मानसिक स्वास्थ्य को हल्के में न लें
मौजूदा समय में लोगों के बीच डिप्रेशन यानी अवसाद की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। अक्सर लोग इसे केवल ओवरथिंकिंग यानी ज्यादा सोचने की समस्या मानकर टाल देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई गहरे और जटिल कारण छिपे हो सकते हैं। यह स्थिति केवल किसी एक वजह से पैदा नहीं होती, बल्कि इसके पीछे पारिवारिक परिवेश, लंबे समय से चला आ रहा तनाव, आनुवंशिक प्रभाव और कई अन्य मनोवैज्ञानिक कारक जिम्मेदार होते हैं।
बच्चों और किशोरों में डिप्रेशन के मुख्य कारण
अंबाला की होम्योपैथिक डॉक्टर रजिता ने इस गंभीर विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, बच्चों और किशोर उम्र के युवाओं में मानसिक परेशानी की जड़ें काफी गहरी हो सकती हैं। उन्होंने उन प्रमुख कारणों की सूची दी है जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं:
- घर का तनावपूर्ण माहौल और परिवार की कलह।
- माता-पिता के बीच लगातार होने वाले आपसी विवाद।
- पढ़ाई का अत्यधिक दबाव और परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने की चिंता।
- स्कूल या शिक्षण संस्थानों में बुलिंग का शिकार होना।
- जीवन में घटी कोई भी दर्दनाक या सदमे वाली घटना।
- परिवार में पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इतिहास होना।
क्यों खतरनाक है इसे नजरअंदाज करना?
डॉ. रजिता स्पष्ट करती हैं कि किसी भी मानसिक स्थिति को केवल यह कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए कि बच्चा या इंसान बस बहुत ज्यादा सोचता है। जब मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है, तो इसके लक्षण समय के साथ गंभीर होते जाते हैं। यदि इन समस्याओं को शुरुआत में ही पहचान लिया जाए और उचित मार्गदर्शन या चिकित्सा सहायता ली जाए, तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को बारीकी से देखें और उन्हें समझने का प्रयास करें।
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