सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शिफा अस्पताल
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच, शिफा इंटरनेशनल अस्पताल अचानक सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए इमरान खान को जेल से निकाल कर इस अस्पताल में भर्ती कराने और वहां उनका इलाज सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। अदालत ने खान की स्वास्थ्य स्थिति की गहन जांच के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने को भी कहा है। इस बोर्ड में फिजिशियन, सर्जन, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ और कार्डियोलॉजिस्ट जैसे वरिष्ठ डॉक्टरों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अमेरिका में शुरू हुई थी परिकल्पना
शिफा इंटरनेशनल अस्पताल का सफर साल 1985 में शुरू हुआ था। उस समय न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में कार्यरत पाकिस्तानी मूल के डॉक्टर जहीर अहमद ने अपने पांच अन्य साथियों के साथ पाकिस्तान में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का आधुनिक मेडिकल संस्थान बनाने का सपना देखा था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में वैश्विक मानकों के अनुरूप चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना था। इस विचार को मूर्त रूप देने के लिए, डॉ. जहीर अहमद ने अपनी इंटरनल मेडिसिन रेजीडेंसी पूरी करने के बाद 20 से 21 जुलाई 1985 को ब्रुकलिन में एक अहम बैठक बुलाई। उस बैठक में मौजूद सभी पांच स्वास्थ्य पेशेवरों ने अस्पताल बनाने के इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी।
इस्लामाबाद में अस्पताल की नींव
इस बड़े विजन को धरातल पर उतारने के लिए 17 दिसंबर 1985 को डॉ. जहीर अहमद इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने अस्पताल का नाम 'शिफा' रखा, जो न केवल इलाज का प्रतीक है बल्कि विश्वास और मानवीय मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत, शिफा इंटरनेशनल को 20 सितंबर 1987 को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया। बाद में विकास की राह पर चलते हुए इसे 12 अक्टूबर 1989 को एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित कर दिया गया। अस्पताल के निर्माण के लिए 1987 में इस्लामाबाद में 11 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसके बाद 6 अक्टूबर 1989 को अस्पताल का विधिवत शिलान्यास समारोह संपन्न हुआ। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 1993 में अस्पताल ने अपनी सेवाएं शुरू कीं। जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब यहां मात्र 8 ओपीडी क्लीनिक और 36 बेड की सुविधा थी। अस्पताल का पहला ओपीडी मरीज 26 जून 1993 को देखा गया था, जबकि अस्पताल में पहला भर्ती मरीज 25 सितंबर 1993 को आया था।
चिकित्सा क्षेत्र में शिफा की उपलब्धियां
समय के साथ, शिफा इंटरनेशनल ने खुद को पाकिस्तान के सबसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में स्थापित किया है। आज इस अस्पताल में 550 से अधिक बेड, 300 से अधिक डॉक्टर और 45 से अधिक मेडिकल एवं सर्जिकल स्पेशलिटीज उपलब्ध हैं। अस्पताल ने ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है। 30 अप्रैल 2012 को अस्पताल में पहला लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया था। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 तक यहां 1,000 से अधिक लिवर ट्रांसप्लांट किए जा चुके थे। इसके अलावा, यहां किडनी, बोन मैरो और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी भी नियमित रूप से की जाती हैं। अस्पताल की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे जॉइंट कमीशन इंटरनेशनल यानी JCI से मान्यता प्राप्त है और यह 1994 से पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर भी सूचीबद्ध है।
प्रमुख हस्तियों का उपचार और सामाजिक दायित्व
शिफा इंटरनेशनल में न केवल आम लोग बल्कि कई नामचीन हस्तियों का भी इलाज हुआ है। हाल के उदाहरणों में प्रसिद्ध पाकिस्तानी अभिनेता शाहिद हमीद का नाम शामिल है, जिन्हें गंभीर कैल्सीफिक एओर्टिक स्टेनोसिस की समस्या का सामना करना पड़ा था। अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. असाद अकबर खान की टीम ने अभिनेता का सफल ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट, जिसे TAVR/TAVI भी कहा जाता है, पूरा किया। इस सफल इलाज के बाद अभिनेता पूरी तरह स्वस्थ हो गए। अस्पताल केवल अमीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिफा फाउंडेशन के माध्यम से यह जरूरतमंद मरीजों को रियायती दरों पर या मुफ्त इलाज भी मुहैया कराता है। 1991 में स्थापित शिफा फाउंडेशन चिकित्सा के साथ-साथ आपदा राहत और शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर सक्रिय है।
निष्कर्ष
सेक्टर एच-8/4 में स्थित यह अस्पताल आज न केवल पाकिस्तान बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जाना-माना मेडिकल सेंटर बन चुका है। 1985 में कुछ डॉक्टरों द्वारा देखे गए एक छोटे से सपने से शुरू होकर आज यह संस्थान 550 बेड और अत्याधुनिक तकनीक के साथ देश के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिफा इंटरनेशनल में इमरान खान का इलाज किस तरह आगे बढ़ता है।
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