पाकिस्तान: सोशल मीडिया पर सक्रिय महिलाओं के लिए जान का खतरा, शमसो से सना तक की हत्या ने खड़े किए सवाल

पाकिस्तान में महिला सोशल मीडिया क्रिएटर्स और टिकटॉकर्स के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में हुई शमसो बीबी की हत्या ने एक बार फिर देश में महिलाओं की सुरक्षा और ऑनलाइन आजादी पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

पाकिस्तान में महिला क्रिएटर्स के खिलाफ हिंसा का भयावह दौर

पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर सक्रिय महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पिछले कुछ समय में जिस तरह से महिला टिकटॉकर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को निशाना बनाया गया है, उसने समाज में महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक भयानक तस्वीर पेश की है। ताजा घटनाक्रम में, 14 अगस्त 2026 को 28 वर्षीय प्रसिद्ध टिकटॉक क्रिएटर शमसो बीबी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोग उन्हें आयशा गिलमाना के नाम से जानते थे। इस निर्मम हत्याकांड ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाली महिलाओं के लिए खतरा कितना गहरा हो चुका है।

लगातार हो रही हत्याओं की कड़ी

शमसो बीबी की हत्या कोई छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि यह एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। इसी तरह की हिंसा में बाइकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कोमल जान की भी जान ली जा चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में कई महिला टिकटॉकर्स को शारीरिक हिंसा का शिकार होना पड़ा है। यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है और हर नई घटना यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या पाकिस्तान में महिलाओं के लिए अपनी मर्जी से जीने या खुद को अभिव्यक्त करने की कोई जगह बची है।

सना यूसुफ और अन्य मामलों की यादें

शमसो की हत्या ने जून 2026 में हुई 17 वर्षीय टिकटॉक क्रिएटर सना यूसुफ की हत्या की खौफनाक यादों को ताजा कर दिया। सना की हत्या उनके इस्लामाबाद स्थित घर में ही कर दी गई थी। इस मामले में उमर हयात नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी लगातार सना पर संपर्क करने का दबाव बना रहा था और जब सना ने उसे नजरअंदाज किया, तो उसने इस खौफनाक कदम को अंजाम दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सना की मौत के बाद सोशल मीडिया के एक वर्ग ने विकृत मानसिकता दिखाते हुए पीड़ित की ही आलोचना शुरू कर दी और हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की।

परिवार और समाज की पितृसत्तात्मक जकड़न

सोशल मीडिया से जुड़ी महिलाओं के खिलाफ हिंसा सिर्फ बाहरी लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घरों के भीतर भी उतनी ही घातक है। जनवरी 2025 में क्वेटा की एक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जहां एक पिता ने अपनी ही बेटी को केवल इसलिए गोली मार दी क्योंकि उसने अपना टिकटॉक अकाउंट डिलीट करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके अलावा, पिछले साल कराची पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा जिसने अपनी ही परिवार की चार महिलाओं की हत्या कर दी थी। आरोपी का तर्क था कि ये महिलाएं जो टिकटॉक वीडियो बनाती हैं, वे 'अश्लील' हैं। इस तरह के 'ऑनर किलिंग' के मामले यह दर्शाते हैं कि महिलाओं की ऑनलाइन उपस्थिति को अक्सर उनके चरित्र और परिवार की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।

विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं की राय

इस पूरे मामले पर महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह समस्या किसी ऐप या प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। महिला अधिकार कार्यकर्ता फरजाना बारी का कहना है कि समस्या जड़ में है। जब भी कोई महिला अपने जीवन के निर्णय खुद लेती है या किसी पुरुष के वर्चस्व से बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ हिंसा की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह, महिलाओं के ऑनलाइन समूह की प्रमुख कनवल अहमद ने जोर देकर कहा कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की सनक नहीं है, बल्कि यह उस संस्कृति का हिस्सा है जिसमें महिलाओं को निरंतर भय के साये में जीने के लिए मजबूर किया जाता है।

ऑनलाइन नफरत और कंदील बलोच का मामला

महिला क्रिएटर्स को न केवल शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ता है, बल्कि सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार धमकियों और नफरत का भी शिकार बनाया जाता है। डिजिटल राइट्स फाउंडेशन ने जब सना यूसुफ के मामले में सोशल मीडिया टिप्पणियों का विश्लेषण किया, तो ऐसे हजारों कमेंट्स मिले जो न केवल हत्या की तारीफ कर रहे थे, बल्कि महिलाओं के सोशल मीडिया इस्तेमाल को ही उनकी हत्या का कारण बता रहे थे। पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ इस तरह की हिंसा की शुरुआत को अक्सर 2016 में सोशल मीडिया सेलिब्रिटी कंदील बलोच की उनके भाई द्वारा की गई हत्या से जोड़ा जाता है। उस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में महिलाओं की आजादी और तथाकथित 'इज्जत' के नाम पर होने वाली हिंसा के खिलाफ एक बड़ी बहस छेड़ दी थी, जो आज एक दशक बाद भी उतनी ही प्रासंगिक बनी हुई है।

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