बलूचिस्तान में हिंसा का नया दौर: 1 लाख लड़ाकों के साथ पाक सेना के लिए बड़ी चुनौती बना बीएलए

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा दावा किया है। संगठन ने कहा कि उनके पास एक लाख गुरिल्ला लड़ाके हैं, जो अब केवल दूरदराज के इलाकों तक सीमित नहीं बल्कि शहरी केंद्रों में भी रणनीतिक हमले कर रहे हैं।

बलूचिस्तान में अलगाववादियों का बड़ा दावा

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में जारी संघर्ष ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने हाल ही में एक चौंकाने वाला दावा किया है कि उनके पास लगभग एक लाख सक्रिय लड़ाके मौजूद हैं। यह संगठन अब न केवल दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध छेड़ रहा है, बल्कि अब उनके हमले शहरी इलाकों तक भी पहुंच गए हैं, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

रणनीति और हथियारों का स्रोत

बीएलए का कहना है कि उन्हें स्थानीय बलूच जनता का व्यापक समर्थन हासिल है, जो उनकी इस लड़ाई को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। जब बीएलए के नेता मीर यार बलूच से उनके हथियारों की आपूर्ति के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे काफी स्पष्टता से स्वीकार किया। उन्होंने दावा किया कि संगठन के लड़ाके अक्सर पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर छापेमारी करते हैं और वहीं से हथियार हासिल कर लेते हैं। हालांकि, यह ध्यान देना आवश्यक है कि बीएलए के वास्तविक सदस्यों की संख्या और उनके पास मौजूद हथियारों के जखीरे के बारे में कोई भी स्वतंत्र या विश्वसनीय आंकड़ा मौजूद नहीं है, इसलिए इन दावों की पुष्टि करना चुनौतीपूर्ण है।

हालिया हमलों का विवरण

संगठन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मात्र आठ दिनों की अवधि में उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ कुल 22 हमले किए हैं। बीएलए ने दावा किया है कि इन हमलों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इन आंकड़ों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। बीएलए अपनी आजादी की मांग को लेकर इस सशस्त्र संघर्ष को अनिश्चितकाल तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध नजर आता है।

हमलों के प्रमुख केंद्र

बीएलए की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, उनके लड़ाकों ने कलात और सोराब जैसे इलाकों में विस्फोटकों का सहारा लेते हुए घातक हमले किए। इन विशिष्ट हमलों में 20 सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया गया है। इसके अलावा, चागाई, खरान और पंजगुर में पुलिस व सुरक्षा ठिकानों को बीएलए ने सीधे निशाना बनाया है। इतना ही नहीं, नुश्की, तुरबत और क्वेटा जैसे शहरों में समन्वित हमले किए जाने की जिम्मेदारी भी इसी संगठन ने ली है। चागाई में व्यावसायिक वाहनों को निशाना बनाने और रेलवे लाइनों को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि हिंसा का दायरा अब तेजी से विस्तार ले रहा है।

वर्ष 2025 का भयावह आंकड़ा

बलूचिस्तान में हिंसा की आग बीते वर्षों में लगातार तेज हुई है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान बलूचिस्तान में कुल 254 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए थे। इन घटनाओं में कुल 1026 लोगों को हताहत होना पड़ा था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा 2024 की तुलना में लगभग 26 फीसदी अधिक था। बीएलए ने अकेले 2025 में 521 हमले करने का दावा किया था, जिनमें भारी संख्या में पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों के मारे जाने की बात कही गई थी। इन हमलों में आत्मघाती दस्ते, आईईडी धमाके, काफिलों पर हमले और महत्वपूर्ण संचार व रेलवे ढांचे को निशाना बनाना शामिल रहा है।

वर्ष 2026 में भी जारी हिंसा

साल 2026 की शुरुआत भी हिंसा और तनाव के साये में हुई। 30 और 31 जनवरी को बीएलए ने विभिन्न जिलों में एक साथ 12 हमले किए, जिसमें क्वेटा जैसे बड़े शहर भी शामिल थे। इन हमलों में पुलिस थानों, सैन्य चौकियों, बैंकों, स्कूलों, बाजारों और एक हाई-सिक्योरिटी जेल को निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुरुआती रिपोर्टों में 50 लोगों के मारे जाने की सूचना दी थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने करीब 40 घंटे का एक व्यापक अभियान चलाया और दावा किया कि उन्होंने 145 बीएलए लड़ाकों को मार गिराया है।

दावा: 85 फीसदी इलाके पर नियंत्रण

बीएलए ने हाल ही में यह भी दावा किया है कि बलूचिस्तान के लगभग 85 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र पर उनका नियंत्रण स्थापित हो चुका है। संगठन ने यहां तक दावा किया है कि उनके पास अब अपना अलग झंडा, राष्ट्रगान और 'बलूची फलूस' नाम की एक मुद्रा भी है। विशेषज्ञ इन दावों को बीएलए के राजनीतिक और सैन्य प्रचार के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि बीएलए एक प्रतिबंधित संगठन है।

संसाधनों और विवाद की जड़

बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल में सबसे बड़ा प्रांत है और यह प्राकृतिक संसाधनों के मामले में अत्यधिक समृद्ध है। यहां के निवासियों का लंबे समय से पाकिस्तान सरकार के साथ संसाधनों के बंटवारे, राजनीतिक असंतोष और मानवाधिकारों के मुद्दों को लेकर संघर्ष चल रहा है। बीएलए जैसे समूह खुद को आजादी के संघर्ष के रूप में पेश करते हैं, जबकि पाकिस्तान सरकार उन्हें आतंकवादी मानती है। वर्तमान में जिस तरह से रेलवे, सड़कों और संचार के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है, वह न केवल सरकार के लिए चुनौती है, बल्कि सामान्य जनता और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।

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