गया या उनकी रोशनी बहुत कम कर दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, 73 साल के इमरान खान को अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से ले जाने के बजाय पिछले हिस्से के एक गुप्त रास्ते से अंदर ले जाया गया। इन तमाम इंतज़ामों का मकसद केवल यह था कि कोई भी बाहर वाला व्यक्ति या मीडिया का कैमरा उन तक न पहुंच सके।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बनाम सरकारी कार्रवाई
इस पूरे मामले में प्रशासनिक भ्रम की स्थिति भी देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि इमरान खान को एक निजी अस्पताल, शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया जाए। हालांकि, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बाद में सफाई देते हुए दावा किया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण इमरान खान को पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी PIMS ले जाया गया। वहां विशेषज्ञों के एक पैनल ने, जिसमें एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, एक हृदय रोग विशेषज्ञ और एक जनरल फिजिशियन शामिल थे, तेजी से उनकी मेडिकल जांच की। उन्हें इंजेक्शन दिए गए और इसके तुरंत बाद सरकार ने उन्हें मेडिकल तौर पर फिट घोषित करते हुए वापस जेल भेज दिया।
राजनीतिक बवाल और अदालती और PTI का कड़ा रुख
सरकार के इस कदम ने इमरान खान की राजनीतिक पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को बुरी तरह भड़का दिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने तीन घंटे के नाममात्र मेडिकल ट्रीटमेंट का दिखावा किया और अदालत के आदेश का अपमान किया है। PTI ने इस मामले में सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना की याचिका दायर करने की घोषणा की है। वहीं, इमरान खान की बहनों ने प्रांतीय मंत्रियों के साथ मिलकर अदियाला जेल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि उन्हें अपने भाई से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। परिवार को लगातार इस बात का डर सता रहा है कि इलाज में बरती जा रही लापरवाही के कारण इमरान खान की दाईं आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
जेल के पीछे का लंबा सफर और आरोप
इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों से लेकर पाकिस्तान सरकार की गोपनीय जानकारी लीक करने तक के आरोप लगाए गए हैं। इमरान और उनके समर्थकों का एक सुर में कहना है कि यह सब कुछ राजनीतिक बदला लेने की भावना से किया जा रहा है। PTI के दावे के अनुसार, सरकार जानबूझकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करना चाहती है। पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण इमरान खान की दाईं आंख की रोशनी घटकर महज 15 प्रतिशत रह गई है। जेल के बाहर लगातार होते विरोध प्रदर्शन और परिवार की चिंताएं, पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।
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