भारत में आस्था और चमत्कारों से जुड़े कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी कहानियां लोगों को हैरत में डाल देती हैं। ऐसा ही एक अनोखा और रहस्यमयी मंदिर तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के रेजिंथल गांव में स्थित है। इस प्राचीन देवस्थान को लोग सिद्धि विनायक मंदिर के नाम से पूजते हैं। यह मंदिर अपनी एक बेहद खास और विस्मयकारी मान्यता के कारण देश भर के श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
हर साल बढ़ता है गणपति की मूर्ति का आकार
इस सिद्धि विनायक मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां विराजमान भगवान गणेश की स्वयंभू प्रतिमा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित बप्पा की मूर्ति का आकार समय के साथ लगातार बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि यह चमत्कारी प्रतिमा हर साल तिल या राई के दाने जितनी बढ़ जाती है।
बताया जाता है कि लगभग 200 वर्ष पहले यह प्रतिमा जमीन से एक बेहद छोटी शिला के रूप में प्रकट हुई थी। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ इसके आकार में लगातार वृद्धि होती गई और आज यह विशाल प्रतिमा लगभग 6.5 फीट ऊंची हो चुकी है। इस निरंतर बढ़ते आकार को देखकर लोग इसे बप्पा का साक्षात चमत्कार मानते हैं।
दक्षिणमुखी प्रतिमा का विशेष धार्मिक महत्व
इस मंदिर में स्थापित विघ्नहर्ता की प्रतिमा दक्षिणमुखी है। हिंदू धर्म शास्त्रों में दक्षिणमुखी गणेश प्रतिमा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है, जो भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूरी करने के लिए जानी जाती है। इस अलौकिक प्रतिमा और इसके निरंतर बढ़ते स्वरूप से जुड़ी रहस्यमयी बातें श्रद्धालुओं के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करती हैं।
वैसे तो यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन गणेश चतुर्थी और अंगारक चतुर्थी के विशेष अवसरों पर यहां का नजारा बेहद दर्शनीय होता है। इन पावन तिथियों पर भगवान गणेश के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु इस पवित्र धाम में पहुंचते हैं।
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