पाकिस्तान में गहराता सियासी संकट, इमरान खान ने जताई मोहम्मद मुर्सी जैसी हत्या की आशंका

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी जान को खतरा बताते हुए मिस्त्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की तरह हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। उनकी बहन उजमा खान ने जेल में इमरान की बिगड़ती सेहत और मानसिक प्रताड़ना का हवाला देते हुए यह सनसनीखेज दावा किया है।

पाकिस्तान में बढ़ता सियासी ड्रामा और इमरान के दावे

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इन दिनों राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तानी सरकार ने उन्हें जेल से बाहर निकालकर एक अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के लिए भेजा था, जिसके बाद उन्हें वापस सलाखों के पीछे डाल दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच इमरान खान की बहन उजमा खान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए उजमा ने बताया कि इमरान खान को जेल में लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है और उनकी सेहत काफी खराब है, लेकिन कोई भी उनकी सुनवाई करने वाला नहीं है।

उजमा के अनुसार, इमरान खान ने उनसे बातचीत में अपनी जान को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। इमरान का मानना है कि उनकी हत्या मिस्त्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की तरह की जा सकती है। यह तुलना पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

अस्पताल और जेल के बीच की स्थिति

उजमा खान, जो पेशे से एक डॉक्टर हैं, ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इमरान खान को एक निजी अस्पताल 'शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल' ले जाया जाए। हालांकि, सरकार ने इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए उन्हें इस्लामाबाद के सरकारी अस्पताल 'पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' में भर्ती कराया। उजमा ने अपने भाई से मुलाकात के दौरान उनकी स्थिति का ब्योरा देते हुए बताया कि इमरान लगातार यह कह रहे थे कि वह बिल्कुल ठीक नहीं हैं।

उजमा के मुताबिक, पिछले 10 महीनों से इमरान खान को एकांत कारावास में रखा गया है। उन्हें न तो किताबें पढ़ने को दी जा रही हैं और न ही किसी बाहरी व्यक्ति से संपर्क करने की अनुमति है। उन्हें उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है और उन्हें किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सहायता या मानवाधिकार से वंचित रखकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

कौन थे मोहम्मद मुर्सी और उनकी मौत का रहस्य

इमरान खान द्वारा मोहम्मद मुर्सी का नाम लिए जाने के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर मिस्त्र के इस नेता के साथ ऐसा क्या हुआ था। मोहम्मद मुर्सी का नाम मिस्त्र के आधुनिक इतिहास के पन्नों में सबसे विवादास्पद रहा है। एक इंजीनियर से राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाले मुर्सी की मौत जेल में बेहद रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी।

वह घटना 17 जून 2019 की है, जब काहिरा की एक अदालत में सुनवाई के दौरान मुर्सी की मृत्यु हो गई थी। उस समय वह 67 वर्ष के थे। वे कोर्ट रूम में बने कांच के साउंडप्रूफ कटघरे के अंदर थे, तभी अचानक गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी।

साजिश की आशंका या प्राकृतिक मौत

मुर्सी की मृत्यु के बाद उनके परिवार और समर्थकों ने इसे केवल एक सामान्य मौत मानने से इनकार कर दिया था। मानवाधिकार संगठनों ने उनकी मौत से कई साल पहले ही चेतावनी दी थी कि जेल के हालात मुर्सी की जान लेने के लिए काफी हैं। उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियां थीं, बावजूद इसके उन्हें जरूरी दवाइयां नहीं दी जाती थीं।

उनकी मृत्यु पर साजिश के कई सिद्धांत सामने आए। मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े समर्थकों, तुर्की और कतर जैसे देशों ने इसे एक नियोजित हत्या या सरकारी स्तर पर की गई मेडिकल लापरवाही करार दिया था। इंटरनेट पर भी ऐसी थ्योरी खूब चर्चा में रही कि उनकी मौत का समय जानबूझकर इस तरह तय किया गया था ताकि मिस्त्र में चल रहे बड़े आयोजनों के दौरान किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन को दबाया जा सके।

मुर्सी और इमरान की समान स्थितियां

इमरान खान के जेल के हालातों को मुर्सी की स्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। मौत से कई महीने पहले मुर्सी के बेटे अब्दुल्ला ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बताया था कि उनके पिता को जेल में अलग-थलग रखा गया है और उन्हें इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। अब्दुल्ला का आरोप था कि प्रशासन उन्हें तिल-तिल कर मारना चाहता है ताकि उनकी मृत्यु प्राकृतिक लगे। मिस्त्र सरकार ने इन तमाम आरोपों को खारिज करते हुए इसे केवल एक मेडिकल इमरजेंसी बताया था।

मुर्सी का उदय और पतन

मोहम्मद मुर्सी एक प्रोफेसर और इंजीनियर थे जो मुस्लिम ब्रदरहुड के सक्रिय सदस्य रहे। 2011 में हुई 'अरब स्प्रिंग' क्रांति के कारण तत्कालीन राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को पद से हटना पड़ा। इसके बाद 2012 में मिस्त्र में पहली बार लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हुए, जिसमें मुर्सी ने जीत हासिल की।

हालांकि, उनका एक साल का कार्यकाल विवादों में रहा। उन पर आर्थिक कुप्रबंधन, तानाशाही और बिना सहमति के इस्लामी मूल्यों वाला संविधान थोपने के गंभीर आरोप लगे। अंततः, 3 जुलाई 2013 को सेना प्रमुख अब्देल फतह अल-सीसी के नेतृत्व में हुए तख्तापलट के बाद उन्हें सत्ता से हटा दिया गया। गिरफ्तारी के बाद उन पर जासूसी, राज्य के रहस्यों को साझा करने और जेल तोड़ने जैसे कई गंभीर मामले चलाए गए थे।

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