उत्तर कोरिया का अमेरिका को करारा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कूटनीतिक धाक जमाने के लिए एक बड़ा दांव खेला, लेकिन उन्हें उत्तर कोरिया की तरफ से अपमानजनक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा है। ट्रंप ने प्योंगयांग के तानाशाह किम जोंग उन को खुश करने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ चल रहे सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' को अचानक छोटा करने का विवादास्पद फैसला लिया। हालांकि, उत्तर कोरिया ने इस कदम को पूरी तरह से नकार दिया। किम जोंग उन की ताकतवर बहन और शीर्ष अधिकारी किम यो जोंग ने ट्रंप की इस पहल को 'समय की बर्बादी' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य अभ्यास का दायरा घटाने से अमेरिका की आक्रामक नीतियों में कोई बदलाव नहीं आता।
ट्रंप का 'दोस्त-दोस्त' वाला पुराना राग
हैरानी की बात यह है कि उत्तर कोरिया से इस तरह की तीखी प्रतिक्रिया मिलने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप अपने पुराने रुख पर कायम हैं। अमेरिकी मीडिया के सामने ट्रंप लगातार किम जोंग उन के साथ अपनी 'पर्सनल केमिस्ट्री' और दोस्ती की बातें कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि किम जोंग उन के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं और यह एक सकारात्मक पहलू है। ट्रंप ने एक सार्वजनिक बयान में कहा, 'सच्चाई यह है कि मेरी और किम जोंग उन की बहुत अच्छी पटती है और यह एक बेहतरीन बात है।'
हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि किम जोंग उन के पास वर्तमान में 57 बेहद खतरनाक परमाणु हथियार मौजूद हैं। ट्रंप के शब्दों में, 'ऐसा कभी नहीं होने देना चाहिए था, लेकिन अब वे इसके मालिक हैं।' ट्रंप का दावा है कि वे किम जोंग उन को बहुत करीब से जानते हैं और जब तक अमेरिका का नेतृत्व कोई समझदार राष्ट्रपति कर रहा है, तब तक किम जोंग उन शांति बनाए रखेंगे। उन्होंने इशारों ही इशारों में यह भी जोड़ा कि यदि कोई कम समझदार व्यक्ति सत्ता में आता है, तो स्थितियां बदल सकती हैं।
सैन्य अभ्यास में कटौती का दांव
किम जोंग उन का दिल जीतने की कोशिश में ट्रंप ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी दक्षिण कोरिया को भी संकट में डाल दिया। राष्ट्रपति ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले बड़े सालाना सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' के समय और दायरा घटाने का एकतरफा आदेश दे दिया। ट्रंप को उम्मीद थी कि इस कदम से उत्तर कोरिया के शासन को एक सकारात्मक संकेत मिलेगा और बातचीत का रास्ता साफ होगा। लेकिन प्योंगयांग ने उनके इस पासे को महज एक ढोंग बताकर खारिज कर दिया।
किम यो जोंग का कड़ा पलटवार
ट्रंप के इस कूटनीतिक कदम पर उत्तर कोरिया की तरफ से आया जवाब बेहद तल्ख था। किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA के माध्यम से एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि इस कदम पर कोई भी टिप्पणी करना वक्त की सरासर बर्बादी है। हमारी इसमें जरा सी भी दिलचस्पी नहीं है।'
उन्होंने आगे कहा कि भले ही अमेरिका ने सैन्य अभ्यास की अवधि कम कर दी हो, लेकिन इससे उनके आक्रामक इरादों में कोई बदलाव नहीं आने वाला। उत्तर कोरियाई मीडिया ने इन अभ्यासों को 'पागलपन भरा' और 'बेहद खतरनाक' करार दिया है। प्योंगयांग ने साफ कर दिया कि वह अपनी आत्मरक्षा के लिए किसी भी अमेरिकी धमकी का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसे अमेरिका की इस दिखावटी शांति की कोई जरूरत नहीं है।
दक्षिण कोरिया की सुरक्षा चिंताएं
ट्रंप के इस अचानक लिए गए फैसले ने दक्षिण कोरिया को गहरी मुसीबत में डाल दिया है। पेंटागन को 11 दिनों के निर्धारित सैन्य अभ्यास को बीच में ही खत्म करने का हुक्म दिया गया। इस कारण अभ्यास को 27 अगस्त के बजाय इसी शुक्रवार को ही समाप्त कर दिया गया। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें इस बड़े फैसले की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, जिससे वहां भारी नाराजगी है।
सुरक्षा जानकारों का कहना है कि ट्रंप के इस कदम से दक्षिण कोरिया में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेना को अपने कई वास्तविक फील्ड ट्रेनिंग ऑपरेशन्स रद्द करने पड़े हैं और अब उन्हें केवल कंप्यूटर सिम्यूलेशन के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। इससे सैनिकों की वास्तविक युद्ध की तैयारी पर सीधा असर पड़ रहा है।
कमजोर होता अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन
वर्ष 1950 के दशक से चले आ रहे अमेरिका और दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक रक्षा गठबंधन पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य अभ्यासों में लगातार कटौती से दोनों देशों की साझा सैन्य क्षमता कमजोर हो रही है। नए सैन्य कमांडरों को आपातकालीन स्थितियों में तुरंत और सटीक फैसला लेने का अनुभव नहीं मिल पा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह के कदम उठाए हैं। वर्ष 2018 और 2019 में भी ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ समिट बैठकों की खातिर इन अभ्यासों को 'पैसों की बर्बादी' बताकर रोक दिया था। हालांकि, उस समय भी वह कूटनीति पूरी तरह विफल रही थी। उस समय अमेरिका उत्तर कोरिया पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने को तैयार नहीं था, जबकि उत्तर कोरिया अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने की शर्त मानने के लिए राजी नहीं था। आज स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि किम जोंग उन के पास 50 से अधिक परमाणु बम हैं और उन्हें रूस का भी रणनीतिक समर्थन प्राप्त है। ऐसे में ट्रंप का 'दोस्त-दोस्त' वाला राग उनके लिए कूटनीतिक विफलता का कारण बन रहा है।
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