बिहार के सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव
बिहार के आधारभूत संरचना यानी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा फैसला लिया गया है। बिहार सरकार की कैबिनेट ने राज्य के पश्चिमी छोर को पूर्वी छोर से जोड़ने के लिए एक विशाल सड़क परियोजना को अपनी स्वीकृति दे दी है। यह परियोजना 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित की जाएगी, जो बक्सर से शुरू होकर भागलपुर तक जाएगी। इस नए एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल बिहार के भीतर यातायात सुगम होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के रास्ते दिल्ली एनसीआर और बिहार के बीच की दूरी भी काफी कम हो जाएगी। यह निर्णय राज्य में औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से लिया गया है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत बक्सर में इसका जुड़ाव है। यह नया एक्सप्रेसवे बक्सर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ जाएगा। वर्तमान में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर तक संचालित है। दिल्ली से आने वाला यातायात यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हुए गाजीपुर तक पहुंचता है और वहां से इस नए कॉरिडोर के जरिए बिहार में प्रवेश करना बेहद आसान हो जाएगा। इस प्रकार दिल्ली एनसीआर से भागलपुर तक जाने वाले वाहनों के लिए एक निर्बाध और तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार हो सकेगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की भारी बचत होगी।
एक्सप्रेसवे की विशेषताएं और तकनीक
यह प्रस्तावित सड़क पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस पर सामान्य सड़कों की तरह कहीं भी चौराहे नहीं होंगे और न ही बीच में लोकल ट्रैफिक का हस्तक्षेप होगा। वाहन केवल तय किए गए इंटरचेंज से ही एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे या बाहर निकल सकेंगे। इस तकनीक से वाहनों को लगातार तेज गति से चलने में मदद मिलेगी और लंबी दूरी का सफर सुरक्षित व कम समय में पूरा होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट को पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जिसमें डीबीएफओटी (DBFOT) यानी डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर के नियमों का पालन किया जाएगा। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन इस परियोजना के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने हेतु तकनीकी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगा।
किन जिलों से होकर गुजरेगा यह मार्ग
यह 336 किलोमीटर लंबा मार्ग बिहार के कुल 12 जिलों को आपस में जोड़ेगा। बक्सर से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, लखीसराय, जमुई और बांका होते हुए अंत में भागलपुर पहुंचेगा। इस रूट का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह भारी आबादी वाले शहरों और कस्बों के मुख्य ट्रैफिक को बायपास कर देगा। अभी तक पुराने मार्गों पर घनी आबादी और जगह-जगह जाम के कारण लंबी दूरी के वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती थी, लेकिन इस नए ग्रीनफील्ड रूट के बनने से माल ढुलाई और यात्री वाहनों को सीधा रास्ता मिल सकेगा।
आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा नया आयाम
यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि बिहार में आर्थिक क्रांति लाने का एक माध्यम है। सरकार की योजना इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ औद्योगिक, कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा देने की है। सड़क के आसपास विशेष जोन की पहचान की जा रही है ताकि वहां उद्योग लग सकें और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों। जब इस सड़क के जरिए दिल्ली से भागलपुर का सफर आसान होगा, तो बिहार के इन 12 जिलों में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट की लागत में भी कमी आएगी।
परिवहन के नए युग की शुरुआत
कुल मिलाकर देखा जाए तो नोएडा, आगरा, लखनऊ और गाजीपुर को जोड़ने वाला मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क अब बक्सर के माध्यम से सीधे बिहार के भागलपुर से जुड़ जाएगा। इससे राज्य के पूर्वी हिस्से के लोगों के लिए राष्ट्रीय राजधानी तक की पहुंच बहुत तेज हो जाएगी। बिहार कैबिनेट का यह निर्णय राज्य को बेहतर कनेक्टिविटी के मामले में देश के अन्य हिस्सों के बराबर लाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को सड़कों पर बार-बार रुकने की समस्या से मुक्ति मिलेगी और यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।
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