भारत-नेपाल सीमा पर ड्रोन से होगी निगरानी, दसगजा इलाके में अतिक्रमण की पहचान के लिए बड़ा कदम

भारत और नेपाल ने अपनी साझा सीमा पर दसगजा क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण का पता लगाने के लिए ड्रोन मैपिंग का सहारा लेने का निर्णय लिया है। यह फैसला सीमा विवादों को तकनीकी तरीके से सुलझाने की दिशा में उठाया गया है।

ड्रोन से नापी जाएगी सीमा

भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित दसगजा क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए दोनों देशों ने एक संयुक्त तकनीकी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत अब ड्रोन मैपिंग के जरिए सीमावर्ती जमीन की सही स्थिति का पता लगाया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमा के आर-पार हो रहे जमीन के अनधिकृत उपयोग का सही रिकॉर्ड तैयार करना है ताकि विवाद की स्थिति में सटीक जानकारी उपलब्ध रहे।

बालेन शाह के बयान के बाद बढ़ी सक्रियता

सीमा पर इस नई कवायद की चर्चा नेपाल के बालेन शाह द्वारा दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुई। बालेन शाह ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि नेपाल की ओर से भी भारतीय सीमा क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया है। उनके इस बयान ने राजनयिक हलकों में हलचल पैदा कर दी थी, जिसके बाद नेपाल सरकार ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह साफ किया कि उनका इशारा मुख्य रूप से दसगजा और सीमा पार भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों की ओर था।

तकनीकी रिकॉर्ड से मिलेगा समाधान

ड्रोन सर्वे के माध्यम से जुटाए गए डेटा से दोनों देशों को एक संयुक्त तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने में मदद मिलेगी। इस प्रक्रिया के कुछ महत्वपूर्ण पहलू निम्नलिखित हैं:

  • प्रभावित क्षेत्रों की सटीक मैपिंग और भौगोलिक स्थिति का आकलन।
  • सीमा पार जमीन के उपयोग का आधिकारिक और ठोस रिकॉर्ड बनाना।
  • भविष्य में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को कानूनी आधार प्रदान करना।
  • जमीन बहाली और मुआवजे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत को सरल बनाना।

इस तकनीकी सहयोग से भारत और नेपाल सीमा पर मौजूद अनिश्चितताओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। ड्रोन मैपिंग के जरिए डेटा का मिलान होने से भविष्य में दोनों पक्षों को सीमा रेखाओं को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम या विवाद को निपटाने में अधिक स्पष्टता मिलेगी।

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