मानसून और मुर्गी पालन की चुनौतियां
मानसून का आगमन होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए चुनौतियां बढ़ जाती हैं। लगातार बारिश के चलते पॉल्ट्री शेड के भीतर नमी और गीलेपन का स्तर बढ़ जाता है, जो मुर्गियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि बारिश का पानी शेड के अंदर आ जाए, तो मुर्गियों के बीमार पड़ने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि सही समय पर साफ-सफाई न की जाए और मुर्गियों को गीले फर्श पर रखा जाए, तो संक्रमण एक मुर्गी से शुरू होकर पूरे झुंड को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है, इसलिए रखरखाव में जरा सी भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
पशु चिकित्सक की सलाह और शेड का प्रबंधन
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार, बरसात में शेड को सूखा रखना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। मुर्गियों को किसी भी परिस्थिति में गीली जगह पर नहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने शेड के रखरखाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- शेड में हर दो से तीन दिन के अंतराल पर चूने का छिड़काव करना अनिवार्य है।
- गीली मिट्टी और मुर्गियों की बीट के मिलने से अमोनिया गैस पैदा होती है, जो मुर्गियों के श्वसन तंत्र पर बुरा असर डालती है। इसके संपर्क में आने से मुर्गियों की मृत्यु दर में भारी वृद्धि हो सकती है।
- शेड के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि जलभराव कीटाणुओं के पनपने का मुख्य केंद्र बनता है।
रानीखेत बीमारी का खतरा और उसके लक्षण
डॉ. सोरेन ने चेतावनी दी है कि बरसात के दिनों में 'रानीखेत' नामक गंभीर संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसके साथ ही, नमी और अस्वच्छ वातावरण के कारण सांस लेने में दिक्कत, दस्त और अन्य वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। यदि मुर्गियों में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो सतर्क हो जाना चाहिए:
- मुर्गियों का अचानक सुस्त हो जाना और उनके दाना-पानी ग्रहण करने की क्षमता में कमी आना।
- सांस लेने में कठिनाई महसूस करना या सांस लेते समय गले से गड़गड़ाहट जैसी आवाज आना।
- अंडे देने वाली मुर्गियों के उत्पादन में अचानक से बहुत अधिक गिरावट आना।
शेड का रखरखाव और खान-पान संबंधी सावधानियां
मुर्गियों को स्वस्थ रखने के लिए उनके रहने की जगह और खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। शेड हमेशा हवादार होना चाहिए ताकि ताजी हवा का संचार बना रहे। यदि फर्श पर बिछाया गया कुट्टा या भुसी गीली हो जाए, तो उसे तुरंत हटाकर सूखा बिछावन डालना चाहिए। मुर्गियों को हमेशा साफ पानी उपलब्ध कराएं और पानी पीने वाले बर्तनों को रोजाना अच्छी तरह धोएं। इसके अलावा, दाने को फफूंद और नमी से बचाकर रखें; कभी भी गीला या फफूंद लगा हुआ दाना न खिलाएं, क्योंकि यह बीमारियों का बड़ा कारण बनता है।
संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी कदम
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सतर्कता बहुत आवश्यक है। यदि किसी मुर्गी में बीमारी का कोई भी लक्षण नजर आए, तो उसे तुरंत बाकी स्वस्थ मुर्गियों से अलग कर देना चाहिए। बाहर से खरीदी गई नई मुर्गियों को सीधे पुराने झुंड में शामिल करने की गलती न करें, बल्कि उन्हें कुछ दिनों के लिए क्वारंटीन में रखकर उनकी सेहत की निगरानी करें। रानीखेत और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है, इसलिए मुर्गियों का उम्र के अनुसार वैक्सीनेशन जरूर करवाएं। यदि अचानक झुंड में मुर्गियों की मौत होने लगे या बीमारी का प्रकोप बढ़ जाए, तो खुद से दवा देने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक या संबंधित पशुपालन विभाग से सलाह लें।
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/tips-and-tricks-poultry-farming-tips-in-monsoon-special-advice-to-prevent-diseases-guide-local18-ws-l-10770906.html