64 की उम्र में एमटेक की सफलता और अब IIM लखनऊ की तैयारी: एक पिता के जज्बे को देख दंग रह गए लोग

उत्तर प्रदेश में डिप्टी सीईओ के पद पर कार्यरत 64 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक ने कड़ी मेहनत और व्यस्त दिनचर्या के बीच एमटेक की परीक्षा टॉप 10 में पास कर एक मिसाल कायम की है। अब वे IIM लखनऊ से एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम करने की तैयारी कर रहे हैं।

सीखने की कोई उम्र नहीं होती

अक्सर लोग 60 या 64 साल की उम्र में रिटायरमेंट के बाद आरामदायक जीवन जीने और आराम करने के बारे में विचार करते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के एक 64 वर्षीय डिप्टी सीईओ ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। उन्होंने न केवल एमटेक जैसी कठिन पढ़ाई पूरी की, बल्कि अपनी क्लास के टॉप 10 मेधावी छात्रों में भी जगह बनाई। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके साथ पढ़ाई करने वाले अधिकांश छात्र उनकी उम्र से आधे थे। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और सीखने की तीव्र इच्छा हो, तो उम्र की सीमाएं कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनतीं।

काम का बोझ और जिम्मेदारी के साथ पढ़ाई

यह कहानी किसी ऐसे सेवानिवृत्त व्यक्ति की नहीं है जिसके पास ढेर सारा खाली समय मौजूद हो। शशांक श्रीवास्तव नामक व्यक्ति ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पिता की इस अद्भुत यात्रा को दुनिया के साथ साझा किया है। उनके पिता वर्ष 2022 में आधिकारिक रूप से रिटायर हो चुके थे, लेकिन उसके बाद भी वे उत्तर प्रदेश में नगर निगमों की देखरेख करने वाली रेगुलेटरी बॉडी में डिप्टी सीईओ के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी का भारी दबाव, दिन-रात की भागदौड़ और आधिकारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने एमटेक की डिग्री हासिल की है। जब उनके बेटे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की, तो यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और लोग इस बुजुर्ग के हौसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

सफर के दौरान तैयार किए नोट्स

पढ़ाई के लिए समय निकालना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। शशांक ने बताया कि उनके पिता अपनी ड्यूटी के सिलसिले में हर हफ्ते लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। उन्हें अक्सर अलग-अलग जिलों का दौरा करना पड़ता है ताकि वे धरातल पर काम की गुणवत्ता का जायजा ले सकें। इतने व्यस्त शेड्यूल के बीच जब भी उन्हें कार में यात्रा के दौरान थोड़ा समय मिलता, वे अपने नोट्स तैयार करते और पढ़ाई में जुट जाते थे। उनकी तैयारी का स्तर इतना शानदार था कि उन्होंने उन युवाओं को भी पीछे छोड़ दिया, जिनका जन्म शायद उनके पिता के करियर के पहले प्रमोशन के बाद हुआ होगा।

लगातार खुद को अपडेट रखने की सीख

जीवन की आपाधापी में अक्सर लोग नई चीजें सीखना छोड़ देते हैं और समय के साथ खुद को अपडेट रखना अपनी प्राथमिकताओं की सूची से हटा देते हैं। बहुत से लोग जब तक इस बात को समझते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन इस व्यक्ति ने 40 की उम्र में, 60 की उम्र में और आज 64 साल की उम्र में भी सीखने के प्रति अपने दृष्टिकोण को कभी कम नहीं होने दिया। वे हमेशा तकनीक और बदलते समय के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ते रहे हैं, जो आज की पीढ़ी के लिए एक बड़ा सबक है।

अब लक्ष्य है IIM लखनऊ

एमटेक में सफलता हासिल करने के बाद भी उनका सफर यहां खत्म नहीं होने वाला है। उनकी महत्वाकांक्षाएं अभी भी जीवित हैं और अब उनकी अगली मंजिल IIM लखनऊ का एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम है। जिस उम्र में अधिकतर लोग जीवन के नए लक्ष्य बनाना बंद कर देते हैं और भविष्य की चिंता में रहते हैं, उस उम्र में वे बड़े आत्मविश्वास के साथ आईआईएम लखनऊ में दाखिले के लिए आवेदन भर रहे हैं। उनका यह कदम उन लाखों लोगों के लिए एक करारा जवाब है, जो बढ़ती उम्र को अपनी असफलता या जिंदगी में ठहराव का बहाना बनाकर बैठ जाते हैं।

बेटे के लिए प्रेरणा के स्रोत

अपने पिता के इस अटूट जज्बे को देखकर उनके बेटे शशांक का कहना है कि यह उनके लिए बेहद संतोषजनक और सुकून देने वाला अहसास है। शशांक ने गर्व के साथ बताया कि जब उनके पिता के जीन उनके अंदर हैं, तो उन्हें खुद को आगे बढ़ाने और नई चीजें सीखने के लिए कभी भी बाहरी प्रेरणा की तलाश नहीं करनी पड़ेगी। यह कहानी सिखाती है कि उम्र वास्तव में केवल एक संख्या है। यदि मन में कुछ नया सीखने की ललक हो और कड़ी मेहनत करने का साहस हो, तो इंसान किसी भी पड़ाव पर नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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