पाकिस्तान में महिला क्रिएटर्स के लिए खौफ का साया, 13 लाख फॉलोअर्स वाली टिकटॉकर की बेरहमी से हत्या

पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर सक्रिय महिला कंटेंट क्रिएटर्स की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि हाल ही में एक और लोकप्रिय टिकटॉकर की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई है।

पाकिस्तान में महिला क्रिएटर्स की सुरक्षा पर संकट

पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाली महिला क्रिएटर्स एक के बाद एक बर्बरता का शिकार हो रही हैं। हाल ही में घटित एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, जिसमें 13 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाली टिकटॉक स्टार शामसो बीबी को मौत के घाट उतार दिया गया। शामसो बीबी, जिन्हें उनके डिजिटल प्रशंसक आयशा गिलमाना के नाम से भी जानते थे, महज 28 साल की थीं। इस हत्या ने पाकिस्तान में महिला इन्फ्लुएंसर्स के लिए बन रहे असुरक्षित माहौल और उनके खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं पर एक बड़ी बहस को जन्म दिया है।

तक्षिला में हुई वारदात का पूरा घटनाक्रम

यह दुखद वाकया 14 अगस्त 2026 को इस्लामाबाद के नजदीक तक्षिला शहर में हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शामसो बीबी को काशिफ काशी नाम के एक व्यक्ति का फोन आया था। फोन पर मिले निर्देश के बाद वह अपने भाई नईमतुल्लाह और 15 साल की छोटी बहन असमिया के साथ एक कार में सवार होकर घर से बाहर निकलीं। जैसे ही उनकी गाड़ी तक्षिला बाईपास के पास एक पेट्रोल पंप के करीब पहुंची, मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात हमलावरों ने उनकी कार को घेर लिया। हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के गोलियों की बौछार कर दी। दो गोलियां सीधे शामसो बीबी की गर्दन में लगीं, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। गोलीबारी के दौरान कार का संतुलन बिगड़ गया और वह सामने से आ रहे एक डंप ट्रक से टकरा गई। इस हादसे में उनकी 15 साल की बहन असमिया गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उनके भाई के भी चोटिल होने की पुष्टि हुई है। पुलिस फिलहाल मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।

लगातार हो रही महिला क्रिएटर्स की टारगेट किलिंग

शामसो बीबी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके टिकटॉक अकाउंट पर 13 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए थे और यूट्यूब पर भी उनके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। उनकी मृत्यु के बाद एहतियात के तौर पर उनके टिकटॉक अकाउंट को प्राइवेट कर दिया गया है। दुर्भाग्य से, यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में किसी महिला सोशल मीडिया स्टार को इस तरह निशाना बनाया गया है। इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने समाज के खोखलेपन को उजागर किया है।

अन्य चर्चित मामले

  • सना यूसुफ: जून 2025 में इस्लामाबाद स्थित उनके आवास पर 17 साल की इस टिकटॉकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके टिकटॉक पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे। एक व्यक्ति द्वारा पीछा किए जाने और उसके प्रस्ताव को बार-बार ठुकराने के कारण यह हत्या की गई थी। हालांकि, मई 2026 में अदालत ने इस मामले के आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी।
  • हिरा अनवर: वर्ष 2025 में क्वेटा की 15 साल की कंटेंट क्रिएटर हिरा अनवर को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस मामले में उनके पिता और चाचा पर ही ऑनर किलिंग का आरोप लगा था। परिवार कथित तौर पर उनके टिकटॉक वीडियो और आधुनिक जीवनशैली के खिलाफ था।

क्यों निशाना बन रही हैं महिलाएं?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के रूढ़िवादी समाज में 'टिकटॉकर' शब्द का इस्तेमाल अक्सर महिलाओं के चरित्र पर लांछन लगाने के लिए किया जाता है। सोशल मीडिया ने महिलाओं को घर बैठे आत्मनिर्भर बनने और अपनी प्रतिभा दिखाने का माध्यम प्रदान किया है, लेकिन पुरानी सोच रखने वाले तत्वों को महिलाओं की यह आजादी और पहचान रास नहीं आती। महिलाओं का कैमरे के सामने आना, वीडियो बनाना और अपने जीवन के फैसले खुद लेना कुछ लोगों के लिए सांस्कृतिक मानदंडों का उल्लंघन है।

साइबर बुलिंग से शारीरिक हिंसा तक का सफर

डिजिटल युग में ऑनलाइन मिलने वाली धमकियां अक्सर वास्तविक दुनिया की हिंसा में तब्दील हो जाती हैं। कई महिला क्रिएटर्स अपनी दैनिक गतिविधियों और लोकेशन को सोशल मीडिया पर साझा करती हैं, जिससे उनका पीछा करने वालों या हमलावरों के लिए उन्हें ट्रैक करना बेहद आसान हो जाता है। पाकिस्तान में डिजिटल अधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि बड़ी संख्या में महिलाएं साइबर बुलिंग और पीछा किए जाने की शिकायतों से जूझ रही हैं। अक्सर जो खतरा केवल मोबाइल फोन की स्क्रीन तक महसूस होता है, वह बहुत जल्दी उनके घर की दहलीज तक पहुंच जाता है।

समाज का दोहरा रवैया और पीड़ित पर दोषारोपण

शामसो बीबी और सना यूसुफ जैसी महिलाओं की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, वे और भी भयावह थीं। कई लोग पीड़ितों को ही दोषी ठहराने में लग गए। उनकी जीवनशैली और सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता को उनकी हत्या का 'वाजिब कारण' बताया गया। यह मानसिकता सबसे अधिक खतरनाक है क्योंकि यह अपराधियों के बजाय पीड़ित को कटघरे में खड़ा करती है और हिंसा को एक प्रकार की नैतिक सजा के तौर पर सही ठहराने की कोशिश करती है।

कानून की स्थिति और न्याय का डर

यद्यपि पाकिस्तान में ऑनर किलिंग और साइबर अपराध से निपटने के लिए कड़े कानून मौजूद हैं, लेकिन इन मामलों में दोषसिद्धि (कनविक्शन) की दर काफी कम है। कानूनी जानकारों का तर्क है कि कमजोर जांच प्रक्रिया, सामाजिक दबाव और कानून की पेचीदगियों के कारण अपराधियों को सजा नहीं मिल पाती। वर्ष 2016 में कंदील बलोच की हत्या ने भी इसी समस्या को दुनिया के सामने रखा था। हालांकि सना यूसुफ के मामले में मिली मौत की सजा को एक आशा की किरण माना गया, लेकिन अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इक्का-दुक्का मामलों में सजा पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं है।

भविष्य को लेकर बढ़ता खौफ

मौजूदा हालात इतने भयावह हो गए हैं कि कई महिला क्रिएटर्स ने अपनी सुरक्षा के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट करना शुरू कर दिया है। बहुत सी महिलाएं अब अपनी लोकेशन साझा करने से डरती हैं और उन्होंने घर से बाहर निकलकर वीडियो बनाना बंद कर दिया है। अपनी सुरक्षा के लिए वे अब खुद को चारदीवारी के अंदर कैद करने को मजबूर हैं, जो उनकी रचनात्मकता और आजादी पर एक बड़ा प्रहार है।

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