मिसाइल भंडार खाली होने की चिंता, अमेरिका 23 अरब डॉलर खर्च कर दोबारा भर रहा है अपना जखीरा

ईरान और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण अमेरिका के रक्षा हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है, जिसके चलते डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने उत्पादन बढ़ाने के लिए 23 अरब डॉलर का भारी बजट आवंटित किया है।

अमेरिका का रक्षा बजट और हथियारों की बढ़ती मांग

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपने प्रसिद्ध आर्सेनल ऑफ फ्रीडम यानी स्वतंत्रता के शस्त्रागार को फिर से भरने और मिसाइल उत्पादन में तेजी लाने के उद्देश्य से 23 अरब डॉलर का बड़ा बजट जारी करने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों और यूक्रेन में लगातार जारी संघर्ष के कारण अमेरिका के मिसाइल भंडार में भारी कमी देखी जा रही है। इन दोनों मोर्चों पर मिसाइलों की मांग बढ़ने के कारण अमेरिका के पास मौजूद हथियारों का जखीरा कम पड़ता जा रहा है, जिसकी भरपाई करना अब सरकार की प्राथमिकता बन गई है।

टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों पर विशेष निवेश

अमेरिकी प्रशासन टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के निर्माण के लिए 22.9 अरब डॉलर का बड़ा फंड खर्च करने की तैयारी कर रहा है। टॉमहॉक मिसाइलें अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें मानी जाती हैं, जिन्हें समुद्र में तैनात युद्धपोतों और पनडुब्बियों से आसानी से लॉन्च किया जा सकता है। ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण अभियानों में इन मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है, जिसने अमेरिकी भंडार पर गहरा दबाव बना दिया है। अब अमेरिका इन मिसाइलों का नया स्टॉक तैयार कर अपनी सैन्य ताकत को पुनः सुरक्षित करना चाहता है।

रक्षा प्रणालियों का उत्पादन और विस्तार

केवल हमला करने वाली मिसाइलों तक ही सीमित न रहते हुए, अमेरिका अपनी एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन को भी तीव्र गति दे रहा है। इसमें मुख्य रूप से दो प्रकार की मिसाइलें शामिल हैं:

  • PAC-3 MSE इंटरसेप्टर: इसका उपयोग दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराने के लिए किया जाता है।
  • SM-3 इंटरसेप्टर: यह अमेरिका की मिसाइल डिफेंस प्रणाली का एक अभिन्न और अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इन हथियारों का निर्माण बढ़ाना अमेरिका की भविष्य की रक्षा रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है ताकि किसी भी अनपेक्षित हमले को विफल किया जा सके।

दो मोर्चों पर युद्ध का दबाव

वर्तमान में अमेरिकी मिसाइल उद्योग को दो तरफा दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ यूक्रेन को रूसी मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए निरंतर एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति की जा रही है। दूसरी तरफ मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियानों ने इन हथियारों की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। इस दोहरे मोर्चे ने अमेरिकी रक्षा उत्पादन क्षमता के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जहाँ एक साथ दोनों क्षेत्रों की मांगों को पूरा करना अनिवार्य हो गया है।

आधुनिक युद्ध और मिसाइल खपत की चुनौती

आधुनिक दौर के युद्धों में मिसाइलों की खपत बहुत तेज गति से होती है। एक बड़े सैन्य अभियान के दौरान कुछ ही समय के अंतराल में हजारों मिसाइलों और इंटरसेप्टर का उपयोग हो जाता है। बड़ी समस्या यह है कि इन अत्याधुनिक मिसाइलों का निर्माण रातोंरात संभव नहीं है। इन्हें तैयार करने के लिए विशेष कारखानों, जटिल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, इंजनों, सेंसरों और उच्च प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। अमेरिका अब केवल मौजूदा युद्ध की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास नहीं कर रहा है, बल्कि भविष्य में किसी भी लंबे युद्ध के लिए अपने हथियार भंडार को सुरक्षित रखने की दूरगामी योजना बना रहा है।

क्या अमेरिका अपनी सैन्य साख बनाए रख पाएगा?

अमेरिकी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल फंड या बजट की नहीं है, बल्कि वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या उनका रक्षा उद्योग इतनी तेजी से उत्पादन कर सकता है कि इस्तेमाल हो रही मिसाइलों की जगह लगातार नया स्टॉक आता रहे? यूक्रेन संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में हथियारों की खपत की गति कितनी अधिक होती है। ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों में हथियारों का सीमित भंडार एक बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। इसीलिए अब अमेरिका आर्सेनल ऑफ फ्रीडम के नाम से अपनी हथियारों की ताकत को दोबारा मजबूत और आधुनिक बनाने की प्रक्रिया में पूरी तरह से जुट गया है।

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