आमतौर पर चिकित्सा क्षेत्र यानी मेडिकल में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्र दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं ताकि उन्हें NEET जैसी देश की सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा में एक अच्छी रैंक मिल सके। एक-एक नंबर के लिए कड़ा संघर्ष करने वाले इन लाखों अभ्यर्थियों के बीच एक ऐसा छात्र भी सामने आया है जिसने सफलता के शिखर पर पहुंचकर सबको चौंका दिया। हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के रहने वाले मेधावी छात्र सब्यसाची लस्कर की। सब्यसाची ने NEET UG परीक्षा में देश भर में 35वीं रैंक (AIR 35) हासिल की है। इतनी बेहतरीन रैंक होने के बावजूद उन्होंने डॉक्टर बनने का बेहद आकर्षक और सुनहरा अवसर छोड़ दिया। उन्होंने देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान AIIMS दिल्ली में MBBS की सीट छोड़कर IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग करने का विकल्प चुना है।
एमबीबीएस की सीट से कहीं ज्यादा मजबूत था इंजीनियरिंग का जुनून
हर साल लाखों छात्र देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की एक सीट के लिए तरसते हैं। वे सालों तक कोचिंग करते हैं और कड़ी मेहनत के बाद भी कई बार मनचाहा कॉलेज नहीं मिल पाता। ऐसे में जब सब्यसाची लस्कर ने NEET UG में AIR 35 प्राप्त की, तो उनके पास देश के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कॉलेजों के द्वार खुले हुए थे। पश्चिम बंगाल में पहली रैंक हासिल करने के कारण राज्य स्तर पर भी उनका जबरदस्त दबदबा था। आंकड़ों के अनुसार, NEET परीक्षा के शीर्ष 51 रैंक हासिल करने वाले छात्रों को आमतौर पर AIIMS दिल्ली में दाखिला मिलता है। इस लिहाज से सब्यसाची के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में जाना बेहद आसान था। लेकिन उन्होंने इस पारंपरिक रास्ते को छोड़ दिया और अपनी रुचि को प्राथमिकता दी।
गणित, रिसर्च और टेक्नोलॉजी के प्रति बचपन का झुकाव
सब्यसाची लस्कर के इस फैसले के पीछे उनकी बचपन से चली आ रही रुचि है। उनका मन हमेशा से गणित, रिसर्च और आधुनिक तकनीक की दुनिया में रमता था। मेडिकल की तैयारी के दौरान भी उनका यह प्रेम कम नहीं हुआ। उन्होंने न केवल NEET की परीक्षा दी, बल्कि देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। JEE परीक्षा में उनके शानदार प्रदर्शन के बल पर उन्हें देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर में दाखिला मिल गया। यहाँ उन्होंने सबसे लोकप्रिय और मांग वाली ब्रांच कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग को चुना है। उनका मानना है कि पढ़ाई और करियर वही होना चाहिए जिसमें छात्र का मन सबसे ज्यादा लगता हो, न कि वह जो समाज में सबसे ज्यादा चर्चित हो।
सामाजिक दबाव को पछाड़कर चुनी अपनी राह
हमारे समाज में अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्तों के दबाव में आकर छात्र ऐसे विषयों को चुन लेते हैं जो उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं होते। कई बार शानदार रैंक आने के बाद छात्र केवल इसलिए मेडिकल या इंजीनियरिंग चुन लेते हैं क्योंकि लोग ऐसा चाहते हैं। लेकिन सब्यसाची ने इस भेड़चाल का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने साबित किया कि परीक्षा में अव्वल आना अपनी योग्यता साबित करना है, लेकिन अपने करियर की दिशा खुद तय करना असली बुद्धिमत्ता है। उनका यह साहसी कदम आज के उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो करियर के दोराहे पर खड़े होकर दूसरों के दबाव में गलत निर्णय ले लेते हैं।
माता-पिता के अटूट भरोसे ने दी ताकत
इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित सीट को ठुकराना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता। जब कोई छात्र NEET में AIR 35 लाकर डॉक्टरी छोड़ने की बात कहे, तो अमूमन परिवार वाले चिंता में पड़ जाते हैं। लेकिन सब्यसाची के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उनके माता-पिता ने उनके इस साहसी फैसले का पूरा समर्थन किया। उन्होंने सब्यसाची की रुचि और उनके सपनों का सम्मान किया और उन्हें अपनी पसंद की राह पर आगे बढ़ने की पूरी आजादी दी। यही कारण है कि सब्यसाची आज बिना किसी पछतावे के IIT खड़गपुर में अपनी नई यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं।
देशभर के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा
सब्यसाची लस्कर की यह कहानी केवल एक परीक्षा की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह अपने सपनों को जीने और खुद पर विश्वास रखने की कहानी है। सोशल मीडिया और विभिन्न शैक्षणिक हलकों में सब्यसाची के इस फैसले की जमकर सराहना हो रही है। लोग उनकी इस बात के लिए प्रशंसा कर रहे हैं कि उन्होंने दिखावे की दुनिया से दूर रहकर अपनी वास्तविक रुचि को पहचाना। यह कहानी हमें सिखाती है कि:
- अपनी रुचि और क्षमता को पहचानना किसी भी परीक्षा की रैंक से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- सफलता की परिभाषा केवल एक पारंपरिक डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना है।
- करियर के फैसलों में परिवार का वैचारिक और भावनात्मक समर्थन बेहद जरूरी होता है।
सब्यसाची लस्कर का यह साहसिक कदम आने वाले समय में कई अन्य छात्रों को भी अपने दिल की सुनने और समाज के बंधनों को तोड़कर अपनी मनपसंद राह चुनने के लिए प्रेरित करेगा।
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