शाही खानदान का हिस्सा बना एक आम सेल्समैन
बेल्जियम में इन दिनों एक युवा की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। 26 साल का एक युवक जो अब तक कारों की बिक्री का काम किया करता था, अब आधिकारिक तौर पर बेल्जियम के शाही परिवार का हिस्सा बन चुका है। DNA टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वह प्रिंस लॉरेंट का ही बेटा है। शाही परिवार ने उसे अपनी कानूनी पहचान दे दी है और उसे प्रिंस लॉरेंट के पुत्र के रूप में मान्यता मिल गई है। इस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी हाल ही में एक नागरिक समारोह के बाद सामने आई, जिसमें खुद प्रिंस लॉरेंट ने क्लेमेंट वैंडेनकेर्कहोव को अपना बेटा होने की बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।
पत्रिका ने खोला राज का पर्दा
इस बड़े खुलासे का श्रेय बेल्जियम की साप्ताहिक पत्रिका Soir Mag को जाता है, जिसने सबसे पहले इस घटना को दुनिया के सामने रखा। कानूनी रूप से बेटा माने जाने के बाद अब भविष्य में क्लेमेंट को अपने पिता की संपत्ति में अन्य बच्चों के समान ही अधिकार मिलने की पूरी संभावना है। हालांकि, क्लेमेंट का नजरिया इसे लेकर काफी अलग है। उनका मानना है कि कानूनी कागजात या आर्थिक लाभ से कहीं ज्यादा जरूरी उनके लिए यह था कि उन्हें अपने जैविक पिता को करीब से जानने का मौका मिला। क्लेमेंट का जन्म साल 2000 में हुआ था और उनकी मां मॉडल और गायिका वेंडी वान वांटेन हैं। लंबे समय तक उनके वास्तविक पिता को लेकर सार्वजनिक जीवन में तमाम अटकलें लगाई जाती रही थीं, जो अब पूरी तरह शांत हो गई हैं।
पिता से मिलता है चेहरा, बचपन रहा उलझनों भरा
लोगों का ध्यान इस ओर भी गया है कि क्लेमेंट का चेहरा काफी हद तक प्रिंस लॉरेंट से मिलता-जुलता है। इतना ही नहीं, उनके नाम को भी प्रिंस के टेरवुरेन स्थित घर ‘विला क्लेमेंटाइन’ से जोड़कर देखा जाता था। क्लेमेंट की मां ने भी समय-समय पर अपने संगीत के माध्यम से इस रिश्ते की ओर संकेत दिए थे। प्रिंस लॉरेंट ने पिछले वर्ष ही इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा था कि उन्होंने क्लेमेंट के साथ पिछले कुछ वर्षों में बहुत ईमानदारी और खुलापन के साथ बातचीत की है। क्लेमेंट के लिए यह सच्चाई 16 साल की उम्र में सामने आ गई थी कि प्रिंस लॉरेंट ही उनके पिता हैं, लेकिन उस समय उन्होंने कोई जल्दबाजी नहीं की। आखिरकार 20 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार अपने पिता से संपर्क साधा। फ्लेमिश अखबार Het Nieuwsblad के साथ अपनी बातचीत में क्लेमेंट ने बताया कि बचपन का पूरा समय इस रहस्य की उलझन में बीता कि उनके पिता कौन हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई जानने के बाद इस राज को छिपाए रखना उनके लिए बहुत बोझिल हो गया था।
नाम बदलने से किया इनकार
शाही परिवार में आधिकारिक दर्जा मिलने के बाद भी क्लेमेंट ने अपने पुराने नाम को ही बरकरार रखने का फैसला किया है। वे शाही कुल का नाम ‘सैक्स-कोबर्ग’ अपने साथ नहीं जोड़ना चाहते। क्लेमेंट ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें अपने नाम वैंडेनकेर्कहोव पर गर्व है और इसे छोड़ना उस संघर्ष का अपमान होगा जो उनकी मां ने उनके लिए किया है। प्रिंस लॉरेंट ने साल 2003 में प्रिंसेस क्लेयर ऑफ बेल्जियम से विवाह किया था और उनके पहले से तीन बच्चे हैं।
शाही विवादों का पुराना इतिहास
बेल्जियम के राजपरिवार के लिए यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2020 में भी किंग अल्बर्ट द्वितीय ने अपनी बेटी को अधिकारिक मान्यता दी थी, जिन्हें अब प्रिंस डेल्फीन के नाम से जाना जाता है। डेल्फीन को भी एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपनी पहचान मिली थी। उस समय किंग अल्बर्ट द्वितीय साल 2013 में सिंहासन छोड़ने के बाद एक बड़े पितृत्व विवाद में फंस गए थे। बहरहाल, क्लेमेंट की यह कहानी अब एक मिसाल बन गई है, जिसमें एक साधारण कार विक्रेता ने अपनी जड़ों की तलाश में अंततः शाही सम्मान हासिल कर लिया।
https://www.indiatv.in/world/europe/dna-test-changes-car-salesman-life-belgium-prince-laurent-officially-recognizes-son-clement-vandenkerckhove-2026-08-21-1238633